UPPSC : पास कर ली PCS प्रीलिम्स! मेंस में खुली 410 अभ्यर्थियों की पोल, यूं छिन रहा योग्य छात्रों का हक
यूपीपीएससी ने पीसीएस 2025 मुख्य परीक्षा के 410 अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए हैं। फर्जी सूचना और बिना शैक्षिक योग्यता वाले इन उम्मीदवारों के कारण योग्य छात्रों का बड़ा नुकसान हो रहा है।

पीसीएस अफसर बनने का ख्वाब हर साल उत्तर प्रदेश और देश के लाखों युवा देखते हैं। प्रयागराज के छोटे-छोटे कमरों में दिन-रात एक करके, किताबों के पन्नों में अपनी जवानी खपा देने वाले इन छात्रों का एक ही सपना होता है लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करके अपने परिवार का नाम रोशन करना। लेकिन जरा सोचिए, कैसा महसूस होता होगा जब इन होनहार और योग्य छात्रों का हक कोई ऐसा अभ्यर्थी छीन ले, जो असल में उस पद के लायक ही नहीं है? उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की सबसे प्रतिष्ठित 'सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा' (पीसीएस) भर्ती में कुछ ऐसा ही चिंताजनक खेल सामने आ रहा है। फर्जी सूचना और गलत दावों के आधार पर परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के कारण हर साल सैकड़ों योग्य और होनहार छात्रों को अकारण ही रेस से बाहर होना पड़ रहा है।
410 अभ्यर्थियों का पत्ता साफ, मुख्य परीक्षा से हुए बाहर
हाल ही में पीसीएस 2025 की मुख्य परीक्षा (Mains Exam) के लिए आए आवेदन पत्रों की जब आयोग ने बारीकी से स्क्रूटनी की, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। कड़ाई से की गई इस जांच के बाद यूपीपीएससी ने 410 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा से सीधे तौर पर बाहर का रास्ता दिखा दिया है। ये वो लोग हैं जिन्होंने प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) तो पास कर ली थी, लेकिन जब मुख्य परीक्षा के लिए अपने दस्तावेज पेश करने की बारी आई, तो इनकी पोल खुल गई। इतनी बड़ी संख्या में फॉर्म निरस्त होना इस बात का सुबूत है कि आवेदन करते समय अभ्यर्थी या तो भारी लापरवाही बरतते हैं या फिर जानबूझकर गलत जानकारी देकर सिस्टम को चकमा देने की कोशिश करते हैं।
बिना डिग्री के ही कर दिया आवेदन
निरस्त किए गए इन 410 आवेदनों में से सबसे ज्यादा संख्या उन लोगों की है, जिनके पास आवेदित पद के लिए जरूरी शैक्षिक योग्यता ही नहीं थी। आंकड़े बताते हैं कि इनमें से 260 अभ्यर्थी ऐसे पाए गए जिन्होंने ऐसे विशिष्ट पदों के लिए आवेदन कर दिया था, जिसके लिए उनके पास आवश्यक डिग्री या अर्हता (Educational Qualification) ही नहीं थी। दरअसल, पीसीएस में कई पद ऐसे होते हैं जिनके लिए सामान्य ग्रेजुएशन के बजाय किसी विशेष विषय में स्नातक (लॉ, एग्रीकल्चर आदि) होना जरूरी होता है। कई अभ्यर्थी महज अपना चांस मारने के लिए या नासमझी में इन पदों पर टिक कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि वे प्रीलिम्स की मेरिट में तो जगह बना लेते हैं, लेकिन मुख्य परीक्षा के समय जब प्रमाण पत्र मांगे जाते हैं, तो उनके पास दिखाने के लिए कुछ नहीं होता।
आरक्षण के नाम पर बड़ा खेल
शैक्षिक योग्यता के अलावा एक और बड़ा खेल आरक्षण के दावों को लेकर होता है। कई अभ्यर्थी फॉर्म भरते समय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित (DFF), भूतपूर्व सैनिक या अन्य विशेष श्रेणियों का विकल्प चुन लेते हैं ताकि उन्हें कम कट-ऑफ का फायदा मिल सके। पीसीएस 2025 की स्क्रूटनी में दर्जनों ऐसे छात्र पकड़े गए हैं जिन्होंने आरक्षण का दावा तो ठोक दिया, लेकिन जब मुख्य परीक्षा के फॉर्म के साथ संबंधित श्रेणी का प्रमाण पत्र अपलोड करने की बारी आई, तो उनके हाथ खाली थे। जब इन अभ्यर्थियों को अपनी गलती या फर्जीवाड़े का अहसास हुआ, तो वे आयोग को पत्र लिखकर अनुरोध करने लगे कि उन्हें आरक्षित श्रेणी से हटाकर सामान्य (General) श्रेणी में मान लिया जाए। लेकिन आयोग के सख्त नियमों के अनुसार, आवेदन की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद श्रेणी में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता, इसलिए ऐसे सभी फॉर्म निर्दयता से निरस्त कर दिए गए।
असली और योग्य अभ्यर्थियों पर पड़ रही है मार
इस पूरी प्रक्रिया का सबसे स्याह पहलू यह है कि इन अयोग्य और फर्जी दावे करने वाले अभ्यर्थियों की वजह से असली और योग्य अभ्यर्थियों का भारी नुकसान हो रहा है। जो अभ्यर्थी अर्ह नहीं हैं, वे प्रारंभिक परीक्षा में सफल होकर मेरिट को बेवजह बढ़ा देते हैं। इसके कारण कट-ऑफ हाई चली जाती है और जो छात्र सच में उस पद के लायक थे, वे महज कुछ अंकों से प्रीलिम्स में ही बाहर हो जाते हैं। कई तो ऐसे भी होते हैं जो प्रीलिम्स पास कर लेते हैं लेकिन मुख्य परीक्षा का फॉर्म ही नहीं भरते। इस तरह वे जानबूझकर या अनजाने में एक योग्य उम्मीदवार का हक मार लेते हैं।
आयोग का सख्त रुख
आयोग ने फिलहाल जिन 410 अभ्यर्थियों का आवेदन निरस्त किया है, उन्हें अपना प्रत्यावेदन या सफाई पेश करने के लिए 17 मार्च तक का समय दिया है। हालांकि, जिस तरह से आयोग ने सख्ती दिखाई है, उससे एक बात तो साफ है कि यूपीपीएससी अब किसी भी तरह की लापरवाही या फर्जीवाड़े को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह एक सकारात्मक संदेश है कि सिस्टम की कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।




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