बिहार नहीं इस राज्य के अभ्यर्थी सबसे ज्यादा बनते हैं IAS-IPS, UPSC के आंकड़े को लेकर सुधार लें गलतफहमी
देशभर में यह धारणा आम है कि सबसे ज्यादा आईएएस-पीसीएस बिहार से निकलते हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां करती है।

भारत में सिविल सेवा की बात आते ही बिहार का नाम अपने-आप जुबान पर आ जाता है। आम धारणा यह बनी हुई है कि सबसे ज्यादा आईएएस, आईपीएस और दूसरी शीर्ष सेवाओं में चयनित अभ्यर्थी बिहार से ही निकलते हैं। लेकिन जब आंकड़ों और जमीनी हकीकत को टटोलकर देखा जाए, तो यह विश्वास पूरी तरह सही नहीं ठहरता। दरअसल, यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में अब तक सबसे ज्यादा अफसर देने वाला राज्य उत्तर प्रदेश है।
यूपी क्यों है नंबर वन?
टाइम्स नाउ की रिपोर्ट की मानें तो उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, लेकिन सिर्फ जनसंख्या ही इसकी सफलता की वजह नहीं है। यहां की सिविल सेवा संस्कृति दशकों पुरानी है। गांव से लेकर शहर तक, सरकारी नौकरी खासकर प्रशासनिक सेवा को सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि बहुत कम उम्र से ही छात्रों के मन में आईएएस बनने का सपना आकार लेने लगता है।
उत्तर प्रदेश में स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का बड़ा नेटवर्क है। इसके अलावा दिल्ली, प्रयागराज और लखनऊ जैसे शिक्षा केंद्रों से नजदीकी भी यूपी के छात्रों को अतिरिक्त बढ़त देती है। तैयारी का माहौल, मार्गदर्शन और प्रतिस्पर्धा तीनों यहां एक साथ मौजूद हैं।
बिहार को लेकर क्या है हकीकत?
बिहार ने भी सिविल सेवाओं को कई दिग्गज अफसर दिए हैं, इसमें कोई शक नहीं। मेहनत, संघर्ष और सीमित संसाधनों में सफलता की कहानियों ने बिहार की एक खास पहचान बनाई है। यही कारण है कि लोगों के मन में यह छवि बन गई कि यूपीएससी में सबसे ज्यादा चयन बिहार से ही होता है। लेकिन जब कुल संख्या की बात आती है, तो बिहार दूसरे स्थान पर आता है।
माधोपट्टी गांव से आते हैं कई अफसर
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का माधोपट्टी गांव आज पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। महज कुछ दर्जन घरों वाला यह गांव दर्जनों आईएएस, आईपीएस, आईआरएस और पीसीएस अफसर दे चुका है। इसी वजह से इसे अक्सर यूपीएससी की फैक्ट्री कहा जाता है।
केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक का क्या हाल
केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों की साक्षरता दर भले ही अधिक हो, लेकिन वहां निजी क्षेत्र और तकनीकी नौकरियों का आकर्षण ज्यादा है। इसके उलट उत्तर प्रदेश में आज भी सिविल सेवा को सबसे सुरक्षित और प्रतिष्ठित करियर माना जाता है।




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