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बड़ी खुशखबरी, UPSC 2026 से बदलेगा नियम; अब परीक्षा के तुरंत बाद मिलेगी प्रोविजनल Answer Key

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 से प्रोविजनल आंसर की जारी करेगा। छात्र अब क्यूपीरेप (QPRep) पोर्टल के जरिए सवालों और जवाबों पर आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।

Tue, 24 March 2026 05:47 AMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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बड़ी खुशखबरी, UPSC 2026 से बदलेगा नियम; अब परीक्षा के तुरंत बाद मिलेगी प्रोविजनल Answer Key

यूपीएससी (UPSC) यानी संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा को देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गिना जाता है। हर साल लाखों युवा अपनी आंखों में आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) बनने का ख्वाब सजाकर इस परीक्षा में बैठते हैं। लेकिन परीक्षा देने के बाद सबसे बड़ी उलझन यह होती है कि उन्होंने जो जवाब लिखे हैं, वे सही हैं या नहीं। बरसों से उम्मीदवारों की यह शिकायत रही है कि परीक्षा की प्रक्रिया में थोड़ी और पारदर्शिता होनी चाहिए। अब सरकार ने इन लाखों युवाओं की आवाज सुन ली है और एक बेहद अहम फैसला लिया है जो सिविल सेवा परीक्षा 2026 से लागू होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में एक बड़ी जानकारी साझा की है। सरकार ने बताया है कि यूपीएससी सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 से प्रोविजनल आंसर की (UPSC Pre Provisional Answer Key) जारी करने की शुरुआत करेगा। सिर्फ सिविल सेवा ही नहीं, बल्कि यूपीएससी द्वारा आयोजित होने वाली सभी स्ट्रक्चर्ड परीक्षाओं के लिए यह नियम लागू होगा। कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा के एक सवाल के लिखित जवाब में यह खुशखबरी दी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का होगा पालन

कार्तिकेय शर्मा ने सरकार से पूछा था कि प्रारंभिक परीक्षा के अंकों और आंसर की को रियल-टाइम में जारी करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही भर्ती परीक्षाओं में फैक्चुअल गलतियों को चुनौती देने के लिए उम्मीदवारों के वास्ते सिंगल-विंडो शिकायत पोर्टल स्थापित करने के लिए सरकार क्या कर रही है। इसके जवाब में मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का पालन करते हुए, यूपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा आयोजित होने के बाद अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रोविजनल आंसर की जारी करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार कर लिए हैं।

आंसर की मिलने से छात्र लगा पाएंगे अपना अंदाजा

यह कदम लाखों छात्रों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। पहले छात्रों को आंसर की के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था या कोचिंग संस्थानों की आंसर की पर निर्भर रहना पड़ता था, जो कई बार सटीक नहीं होती थीं। हालांकि, मंत्री ने यह भी साफ किया कि प्रारंभिक परीक्षा के अंक (मार्क्स) पहले की तरह ही परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही जारी किए जाएंगे। लेकिन प्रोविजनल आंसर की मिलने से छात्रों को यह अंदाजा जरूर लग जाएगा कि वे मुख्य परीक्षा के लिए क्वालिफाई कर रहे हैं या नहीं, जिससे वे अपनी आगे की तैयारी सही दिशा में और बिना किसी उहापोह के कर सकेंगे।

दर्ज करा पाएंगे आपत्ति

इसके अलावा, परीक्षा में पूछे गए सवालों या आंसर की में अगर कोई गलती होती है, तो उसे चुनौती देने की प्रक्रिया को भी आसान और पारदर्शी बनाया गया है। जितेंद्र सिंह ने बताया कि फैक्चुअल गलतियों को चुनौती देने के लिए, यूपीएससी ने अपनी वेबसाइट upsconline.nic.in पर क्यूपीरेप (QPRep - Question Paper Representation Portal) नाम से एक डेडिकेटेड पोर्टल शुरू किया है।

सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 से उम्मीदवार इस पोर्टल के जरिए प्रश्न पत्र और प्रोविजनल आंसर की में किसी भी तरह की विसंगति या गलती को लेकर अपनी आपत्ति आसानी से दर्ज करा सकेंगे। इसके साथ ही यूपीएससी सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) और ईमेल पर उम्मीदवारों द्वारा भेजी गई शिकायतों का भी निपटारा करता है।

यूपीएससी की सभी परीक्षाओं पर होगा लागू

इस फैसले की अहमियत को समझने के लिए हमें इस परीक्षा के स्तर और इसमें शामिल होने वाले छात्रों की तादाद को देखना होगा। उदाहरण के तौर पर, साल 2025 की सिविल सेवा परीक्षा को ही लें। इस परीक्षा के लिए सरकार को कुल 9,37,876 आवेदन मिले थे। इनमें से 5,76,793 उम्मीदवारों ने असल में परीक्षा दी थी। यूपीएससी पूरे साल में कम से कम 16 अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित करता है। इतनी बड़ी संख्या में जब छात्र किसी परीक्षा का हिस्सा बनते हैं तो एक पारदर्शी और जवाबदेह सिस्टम का होना बेहद जरूरी हो जाता है।

गौरतलब है कि यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों का जीवन किसी तपस्या से कम नहीं होता। वे सालों तक दिन-रात एक करके पढ़ाई करते हैं। ऐसे में एक-एक नंबर उनके भविष्य का फैसला कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और सरकार का यह कदम इस बात की गारंटी देता है कि सिस्टम अब छात्रों के प्रति ज्यादा संवेदनशील और जवाबदेह हो रहा है। प्रोविजनल आंसर की पर आपत्ति जताने का अधिकार मिलने से छात्रों के मन में यह विश्वास जागेगा कि उनके साथ पूरा इंसाफ हो रहा है। अगर आयोग के किसी सवाल या जवाब में कोई तकनीकी या फैक्चुअल खामी है तो उसे वक्त रहते सुधारा जा सकेगा।

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