Republic Day Speech In Hindi : 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर 2 मिनट का शानदार भाषण, मिलेगा इनाम
Republic Day Speech In Hindi : रिपब्लिक डे के अवसर पर स्कूलों में भाषण, निबंध, वाद विवाद आदि कंपीटिशन आयोजित किए जाते हैं। हम यहां आपको एक आसान भाषण का सैंपल दे रहे हैं, जिसे आप 26 जनवरी के मौके पर बोल सकते हैं।

Republic Day Speech In Hindi : देश गणतंत्र दिवस का जश्न मनाने के लिए तैयार है। 77वें गणतंत्र दिवस को मनाने के लिए सरकारी दफ्तरों से लेकर ऐतिहासिक इमारतों को सजाया जा चुका है। बाजारों में बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई तिरंगे की खरीदारी में जुटा हुआ है। हर वर्ष देश में 26 जनवरी का दिन रिपब्लिक डे यानी गणतंत्र दिवस के तौर पर मनाया जाता है। गणतंत्र दिवस के रूप में हम उन ऐतिहासिक पलों को याद करते हैं जब हमारा संविधान लागू किया गया था और भारत देश एक लोकतांत्रिक, संप्रभु तथा गणतंत्र देश घोषित किया गया था। गणतंत्र दिवस पर इंडिया गेट पर भव्य परेड का आयोजन किया जाता है जिसके देश की ताकत, तरक्की, उसकी संस्कृति व स्वरूप दिखता है। रिपब्लिक डे के अवसर पर स्कूलों में भाषण, निबंध, वाद विवाद आदि कंपीटिशन आयोजित किए जाते हैं। हम यहां आपको एक आसान भाषण का सैंपल दे रहे हैं, जिसे आप 26 जनवरी के मौके पर बोल सकते हैं।
Republic Day Speech in Hindi: गणतंत्र दिवस पर भाषण
आदरणीय प्रिंसिपल सर, शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों, आप सभी को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और ढेर सारी बधाई। 26 जनवरी वो तारीख है जिसे भारतवासी कभी नहीं भुला सकते। यह वह दिन था भारत लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया। 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ था। साथियों, यह संविधान ही है जो देश के नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है। यह संविधान ही है तो हमें मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। देश की सरकार किन नियमों से चलेगी व बनेगी, उसकी शक्तियां व सीमाएं क्या होंगी, कानून कायदे क्या होंगे, इन सबका उल्लेख संविधान में ही होता है। संविधान से ही ये सारी व्यवस्था चलती है।
26 जनवरी के दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है। सरकारी दफ्तर और शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी रहती है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों में ध्वजारोहण समारोह व स्कूली बच्चों के परेड कार्यक्रम होते हैं। लेकिन देश का सबसे बड़ा, प्रमुख और सबसे महत्वपूर्ण समारोह नई दिल्ली में कर्त्तव्य पथ पर आयोजित किया जाता है। इस कार्यक्रम में देश की ताकत, तरक्की, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया जाता है। परेड में निकलने वाली तमाम राज्यों की झांकियों से देश की विविधता में एकता की झलक नजर आती है।
इस बार गणतंत्र दिवस परेड की थीम ( Republic Day 2026 theme ) वंदेमातरम् पर रखी गई है। परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर 30 झांकियां निकलेंगी, जो 'स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम, समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत' थीम पर आधारित होंगी। कर्तव्य पथ पर एनक्लोजर के बैकग्राउंड में वंदेमातरम् की लाइन्स वाली पुरानी पेंटिंग बनाई जाएगी। मेन स्टेज पर फूलों से वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धांजलि दी जाएगी। परेड के मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन होंगे।
इस बार परेड में पहली बार बैक्ट्रियन ऊंट, नई बटालियन भैरव भी मार्च पास्ट करेगी। दिल्ली के इंडिया गेट पर होने वाली इस भव्य परेड की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रपति करते हैं। राष्ट्रपति ही तिरंगा फहराते हैं। हर वर्ष इस परेड का कोई मुख्य अतिथि भी होता है। 29 जनवरी को ‘बीटिंग रिट्रीट’ सेरेमनी के साथ गणतंत्र दिवस समारोह का समापन होता है।
साथियों, आज गणतंत्र दिवस के अवसर मैं हिंदुस्तान को आजाद कराने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर नमन करता हूं। साथ ही देश की रक्षा के लिए शहीद हुए जाबांज और बहादुर जवानों को कोटि कोटि प्रणाम कर श्रद्धांजलि देता हूं। यह कृतज्ञ राष्ट्र आज इन सभी को याद कर रहा है।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर शौर्य का प्रदर्शन करने वाले सैन्य कर्मियों, पुलिकर्मियों, नागरिकों और बच्चों को वीरता के पुरस्कार भी दिए जाते हैं। इसके अलावा पद्म पुरस्कारों का ऐलान भी होता है। साथियों हमारे देश ने आजादी के बाद विज्ञान, तकनीकी, शिक्षा, मनोरंजन क्षेत्र में इतनी तरक्की कर ली है कि दुनिया हमारी तरफ देख रही है। गणतंत्र दिवस का दिन इन उपलब्धियों का जश्न मनाने का दिन भी है।
इसके अलावा आज हमें अपराध, भ्रष्टाचार, हिंसा, नक्सलवाद, आतंकवाद, गरीबी, बेरोजगारी, लिंग भेद, अशिक्षा जैसी समस्याओं को मिटाने का संकल्प भी लेना चाहिए। हमें अपने महान स्वतंत्रता सेनानियों के बताए रास्ते पर चलना चाहिए और उनके आदर्शों को अपनाना चाहिए। इतना अच्छा संविधान लिखने के बावजूद बाबा साहेब ने कह ही दिया था, ‘मैं समझता हूं कि संविधान चाहे जितना भी अच्छा हो, यदि उसे कार्यान्वित करने वाले लोग बुरे हैं, तो वह निस्संदेह बुरा हो जाता है।’ दरअसल, यही वह कसौटी है, जहां हमें स्वयं को परखना चाहिए।
इसी के साथ में अपने भाषण का समापन करना चाहूंगा। जय हिंद... जय भारत, भारत माता की जय




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