2 women cooks die in Chhattisgarh during mid-day meal workers protest enters 31st day छत्तीसगढ़ में वेतन बढ़ाने की मांग कर रहीं दो महिला रसोइयों की मौत, हड़ताल को महीनाभर हुआ पूरा, Chhattisgarh Hindi News - Hindustan
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छत्तीसगढ़ में वेतन बढ़ाने की मांग कर रहीं दो महिला रसोइयों की मौत, हड़ताल को महीनाभर हुआ पूरा

मिड डे मील में खाना बनाने वाले इन हड़ताली रसोइयों में ज्यादातर महिलाएं हैं, जो कि पिछले साल 29 दिसंबर से नवा रायपुर अटल नगर के टुटा धरना स्थल पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। ये लोग अपनी दैनिक मजदूरी को 66 रुपए से बढ़ाकर 400 रुपए से अधिक करने की मांग कर रहे हैं।

Wed, 28 Jan 2026 07:56 PMSourabh Jain पीटीआई, रायपुर, छत्तीसगढ़
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छत्तीसगढ़ में वेतन बढ़ाने की मांग कर रहीं दो महिला रसोइयों की मौत, हड़ताल को महीनाभर हुआ पूरा

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोइये (मिड-डे मील कुक) पिछले महीनेभर से दैनिक मजदूरी को 66 रुपए से बढ़ाकर 400 रुपए करने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। इसी दौरान बीमार पड़ी दो महिला कुक की हाल ही में इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतकों की पहचान रुकमणी सिन्हा और दुलारी यादव के रूप में हुई है। ये कुक अपने मानदेय में बढ़ोतरी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और इसी दौरान इन दोनों महिलाओं की तबीयत खराब हो गई थी। हालांकि, राज्य सरकार ने इन मौतों का सीधा संबंध मिड-डे मील कुक के आंदोलन से होने से इनकार किया है।

इन दोनों मौत की जानकारी देते हुए आंदोलनकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक एसोसिएशन और उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि बालोद जिले की मिड-डे मील कुक रुकमणी सिन्हा की 26 जनवरी को पड़ोसी राजनांदगांव जिले के एक अस्पताल में मौत हो गई, जबकि सरकारी खाद्य योजना के तहत काम करने वाली बेमेतरा जिले की रहने वाली एक अन्य महिला दुलारी बाई यादव की उसी दिन तड़के दुर्ग जिले के भिलाई शहर के एक अस्पताल में मौत हो गई।

दामाद ने बताया तबीयत खराब होने के बाद लौटी थीं

इस बारे में बुधवार को पीटीआई से बात करते हुए रुकमणी सिन्हा के दामाद मुकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि उनकी सास, जो कि बालोद जिले के कुसुमकासा गांव की रहने वाली थीं, ने 20 से 23 जनवरी तक रायपुर में विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और तबीयत खराब होने की वजह से 24 जनवरी को घर लौट आईं। उन्हें 25 जनवरी की सुबह बालोद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां 26 जनवरी की दोपहर को उनकी मौत हो गई। दामाद ने बताया कि उनकी सास ब्लड प्रेशर से संबंधित समस्याओं से पीड़ित थीं।

दूसरी महिला की भी तबीयत धरना स्थल पर बिगड़ी

उधर दुलारी यादव के बारे में जानकारी देते हुए रसोइया संयुक्त संघ की बेरला ब्लॉक यूनिट की हेड राधिका साहू ने बताया कि 50 साल की दुलारी बाई यादव बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के सलधा-खमारिया गांव के एक प्राइमरी स्कूल में बच्चों के लिए मिड-डे मील बनाती थीं। उन्होंने बताया कि यादव 29 दिसंबर से बीच-बीच में आंदोलन में हिस्सा ले रही थीं और इसी दौरान 24 जनवरी को विरोध स्थल पर उनकी तबीयत खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें भिलाई के शंकराचार्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 26 जनवरी की सुबह उनकी मौत हो गई।

सरकार का दोनों मौतों व आंदोलन के बीच संबंध मानने से इनकार

इस बीच, एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रामराज कश्यप ने आरोप लगाया कि 31 दिनों के आंदोलन के बावजूद सरकार ने रसोइयों की मांगों पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया है और दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की हालत लगातार बिगड़ रही है। हालांकि, राज्य सरकार ने दोनों मौतों और विरोध प्रदर्शन के बीच किसी भी तरह का सीधा संबंध होने से इनकार कर दिया है। इस बारे में एक बयान जारी करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने कहा कि विरोध कर रहे रसोइयों के प्रतिनिधियों ने निदेशक और सचिव (स्कूल शिक्षा विभाग) सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बात की है, और सरकार उनके मानदेय में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी, यानी 500 रुपए (लगभग 17 रुपए प्रति दिन की बढ़ोतरी) करने के लिए तैयार है।

​​DPI ने कहा कि सिन्हा 20 और 21 जनवरी को विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं, लेकिन बाद में घर लौट आईं, जहां उनकी तबीयत खराब हो गई और उन्हें एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, और यादव पहले से ही एक गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं और उन्हें शंकराचार्य अस्पताल भिलाई में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई। दोनों मामलों में मौतों का वर्तमान में जारी विरोध प्रदर्शन से कोई सीधा संबंध नहीं था। राज्य सरकार ने कहा कि वह सभी मिड-डे मील रसोइयों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के प्रति संवेदनशील है और उनके हित में आवश्यक कदम उठाना जारी रखेगी।

29 दिसंबर से हड़ताल पर बैठे हैं रसोइये

मिड डे मील में खाना बनाने वाले इन हड़ताली रसोइयों में ज्यादातर महिलाएं हैं, पिछले साल 29 दिसंबर से नवा रायपुर अटल नगर के टुटा धरना स्थल पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। ये लोग अपनी दैनिक मजदूरी को 66 रुपए से बढ़ाकर 400 रुपए से अधिक करने की मांग कर रहे हैं। ये हड़ताली महिलाएं जो कि सरकार की महत्वाकांक्षी पोषण योजनाओं में से एक मिड-डे मील के मुख्यकार्य बल हैं,'छत्तीसगढ़ स्कूल मध्याह्न भोजन रसोइया संयुक्त संघ' (CSMBRSS) के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। सरकार की इस मध्यान्ह भोजन योजना के तहत, सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को मुफ्त, गर्म पका हुआ भोजन प्रदान किया जाता है।

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