UGC : गोपनीय सूचनाएं चुरा रही विदेशी संस्थाएं, यूजीसी ने विश्वविद्यालयों, छात्रों व शिक्षकों को किया सतर्क
संवेदनशील मुद्दों पर लेख लिखवाने के बहाने कुछ विदेशी संस्थाएं देश में संवेदनशील सूचनाएं चुरा रही हैं। शिक्षा मंत्रालय को मिले इनपुट के बाद यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालयों को पत्र भेजते हुए सतर्क रहने को कहा है।

नौकरी और संवेदनशील मुद्दों पर लेख लिखवाने के बहाने कुछ विदेशी संस्थाएं देश में संवेदनशील सूचनाएं चुरा रही हैं। विभिन्न तरीकों से की जा रही इस चोरी के बारे में शिक्षा मंत्रालय को मिले इनपुट के बाद यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालयों को पत्र भेजते हुए सतर्क रहने को कहा है। यूजीसी ने शैक्षिक संस्थानों से छात्रों को विदेशी एजेंसियां द्वारा प्रयुक्त किए जा रहे हथकंडों का भी बिंदुवार ब्योरा भी दिया है। यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालय सहित सभी शैक्षिक संस्थानों को 22 जनवरी को पत्र भेजा है। यूजीसी के सचिव सुदीप सिंह जैन के अनुसार शिक्षा मंत्रालय को इसकी जानकारी दी गई है, जिसमें कुछ विदेशी संस्थाएं भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा प्रतिष्ठान, महत्वपूर्ण संरचना और सरकारी कामकाज सहित विभिन्न बिंदुओं से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लेखों के माध्यम से एकत्र कर रही हैं।
इसके लिए लिंक्डइन और नौकरी डॉट कॉम जैसे जॉब प्लेटफॉर्म का प्रयोग करते हुए पत्रकारिता एवं रक्षा क्षेत्रों में अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों की पहचान करके उन्हें नौकरी दी जा रही है। यूजीसी ने शिक्षकों और छात्रों को इस तरह के हथकंडों से सतर्क रहने को कहा है।
जानकारी एकत्र करने को ये हथकंडे अपना रहीं
यह संस्थाएं भारत के विदेश संबंधों, सैनिक तैनाती, हथियार प्रणाली, नवीनतम रक्षा खरीद, संयुक्त सैन्य अभ्यास पर लेख लिखने का काम दे रही हैं। लेख का भुगतान आमतौर पर भारतीय खातों या कभी-कभी विदेशी स्थानांतरण से किया जाता है। इन भुगतान के लिए भारतीय छात्रों के खातों और साइबर धोखाधड़ी की राशि का उपयोग किया जाता है। ये संस्थाएं अपनी वास्तविक पहचान छुपाती हैं और सामान्त: अन्य देशों में संचालित परामर्श फर्मों के प्रतिनिधि के रूप में खुद को दर्शाती हैं। रक्षा पृष्ठभूमि वाले आवेदकों के पैन कार्ड एवं आधार कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारी एकत्र की जाती हैं, जिसके निहितार्थ की जानकारी अभी किसी के पास नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर लगाई रोक, केंद्र सरकार से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट आज उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाली नियमावली, 2026 पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। 2012 के पुराने नियम ही फिलहाल लागू रहेंगे। आपको बता दें कि यूजीसी के इन नए नियमों पर आरोप लगाया गया था कि ये सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ इन रिट याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिका में दावा है कि नए नियमों से भेदभाव बढ़ेगा। कोर्ट ने भी इस बात से सहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘क्या हम उल्दी दिशा में जा रहे हैं? हमें जातिविहीन समाज की तरफ बढ़ना चाहिए। जिन्हें सुरक्षा चाहिए उनके लिए उचित व्यवस्था हो।’




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