NEET UG : not filling 57 vacant MBBS seats admission High court seeks justification from NMC and MCC NEET UG : MBBS की 57 सीटें खाली क्यों जा रही, BDS जैसा नियम क्यों नहीं, कोर्ट के एक्शन से कम अंक वालों में जगी उम्मीद, Career Hindi News - Hindustan
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NEET UG : MBBS की 57 सीटें खाली क्यों जा रही, BDS जैसा नियम क्यों नहीं, कोर्ट के एक्शन से कम अंक वालों में जगी उम्मीद

NEET UG MBBS Admission : हाईकोर्ट ने कहा है कि जब पिछले साल 4 एमबीबीएस सीटों को भरने के लिए एक्स्ट्रा राउंड हुआ था तो इस बार 57 सीटों को भरने के लिए क्यों नहीं हो रहा। जब बीडीएस के लिए अतिरिक्त राउंड हुआ है तो एमबीबीएस के लिए क्यों नहीं हो रहा।

Tue, 16 Dec 2025 12:41 PMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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NEET UG : MBBS की 57 सीटें खाली क्यों जा रही, BDS जैसा नियम क्यों नहीं, कोर्ट के एक्शन से कम अंक वालों में जगी उम्मीद

NEET UG , MBBS Admission : देश में एक तरफ जहां एमबीबीएस सीटों की मारामारी है, वहां गुजरात में 57 सीटें खाली जा रही हैं। गुजरात में चार राउंड की नीट यूजी काउंसलिंग पूरी होने के बाद एमबीबीएस की 57 सीटें खाली रह गई हैं। अब गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) से यह स्पष्ट करने को कहा है कि वो खाली जा रहीं एमबीबीएस सीटों को भरने के लिए एक और काउंसलिंग राउंड आयोजित करने से क्यों हिचकिचा रहे हैं। काउंसलिंग अथॉरिटी खाली एमबीबीएस सीटें को भरने के लिए और राउंड आयोजित नहीं करना चाह रही थी, ऐसे में गुजरात मेडिकल कॉलेजों की एसोसिएशन मेडगुज (MEDGUJ Association) ने पिछले महीने हाईकोर्ट का रुख किया था। गुजरात के मेडिकल कॉलेजों में कुल लगभग 6,400 एमबीबीएस सीटें हैं।

याचिका में बताया गया कि पिछले वर्ष एमबीबीएस दाखिले की अंतिम तिथि के बाद भी 4 एमबीबीएस सीटें खाली रह गई थीं। सिर्फ 4 सीटें होने के बावजूद भी एक एक्स्ट्रा काउंसलिंग राउंड कराया गया था। इस साल तो खाली एमबीबीएस सीटों की संख्या कहीं अधिक है। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि एसीपीयूएमसी ( ACPUMC ) द्वारा एक और एडमिशन राउंड न कराना छात्रों के साथ-साथ समाज के हित में भी नहीं है, क्योंकि देश में पहले से ही योग्य डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। गौरतलब है कि देश में हर साल 22-23 बच्चे नीट यूजी परीक्षा देते हैं। इसमें करीब 11-12 लाख पास होते हैं। इनके लिए देश में एमबीबीएस की महज 1.28 लाख सीटें ही हैं। ऐसे में देश में एमबीबीएस सीटों की जबरदस्त किल्लत है।

सोमवार को एसोसिएशन के वकील ने अदालत को बताया कि एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस और बीएचएमएस इन चारों मेडिकल कोर्सेज के लिए एक समान प्रवेश प्रक्रिया अपनाई जाती है।

एनएमसी और एमसीसी ने बीडीएस कोर्स के लिए 24 दिसंबर को एक और एडमिशन राउंड आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसी तरह की प्रक्रिया एमबीबीएस प्रवेश के लिए भी अपनाई जानी चाहिए, खासकर उन छात्रों की संख्या को देखते हुए जो इस कोर्स में दाखिला पाना चाहते हैं। वकील ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट से अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए एमसीसी और एनएमसी को एमबीबीएस प्रवेश का एक और दौर आयोजित करने का निर्देश देने का आग्रह किया।

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एमबीबीएस दाखिले का एक और राउंड कराना संभव नहीं: एनएमसी

इस पर हाईकोर्ट ने एनएमसी के वकील से सवाल किया। वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें यह निर्देश मिला है कि एमबीबीएस एडमिशन का एक और राउंड कराना संभव नहीं है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यायमूर्ति निर्जर देसाई ने कहा, ‘इस तथ्य को देखते हुए कि चारों कोर्स, एमबीबीएस, बीडीएस, बीएचएमएस और बीएएमएस के लिए प्रवेश प्रक्रिया समान है, और यह भी कि पिछले वर्ष केवल चार खाली एमबीबीएस सीटें भरने के लिए अतिरिक्त राउंड आयोजित किया गया था, तथा इस वर्ष बीडीएस के लिए भी ऐसा किया गया है, तो फिर एमबीबीएस कोर्स के लिए एक और एडमिशन राउंड आयोजित न करने में क्या दिक्कत या उचित कारण है?’

चयन से चूके छात्रों की जगी उम्मीद

हाईकोर्ट ने एसीपीयूएमसी से जवाब मांगा है और मामले की आगे की सुनवाई के लिए मंगलवार को तारीख तय की है। अगर एक और एस्ट्रा काउंसलिग राउंड आयोजित होता है तो चयन से चूके छात्रों को मेडिकल सीट पाने का मौका मिल सकता है। हाईकोर्ट के सकारात्मक रवैये से कम अंक वाले स्टूडेंट्स में डॉक्टरी की पढ़ाई करने की कुछ उम्मीदें जगी हैं।

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