UPSC : Supreme Court decision after availing sc st obc reservation benefits not entitled general category seat UPSC : आरक्षण लाभ लेने के बाद जनरल सीट पाने का हक नहीं, भले ही अंक अधिक हो; सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, Career Hindi News - Hindustan
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UPSC : आरक्षण लाभ लेने के बाद जनरल सीट पाने का हक नहीं, भले ही अंक अधिक हो; सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा में यदि आवेदक ने एक बार आरक्षण का लाभ ले लिया है तो वह सामान्य श्रेणी की सीटों पर नियुक्ति पाने का हकदार नहीं है, भले ही उनका कुल अंक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से अधिक हो।

Wed, 7 Jan 2026 06:44 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, प्रभात कुमार, नई दिल्ली
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UPSC : आरक्षण लाभ लेने के बाद जनरल सीट पाने का हक नहीं, भले ही अंक अधिक हो; सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा में यदि आवेदक ने एक बार आरक्षण का लाभ ले लिया है तो वह सामान्य श्रेणी की सीटों पर नियुक्ति पाने का हकदार नहीं है, भले ही उनका कुल अंक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से अधिक हो। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील स्वीकार करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला दिया है। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की पीठ ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अनारक्षित कैडर में एक अनुसूचित जाति के उम्मीदवार की नियुक्ति की मांग पर विचार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उक्त आवेदक ने आरंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ उठाया था।

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि एक बार जब किसी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ने आरक्षण का लाभ ले लिया है, तो उसे सामान्य श्रेणी के रिक्तियों/सीटों पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही, कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति के एक उम्मीदवार को सामान्य श्रेणी की सीट पर नियुक्त करने का आदेश दिया था। पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया। हाईकोर्ट ने आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को सिर्फ इसलिए सामान्य श्रेणी में नियुक्त करने का आदेश दिया था क्योंकि उसने सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से ऊंची फाइनल रैंक हासिल की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ने आरंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ उठाया है, इसलिए, उन्हें सामान्य श्रेणी की सीटों पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए आरक्षित श्रेणी का लाभ उठाने के बाद, उम्मीदवार प्रतिवादी नंबर-1 (जी किरण) बाद में सिर्फ इसलिए सामान्य सीट पर चुने जाने का दावा नहीं कर सकता कि उसने बाद के चरणों में 34 सामान्य श्रेणी के आवेदक से बेहतर प्रदर्शन किया। पीठ ने कहा कि अगर कोई उम्मीदवार परीक्षा के किसी भी स्टेज पर छूट का सहारा लेता है, तो वह परीक्षा नियम, 2013 के नियम 14(ii) के प्रोविजो के दायरे में नहीं आएगा और उस स्थिति में, कैडर आवंटन के लिए लागू पॉलिसी के मकसद से, वह जनरल स्टैंडर्ड पर चुने गए उम्मीदवारों की लिस्ट में नहीं आएगा, जो अपने होम स्टेट कैडर की जनरल इनसाइडर वैकेंसी पर इनसाइडर उम्मीदवार के तौर पर दावा कर रहा हो।

यह है मामला

दरअसल, यूपीएससी द्वारा 2013 में भारतीय वन सेवा परीक्षा से मामले में विवाद शुरू हुआ। यह परीक्षाा दो चरणों में हुई थी, प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य और साक्षात्कार। प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य श्रेणी का कट-ऑफ 267 अंक था, जबकि अनुसूचित जाति (एससी) उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ 233 था। इस परीक्षा में आरक्षित श्रेणी के आवेदक जी. किरण ने रियायती कट-ऑफ का फायदा उठाकर 247.18 अंक के साथ क्वालिफाई किया, जबकि सामान्य श्रेणी के आवेदक एंटनी एस. मारियप्पा ने जनरल कट-ऑफ पर 270.68 अंक के के साथ क्वालिफाई किया।

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हालांकि, अंतिम मेधा सूची में, आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार जी. किरण की रैंक 19 थी और एंटनी की रैंक 37 थी। लेकिन, कैडर आवंटन के दौरान, कर्नाटक में केवल एक जनरल इनसाइडर वैकेंसी थी और कोई एससी इनसाइडर वैकेंसी नहीं थी। केंद्र सरकार ने जनरल इनसाइडर पोस्ट एंटनी को दी और किरण को तमिलनाडु कैडर में भेजा।

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