छत्तीसगढ़ में अब जबरन धर्म बदलवाने पर आजीवन कैद तक की सजा; नए कानून की खास बातें
छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए नया कानून लागू हो गया हैए जिसके तहत प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन पर सख्त पाबंदी है। अब स्वेच्छा से धर्म बदलने के लिए प्रशासन की अनुमति अनिवार्य है। उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने के साथ 7 साल से आजीवन कारावास तक की कड़ी सजा का प्रावधान है।

छत्तीसगढ़ में गलत तरीके से धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 अब कानून बन गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू हुए इस अधिनियम का उद्देश्य प्रलोभन, भय या धोखे से होने वाले धर्म परिवर्तन पर लगाम लगाना है। नए नियमों के अनुसार, स्वेच्छा से धर्म बदलने वालों को जिला प्रशासन को पूर्व सूचना देकर अनुमति लेनी होगी। इस कानून में उल्लंघन करने वालों के लिए 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। विशेष रूप से महिलाओं, नाबालिगों और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के मामलों में सज अधिक सख्त है।
क्या है मकसद?
राज्यपाल रमेन डेका ने 6 अप्रैल को छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 पर हस्ताक्षर किए। अब इसको सरकारी गजट में छपने के बाद लागू कर दिया गया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 19 मार्च को इसे विधानसभा में पेश किया था जहां चर्चा के बाद इसे पास कर दिया गया। सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद धर्म परिवर्तन की गतिविधियों को कंट्रोल करना और लोगों की धार्मिक आजादी की रक्षा करना है।
धर्म बदलने वाले को देना होगा आवेदन
नए कानून में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। धर्म बदलने वाले शख्स को अब प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा। इसके बाद निश्चित समय सीमा में सूचना सार्वजनिक कर आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। फिर जांच के बाद प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा।
संस्थाओं का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
अधिनियम में धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। उन्हें हर साल विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। ग्राम सभाओं को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है ताकि स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता बनी रहे। विवाह को धर्मांतरण का आधार नहीं माना गया है। विवाह के बाद भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी होगा।
सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक की सजा
अवैध धर्मांतरण के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। सामान्य मामलों में 7 से 10 साल तक की सजा और न्यूनतम 5 लाख रुपये जुर्माना तय किया गया है। महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, नाबालिगों जैसे विशेष वर्ग के मामलों में 10 से 20 साल कैद और न्यूनतम 10 लाख रुपये जुर्माना निर्धारित है। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपये जुर्माना लगाया जा सकेगा।
भय या प्रलोभन पर धर्मांतरण, बार-बार अपराध पर आजीवन कैद
लोक सेवक द्वारा अपराध पर 10 से 20 वर्ष की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना। वहीं धन के बलबूते से धर्मांतरण कराने पर 10 से 20 साल तक की कैद और 20 लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है। भय या प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण के मामलों में 10 से 20 साल तक की सजा और न्यूनतम 30 लाख रुपये जुर्माना तय किया गया है। अपराध को दोहराने पर आजीवन कारावास का प्रावधान है।
पीड़ित को क्षतिपूर्ति की भी व्यवस्था
अधिनियम में पीड़ितों के लिए पीड़ित को क्षतिपूर्ति की व्यवस्था भी शामिल की गई है। यदि किसी का धर्म परिवर्तन दबाव, प्रलोभन या धोखे से कराया गया है तो न्यायालय आरोपी को पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दे सकता है। मामलों की जांच उप निरीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी की ओर से की जाएगी। खुद को बेगुनाह साबित करने का भार आरोपी पर होगा। मामलों की सुनवाई के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से विशेष न्यायालय अधिसूचित किए जाएंगे।
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