फिल्मों में AI का इस्तेमाल बिगाड़ रहा है ऑडियंस का एक्सपीरियंस? ये है AI से बनी फिल्मों के नुकसान और फायदे
इंडियन फिल्मों में AI के इस्तेमाल ने ऑडियंस का अनुभव बदल दिया है। AI से बनी फिल्मों को फीडबैक बेशक अच्छा ना मिला हो, लेकिन मेकर्स को फायदा जरूर हुआ। समझते हैं फिल्मों में AI के इस्तेमाल, इसके फायदे और नुकसान के बारे में।

आपने खबरों में पढ़ा और सुना होगा कि कैसे आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस AI दुनिया भर में तेजी से फैल गया है। व्यापक स्तर पर बड़ी कंपनियां AI का सहारा ले रही हैं। इसकी वजह से लोगों को फायदा तो हुआ है लेकिन साथ ही पढ़े-लिखे लोगों में बेरोजगारी की संख्या में तेजी से इजाफा भी। अब इसका असर इंडियन फिल्म इंडस्ट्री पर भी देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ समय में AI की मदद से फिल्में बनाई गई। रिलीज हो चुकी फिल्मों में बदलाव किए गए। AI से बने वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। आगे आने वाले दिनों में AI इंडियन सिनेमा को पूरी तरह से बदलने वाला है। फिल्मों में AI से होने वाले नुकसान और फायदे के बारे में समझते हैं।
इंडियन सिनेमा में नहीं बने ये नियम
हाल में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी फिल्म धुरंधर 2 का एक सीन था जिसमें रणवीर सिंह का किरदार सालों बाद अपनी मां से मिलने जाता है। वायरल वीडियो में रणवीर और मां की मुलाकात वाला सीन दिखा दिया जाता है।जबकि फिल्म की असल कहानी में किरदार की मुलाकात नहीं हो पाती और कहानी इस दुखद अंत के साथ खत्म हो जाती है। लेकिन AI से बने इस वीडियो पर सोशल मीडिया के कुछ यूजर्स ने संतुष्टि जाहिर की। वहीं कुछ ने इसे गलत ठहराया।
फिल्मों में AI जरूरी?
तो अब फिल्मों में AI के इस्तेमाल पर बहस शुरू हो गई है। हैरानी वाली बात ये है कि इंडियन सिनेमा में इसके इस्तेमाल को लेकर कोई कड़े नियम नहीं हैं। कई बड़ी कंपनियां जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और Nvidia फिल्मों में AI के इस्तेमाल के समर्थन में हैं। ये कंपनियां फिल्ममेकर्स के साथ मिलकर डील कर रही हैं। जबकि हॉलीवुड में फिल्म मेकिंग में AI के इस्तेमाल के खिलाफ बातें हो रही हैं। वहां के मेकर्स AI का समर्थन नहीं कर रहे हैं। अगर इस्तेमाल हो भी रहा है तो सख्त नियम तय हैं। यहां फिल्मों में AI के इस्तेमाल से पहले एक्टर से परमिशन लेने का नियम है।
फिल्मों में AI के इस्तेमाल के कई फायदे और नुकसान
फिल्मों में AI के इस्तेमाल के कई फायदे और नुकसान हैं। सबसे बड़ा फायदा डबिंग फील्ड को हो रहा है। जैसे फिल्म वॉर 2 के तेलुगू वर्जन को AI की मदद से डब किया गया। इसके अलावा AI के इस्तेमल से बन रही फिल्मों में सिर्फ एक चौथाई समय की लागत लग रही है। पैसे की बचत हो रही है। जैसे हाल में रिलीज हुई फिल्म बॉर्डर 2 में 1997 में आई फिल्म बॉर्डर के मरे हुए सिपाहियों वाला सीन दिखाया गया था। इस सीन ने ऑडियंस पर गहरी छाप छोड़ी, उन्हें इमोशनल कर दिया। इस सीन भर को देखने के लिए ऑडियंस थिएटर तक पहुंचीं। लेकिन असल में ये सीन AI की मदद से क्रिएट किया गया था।
जैसे जियो स्टार ने AI से महाभारत: एक धर्मयुद्ध नाम की सीरीज बनाई है। इस सीरीज को प्लेटफार्म पर 2.6 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। प्लेटफार्म को फायदा हुआ लेकिन क्वालिटी में कमी की वजह से IMDB पर उतनी शानदार रेटिंग नहीं मिली। अनुराग कश्यप जैसे फिल्ममेकर फिल्मों में AI के इस्तेमाल को सिर्फ बिजनेस मान रहे हैं।
फिल्मों में AI के इस्तेमाल के कई फायदे-
- समय की बचत- अगर एक फिल्म को बनाने में 4 महीने का समय लग रहा है तो AI से बनाई गई फिल्म या सीरीज इसे एक चौथाई समय यानी एक महीने में पूरी कर सकती है।
- पैसों की बचत- एक फिल्म को बनाने में करोड़ों का खर्च आता है। लेकिन AI की फिल्मों में वो काम आधे से भी कम पैसों में हो रहा है।
- फिल्मों में बदलाव- AI की मदद से फिल्मों में बदलाव किया जा रहा है। कुछ लोगों को अपनी पसंद की एंडिंग या एडिटिंग पसंद आई है।
- डबिंग में फायदा- भारत में कई तरह की भाषाएं बोली जाती है। AI की मदद से डबिंग आसान हो गई है। ऐसे में फिल्में बनने और ऑडियंस तक पहुंचने में कम समय लग रहा है। कम समय में ज्यादा कंटेंट बन पा रहा है।
AI के नुकसान-
अब इसके सबसे बड़े नुकसान की बात करते हैं। तो सिनेमा देखने की चाहत रखने वाला कोई भी शख्स एक अच्छे अनुभव के लिए अपने खास लोगों के साथ थिएटर तक फिल्म देखने पहुंचता है। लेकिन उसे वो अनुभव महसूस ही नहीं हुआ। AI से बनी फिल्में वो फील नहीं दे पा रही हैं। जैसे AI की मदद से वॉर 2 को तेलुगू में डब किया गया था। लेकिन लिपसिंक में कमी नजर आई। ये कमी फिल्म देखने वाले लोगों का अनुभव खराब कर रही है।
- क्वालिटी की कमी- AI से बनी फिल्मों में क्वालिटी की कमी नजर आएगी। वैसा महसूस करना मुश्किल होगा जैसा किसी बिना AI वाली फिल्म को देखकर फील होता है।
- बिजनेस- AI की मदद से मेकर्स ज्यादा कंटेंट बनाकर बिजनेस तो कर रहे हैं। लेकिन ऑडियंस को खुश नहीं कर पा रहे हैं।
- एक्टर्स के डिजिटल अवतार का बिमा इजाजत इस्तेमाल हो रहा है।
- फिल्मों में बदलाव किया जा रहा है। जैसे फिल्म रांझाणा में धनुष के किरदार कुंदन को AI की मदद से जिंदा कर दिया गया था।
- आगे उम्मीद की जा रही है कि फिल्मों में AI के इस्तेमाल पर कड़े नियम बनाए जाएंगे। ऑडियंस के अनुभव को खास बनाने की कोशिश होगी।
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