Chhattisgarh assembly passes staff selection board bill, promises transparent recruitment छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्तियों के लिए नए बोर्ड का गठन, जानिए क्या होगा बदलाव, Chhattisgarh Hindi News - Hindustan
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छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्तियों के लिए नए बोर्ड का गठन, जानिए क्या होगा बदलाव

CM साय ने जोर देकर कहा, हम युवाओं को एक पारदर्शी माहौल में अपने सपनों को पूरा करने के मौके देंगे। यह बिल उस भरोसे को फिर से कायम करने के बारे में है जो पिछली सरकार के दौरान कम हो गया था। हमारी सरकार में भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो-टॉलरेंस' की नीति अपनाई जा रही है।

Fri, 20 March 2026 06:51 PMSourabh Jain भाषा, रायपुर, छत्तीसगढ़
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छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्तियों के लिए नए बोर्ड का गठन, जानिए क्या होगा बदलाव

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने शुक्रवार को राज्य के विभिन्न विभागों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए एक नए बोर्ड के गठन से संबंधित विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। 'छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक, 2026' के कानून बनते ही वर्तमान 'छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल' (व्यापमं) का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और इसका विलय नए बोर्ड में कर दिया जाएगा। बोर्ड की स्थापना से राज्य सरकार पर लगभग 30 करोड़ रुपए का वार्षिक वित्तीय बोझ पड़ने की उम्मीद है।

सदन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस विधेयक को पेश किया, जिस पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दी गई। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं से युवाओं के सपनों को ठेस पहुंची। उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) से जुड़ी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है।

ज्यादा आसान व पारदर्शी व्यवस्था का दावा

साय ने कहा, 'अभी अलग-अलग विभागों द्वारा खाली पदों के लिए अलग-अलग विज्ञापन निकाले जाते हैं, जिससे उम्मीदवारों को हर पद के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता है। हर विभाग की चयन प्रक्रिया अलग होती है, और हर बार अलग-अलग परीक्षाएं करवाने से भर्ती एजेंसियों पर बहुत ज्यादा दबाव भी पड़ता है। लेकिन प्रस्तावित बोर्ड एक ज़्यादा आसान और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करके इन चुनौतियों का समाधान करेगा।'

एक जैसी योग्यता वाले पदों के लिए एक ही विज्ञापन

साय ने कहा कि जिन पदों के लिए एक जैसी योग्यता की आवश्यकता होती है, उनके लिए एक ही विज्ञापन निकाला जा सकता है, जिससे सीधी भर्ती में एकरूपता, पारदर्शिता, सुरक्षा और कुशलता सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड बनने के बाद, परीक्षाएं हर साल और एक तय समय-सीमा के अंदर करवाई जा सकेंगी। साय ने आगे कहा कि एक परीक्षा कैलेंडर भी जारी किया जाएगा, जिससे उम्मीदवारों के लिए व्यवस्थित तरीके से तैयारी करना आसान हो जाएगा।

तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों के चयन में एकरुपता लाना

बोर्ड का मकसद क्लास III और IV के पदों के लिए चयन प्रक्रिया में एकरूपता लाना, और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए दूसरी परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं को नियंत्रित और आयोजित करना है। बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में राज्य सरकार के सभी विभाग शामिल होंगे, जिनमें वैधानिक निकाय, बोर्ड, प्राधिकरण और समय-समय पर अधिसूचित किए गए अन्य संस्थान भी शामिल हैं। बोर्ड परीक्षाओं, इंटरव्यू, स्किल टेस्ट या अन्य तरीकों जैसी चयन प्रक्रियाएँ आयोजित करेगा, और साथ ही राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पेशेवर पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश परीक्षाओं और अन्य परीक्षाओं की देखरेख भी करेगा।

सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बोर्ड में एक अध्यक्ष पद होगा, जो प्रधान सचिव के पद से नीचे का अधिकारी नहीं होगा, और तीन तक सदस्य होंगे जो संयुक्त सचिव के समकक्ष पदों पर होंगे। राज्य सरकार बोर्ड में उप सचिव के पद से नीचे का न होने वाला एक सचिव नियुक्त करेगी, जो मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के रूप में भी कार्य करेगा। आगे उन्होंने कहा कि बोर्ड, जिसमें एक परीक्षा नियंत्रक भी शामिल होगा, के पास ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई करने की शक्तियां होंगी जहां उम्मीदवार अनुचित साधनों का उपयोग करते हैं या परीक्षाओं में बाधा डालते हैं।

विधेयक के अनुसार, किसी भी लोक परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित होगा। इसके अलावा, ऐसे कृत्यों के लिए साजिश या मिलीभगत भी दंडनीय होगी। परीक्षा प्रक्रिया में बाधा डालने के उद्देश्य से अनधिकृत व्यक्तियों का परीक्षा केंद्र में प्रवेश भी वर्जित रहेगा।

विधेयक में अभ्यर्थियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान

विधेयक में अभ्यर्थियों के लिए भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई अभ्यर्थी दोषी पाया जाता है, तो उसका परिणाम रोका जाएगा और उसे न्यूनतम एक वर्ष से लेकर अधिकतम तीन वर्षों तक परीक्षा में बैठने से प्रतिबंधित किया जा सकता है।

अन्य दोषियों के लिए तीन से 10 वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। यदि किसी सेवा प्रदाता या संस्था की संलिप्तता पाई जाती है, तो उस पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और उसे कम से कम तीन वर्ष तक परीक्षा संचालन से प्रतिबंधित किया जाएगा। साथ ही, संबंधित अधिकारियों या प्रबंधन की सहमति से अपराध सिद्ध होने पर उन्हें भी तीन से 10 वर्ष तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

विधेयक में यह भी प्रावधान है कि ऐसे मामलों की जांच उप पुलिस निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) से कम रैंक के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार जांच किसी केंद्रीय या राज्य एजेंसी को भी सौंप सकती है।

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