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बेटे की मौत से दुखी मां-बाप ने दे दी जान, जो लिखकर गए उसे पढ़ रो रहे लोग

छत्तसीगढ़ के जांजगीर चांपा में एक बेहद दर्दनाक घटना हुई है। जिले के धरदेई इलाके के गांव में उस समय शोक की लहर दौड़ गई जब एक घर के बाहर नीम के पेड़ पर पति-पत्नी के शव लटके मिले।

Tue, 17 Feb 2026 09:53 AMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, जांजगीर चांपा
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बेटे की मौत से दुखी मां-बाप ने दे दी जान, जो लिखकर गए उसे पढ़ रो रहे लोग

छत्तसीगढ़ के जांजगीर चांपा में एक बेहद दर्दनाक घटना हुई है। जिले के धरदेई इलाके के गांव में उस समय शोक की लहर दौड़ गई जब एक घर के बाहर नीम के पेड़ पर पति-पत्नी के शव लटके मिले। कृष्णा पटेल और उनकी पत्नी रमा बाई हादसे में मारे गए बेटे का गम बर्दाश्त नहीं कर सके और एक साड़ी की गांठ से दोनों ने फंदा लगाकर जान दे दी।

जांजगीर चांपा के शिवरीनारायण पुलिस थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद लोग बेहद गमगीन हैं। दंपति ने चार पेज का एक सुसाइड नोट और एक वीडियो मैसेज भी छोड़ा है। सुसाइड नोट में उन्होंने जो कुछ लिखा है उसे जानकर लोगों की आंखें नम हो गईं। दरअसल, उनके 21 साल के इकलौते बेटे आदित्य पटेल की 2024 में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।

48 साल के कृष्णा राजमिस्त्री थे और उनकी पत्नी रमा बाई (47) गृहणी। बेटा आदित्य ही उनके लिए पूरी दुनिया थी। सुसाइड नोट में कृष्णा ने लिखा कि 'आदित्य हमारी जिंदगी, नींव और दुनिया था। एक आज्ञाकारी बेटा और एक दोस्त।' आदित्य को भगवान का आशीर्वाद बताते हुए कृष्णा ने लिखा कि उसकी हंसी से घर भरा रहता था। लेकिन एक्सीडेंट के बाद घर खामोश हो गया। कृष्णा ने लिखा है कि उस दिन आदित्य गांव के एक पुजारी के साथ मंदिर में यज्ञ में मदद करने गया था। आदित्य उस दिन जाने से हिचक रहा था लेकिन कृष्णा ने यह कहकर भेजा था कि यह भगवान का काम है। लेटर में उसने कहा, ‘यह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी। वह मुझे हमेशा के लिए छोड़ गया। हम जिंदा हैं, लेकिन जी नहीं रहे थे।’

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घटनास्थल के पास मिला सुसाइड नोट, बर्दाश्त नहीं कर सके गम

पुलिस अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि दंपति ने रविवार देर रात एक साड़ी की मदद से नीम के पेड़ पर फांसी का फंदा लगा लिया। पेड़ के पास एक दीवार के सहारे चढ़कर उन्होंने फंदा लगाया। चौकी प्रबारी सत्यम चौहान ने बताया कि घटनास्थल से सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इसमें उन्होंने बताया है कि इकलौते बेटे को खोने के गम को वे बर्दाश्त नहीं कर सके और यह कदम उठाया। गांववालों ने बताया कि बेटे की मौत के बाद वे बहुत गमगीन रहते थे। कभी किसी ने उन्हें हंसते हुए नहीं देखा।

'हम खुद को भगवान शिव को समर्पित कर रहे'

अपने अंतिम शब्दों में कृष्णा ने लिखा कि एक साल के दर्द के बाद उनके भीतर कुछ बदल गया था। पीड़ा खत्म नहीं हुई थी, बल्कि उसने एक नया रूप ले लिया था। उन्होंने लिखा 'भगवान कृपालु हैं। लंबे समय के दुख के बाद अब मेरा मन शांत है। मैं उनकी ओर खिंचाव महसूस कर रहा हूं। मेरी नियति भगवान में विलीन हो जाना है।' फांसी लगाने से पहले कृष्णा और रमा बाई ने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया। इसमें उन्होंने अपने वकील को शांत स्वर में संबोधित किया। उन्होंने अनुरोध किया कि आदित्य के हादसे के बाद मिली मुआवजे की रकम उनके बड़े भाइयों कुलभरा पटेल और जलबहरा पटेल को दे दी जाए। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा, 'हम दोनों पूरी तरह होश में और अपनी इच्छा से स्वयं को भगवान शिव को समर्पित कर रहे हैं। इसके लिए किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जाए। कृपया हमें खुशी-खुशी विदा करें।'

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