UPSC : लोग पूछते थे ये बच्चा समझ और बोल लेता है? IIT से पढ़े यूपी के लाल ने यूपीएससी IES भी किया क्रैक
दिव्यांग होने के बावजूद यूपी के मानवेंद्र ने अपनी मानसिक दृढ़ता के बल पर यूपीएससी आईईएस परीक्षा (भारतीय इंजीनियरिंग सेवा) में जनरल कैटेगरी से 112वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है।

UPSC IES : मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो शारीरिक अक्षमता कभी आड़े नहीं आती। इस बात को सच कर दिखाया है यूपी में बुलंदशहर जिले के लाल मानवेंद्र सिंह ने। दिव्यांग होने के बावजूद मानवेंद्र ने अपनी मानसिक दृढ़ता के बल पर यूपीएससी आईईएस परीक्षा (भारतीय इंजीनियरिंग सेवा) में जनरल कैटेगरी से 112वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। मानवेंद्र की सफलता की राह आसान नहीं थी। पिता मनोज कुमार के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था लेकिन उनकी माता रेनू सिंह ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। रेनू सिंह नगर के एक विद्यालय में प्रधानाचार्य हैं। मानवेंद्र ने अपनी नानी के घर रहकर संघर्ष किया।
मानवेंद्र को बचपन से ही सेरेब्रल पाल्सी है। यह दिमाग से जुड़ी बीमारी होती है, जिसमें शरीर की कई नसें ठीक से काम नहीं करतीं और चलने-फिरने में परेशानी होती है। जब मानवेंद्र सिर्फ 6 महीने के थे, तभी से उनका इलाज शुरू हो गया था। उनकी मां और नानी-नाना ने इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी । हर तरह का इलाज कराया गया।
जनरल कैटेगरी में ऑल इंडिया 112वीं रैंक
बेटे की सफलता पर न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए रेनू सिंह ने कहा, 'यूपीएससी की परीक्षा में कई लेवल होते हैं। कहीं कोई चूक हो जाए तो फिर से शुरू करना पड़ता है। मेरा बेटा का इस मुकाम पर पहुंचना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। मानवेंद्र ने यूपीएससी आईईएस में जनरल कैटेगरी में ऑल इंडिया 112वीं रैंक (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकॉम इंजीनियरिंग ब्रांच) हासिल की है। इ्न्होंने पीडब्ल्यूडी कोटे का इस्तेमाल नहीं किया है। ये 10वीं तक खालसा पब्लिक स्कूल बुलंदशहर से पढ़े। इसके बाद 12वीं मॉर्डर्न पब्लिक स्कूल से की। 12वीं के साथ जेईई मेन व एडवांस्ड की तैयारी की। जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया 63वीं रैंक आई और आईआईटी पटना के बीटेक कोर्स में दाखिला। 2024 में बीटेक पूरा करने के बाद यूपीएससी आईईएस परीक्षा की तैयारी मे जुट गए। आज ये आईएस अफसर बन गए हैं।'
चुनौतियों के बारे में बताते हुए रेनू सिंह ने बताया, 'जब हम इन्हें बाहर लेकर जाते थे तो लोग इसे देखकर पूछते थे ये सुन लेता है? अरे ये बोल और समझ लेता है? ये खाना अपने आप खा लेता है? ऐसे सवाल हमें बहुत ज्यादा परेशान करते थे। लेकिन हमने इन बातों को माइंड नहीं किया। सिर्फ मानवेंद्र के आईक्यू लेवल को पहचानकर इसी पर काम करते रहे। मानवेंद्र ने भी पूरे दिशानिर्देशों का पालन किया।'
पेंसिल पकड़वाना सबसे बड़ा चैलेंज
उन्होंने कहा, 'मानवेंद्र को बचपन में पेंसिल पकड़वाना ही बड़ा चैलेंज था। ये मुट्ठी में पेंसिल पकड़ा करता था। इससे ये लिख नहीं पाता था। मैं मजबूरन पेंसिल की नोंक इसके चुभा दिया करती थी तो ये रोया करता था। मैं भी इससे अलग हटकर रो दिया करती थी, फिर इसके पास आकर वही काम करती थी। सबसे बड़ा चैलेंज इसे पेंसिल से लिखवाना था। लेकिन प्रयास से इसने मेरी उस मुश्किल को
आसान कर दिया। जो लोग इसकी काबिलियत पर प्रश्न उठाते थे, आज इसने उन्हें करार जवाब दिया है। इसने साबित किया है कि अगर आपने ठान लिया है तो कोई भी बाधा आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।'




साइन इन