did you know mere dushman tu meri dosti ko tarse is known as baddua and abhishaap song of hindi cinema lyrics धर्मेंद्र का ये गाना माना जाता है हिंदी सिनेमा का अभिशाप, आपने सुनीं टूटे दिल की ऐसी बद्दुआ?, Bollywood Hindi News - Hindustan
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धर्मेंद्र का ये गाना माना जाता है हिंदी सिनेमा का अभिशाप, आपने सुनीं टूटे दिल की ऐसी बद्दुआ?

आपने प्रेम गीत, विरह गीत तो कई बार सुने होंगे, कभी अभिशाप गीत सुना है? हिंदी सिनेमा में एक ऐसा गाना है जिसमें एक प्रेमी के दिल से ऐसी-ऐसी बद्दुएं निकली हैं कि सुनकर ही खौफ हो जाए।

Fri, 22 May 2026 03:09 PMKajal Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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धर्मेंद्र का ये गाना माना जाता है हिंदी सिनेमा का अभिशाप, आपने सुनीं टूटे दिल की ऐसी बद्दुआ?

हिंदी सिनेमा में गाने भावनाओं के इजहार का सबसे बड़ा जरिया होते हैं। प्यार जताना हो या टूटे दिल का दर्द सुनाना हो, गीतकारों ने हर मिजाज के गाने लिख रखे हैं। वहीं गुजरे जमाने में एक ऐसा गाना आया जिसे लोग बद्दुआ के तौर पर देखते हैं। हम बात कर रहे हैं, आये दिन बहार के उस गाने की जिसे आनंद बक्शी ने लिखा था। यह गाना है मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे। इस गाने की एक-एक लाइन ध्यान से सुनेंगे तो समझ आएगा कि गाने वाले के दिल में कितनी नफरत भरी है।

हिंदी सिनेमा का बद्दुआ गीत

तू फूल बने पतझड़ का, तुझपे बहार ना आए कभी... सोचिए ये बद्दुआ देने वाले के मन में कितना दर्द होगा। 1966 में आई फिल्म आए दिन बहार के का ये गाना अभिशाप गीत के तौर पर लिया जाता है। गाना आशा पारेख और धर्मेंद्र पर फिल्माया गया है। मूवी के डायरेक्टर रघुनाथ झलानी थे। मूवी में आशा, धर्मेंद्र के अलावा बलराज साहनी भी हैं।

मोहम्मद रफी की दिल छूने वाली आवाज

इस गाने को मोहम्मद रफी ने ऐसी आवाज दी है कि यह सीधे रूह में उतरता है। आए दिन बहार के फिल्म में धर्मेंद्र रवि के रोल में हैं। आशा पारेख कंचन बनी हैं। दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है। दोनों की सगाई भी हो जाती है लेकिन रवि को पता चलता है कि उसकी जो मां हैं वह सगी नहीं। उन्होंने उसे बस पाला है। असल में वह एक कुंवारी मां का बेटा है। दोनों की शादी टूट जाती है। रवि की जिंदगी में उथल-पुथल मचती है। दोनों अलग हो जाते हैं। फिर दोनों के बीच गलतफहमी होती है। कंचन को लगता है कि रवि का उसकी सहेली रचना से अफेयर है। वह पार्टी में बच्चा गोद में लेकर दिखावा करती है जैसे कि वह उसका बच्चा हो। रवि उसे धोखेबाज समझता है फिर चिढ़कर गाना गाता है।

ये हैं गाने के बोल

मेरे दिल से सितमगर तूने अच्छी दिल्लगी की है

के बनके दोस्त अपने दोस्तों से दुश्मनी की है

मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे

मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे

मुझे गम देनेवाले तू खुशी को तरसे

मेरे दुश्मन...

तू फूल बने पतझड़ का तुझपे बहार न आये कभी

मेरी ही तरह तू तड़पे तुझको करार न आये कभी

तुझको करार न आए कभी

जीए तू इस तरह कि जिंदगी को तरसे

मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे

मेरे दुश्मन

इतना तो असर कर जाएं, मेरी वफाएं ओ बेवफा

एक रोज तुझे याद आएं, अपनी जफाएं ओ बेवफा

अपनी जफाएं ओ बेवफा

पशेमां होके रोए तू हंसी को तरसे

मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे

मेरे दुश्मन...

तेरे गुलशन से ज्यादा वीरान कोई विराना न हो

इस दुनिया में कोई तेरा अपना तो क्या बेगाना न हो

अपना तो क्या बेगाना न हो

किसी का प्यार क्या तू बेरुखी को तरसे

मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे

मुझे गम देनेवाले तू खुशी को तरसे

मेरे दुश्मन...

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