यूपी पुलिस में मृतक आश्रित कोटे से दो भाइयों ने हासिल की नौकरी, फर्जी तरीके से हुई भर्ती
पिता की मृत्यु के बाद बड़े भाई ने मृतक आश्रित कोटे से यूपी पुलिस में दरोगा की जॉब हासिल कर ली। जबकि छोटा भाई पहले ही नौकरी पा चुका था। छोटा भाई रिटायर हो चुका है। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अब इंस्पेक्टर की बर्खास्तगी होगी।

आगरा कमिश्नरेट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पिता की मृत्यु के बाद बड़े भाई को यूपी पुलिस में दरोगा की नौकरी मिली। छह साल बाद दूसरा भाई भी मृतक आश्रित में दरोगा पर भर्ती हो गया। बड़ा भाई एसीपी पद से रिटायर हुआ। रिटायरमेंट पर पेंशन शुरू होने से पहले शिकायत हो गई। प्रारंभिक जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ गया। रिटायर एसीपी की पेंशन और सभी भुगतान रोक दिए गए हैं। इंस्पेक्टर की बर्खास्तगी के लिए 14(1) की कार्रवाई चल रही है।
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि पूर्व पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गौड के कार्यकाल में मुख्यालय से एक शिकायत जांच के लिए आई थी। जिसमें आरोप था कि आगरा में तैनात एसीपी अकाउंट नागमेंद्र लांबा और इंस्पेक्टर योगेंद्र लांबा सगे भाई हैं। इनके पिता जय प्रकाश सिंह लांबा पुलिस विभाग में थे। उनकी मृत्यु के बाद नागमेंद्र लांबा की मृतक आश्रित में नौकरी लगी। उनकी नौकरी के करीब छह साल बाद छोटा भाई योगेंद्र लांबा भी पुलिस में भर्ती हो गया। वह भी मृतक आश्रित में भर्ती हुआ है। जे रविन्दर गौड ने मामले की प्रारंभिक जांच डीसीपी ट्रैफिक अभिषेक अग्रवाल को दी। नागमेंद्र लांबा एसीपी पद से 30 नवंबर 2024 को रिटायर हो गए। जांच चल रही थी, इसलिए उनकी पेंशन और सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले सभी भुगतान रोक दिए गए।
डीसीपी यातायात ने दोनों भाइयों के बयान लिए। नागमेंद्र लांबा ने अपने बयान में कहा कि भाई से अलग रहते थे। उसने तो यही बताया था कि सीधे भर्ती हुआ है। डीसीपी यातायात ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि इंस्पेक्टर योगेंद्र लांबा की भर्ती फर्जी तरीके से हुई है। उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई। पुलिस आयुक्त ने बताया कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद इस मामले में मुकदमा भी लिखाया जाएगा। सभी भुगतान वापस लिए जाएंगे। भर्ती प्रक्रिया में जो-जो लोग शामिल रहे होंगे उन्हें भी आरोपित बनाया जाएगा।
30 साल से अधिक लिया वेतन
नागमेंद्र लांबा ने पुलिस महकमे में 30 साल से अधिक नौकरी की है। उनके छोटे भाई इंस्पेक्टर योगेंद्र लांबा को भी भर्ती हुए करीब 25 वर्ष हो चुके हैं। भर्ती होने के बाद से वह वेतन ले रहे हैं। उनकी पदोन्नति भी हुई। दरोगा से इंस्पेक्टर बने। सवाल यह उठ रहा है कि बड़े भाई को यह पता क्यों नहीं चला कि छोटा भाई कैसे भर्ती हुआ है। जबकि पिछले कुछ समय से दोनों आगरा कमिश्नरेट में तैनात थे।
मृतक आश्रित में चाहिए होती है एनओसी
मृतक आश्रित में भर्ती होने की प्रक्रिया लंबी है। जिस सदस्य को नौकरी मिलती है उसके पक्ष में परिवार के अन्य सदस्यों को एनओसी देनी पड़ती है। परिवार के सभी सदस्य जिले के एसएसपी के समक्ष पेश होते हैं। वे सभी से बात करते हैं। पूछते हैं किसी को कोई दिक्कत तो नहीं है। उसके बाद भर्ती की प्रक्रिया शुरू होती है। चयन के बाद ट्रेनिंग होती है।




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