एनसीईआरटी किताबों की पाइरेसी पर सख्त वार, छापेखाने पर छापा; 32 हजार किताबें जब्त
एनसीईआरटी किताबों की अवैध छपाई पर कार्रवाई की गई है। गाजियाबाद में छापे के दौरान 32 हजार से अधिक किताबें जब्त हुईं।

किताबों की कीमत पर मुनाफा बटोरने वालों पर कानून का डंडा चला है। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली अवैध छपाई के खिलाफ एनसीईआरटी और दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने मिलकर ऐसी चोट की है, जिसने पाइरेसी के पूरे खेल को उजागर कर दिया। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के साथ मिलकर पाठ्यपुस्तकों की अवैध छपाई के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुख्ता इनपुट के आधार पर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के लोनी क्षेत्र के जावली गांव में स्थित एक छापेखाने पर छापा मारा गया, जहां से विभिन्न कक्षाओं और विषयों की करीब बत्तीस हजार से अधिक नकली एनसीईआरटी किताबें बरामद की गईं।
पुलिस की छापेमारी
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो आधुनिक छपाई मशीनें, एल्युमिनियम की छपाई प्लेटें, कागज के बड़े रोल और छपाई की स्याही भी जब्त की। बरामद सामान से यह साफ हो गया कि यह कोई छोटा मोटा काम नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर अनधिकृत छपाई का संगठित नेटवर्क था, जो लंबे समय से सक्रिय था।
अपराध शाखा के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पहले से दर्ज एक मामले में विकसित किए गए इनपुट के आधार पर की गई। यह मामला 11 नवंबर 2025 को दर्ज किया गया था, जिसमें भारतीय न्याय संहिता और कॉपीराइट कानून के प्रावधानों के तहत जांच चल रही थी। उसी जांच के दौरान अवैध छपाई के इस ठिकाने का पता चला।
सजा का है सख्त प्रावधान
छापे और जब्ती की पूरी प्रक्रिया के दौरान एनसीईआरटी के प्रकाशन विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने तकनीकी सहयोग दिया और नकली तथा असली किताबों की पहचान और सत्यापन में अहम भूमिका निभाई। एनसीईआरटी ने एक बार फिर साफ किया है कि उसकी पाठ्यपुस्तकों की बिना अनुमति छपाई, वितरण या बिक्री कानूनन अपराध है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।
परिषद का कहना है कि ऐसी अवैध गतिविधियां केवल कॉपीराइट का उल्लंघन ही नहीं करतीं, बल्कि छात्रों और पूरी शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती हैं। नकली किताबों में अक्सर सामग्री की गुणवत्ता खराब होती है, छपाई में गलतियां होती हैं और कई बार तथ्यात्मक त्रुटियां भी पाई जाती हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ता है।
एनसीईआरटी की क्या अपील
एनसीईआरटी ने अभिभावकों, छात्रों और आम लोगों से अपील की है कि वे पाठ्यपुस्तकें केवल अधिकृत विक्रेताओं और मान्य स्रोतों से ही खरीदें। साथ ही, अगर कहीं भी नकली किताबों की बिक्री या छपाई की आशंका हो, तो इसकी सूचना एनसीईआरटी या स्थानीय प्रशासन को तुरंत दें।
इसी बीच, संसद में पेश किए गए आंकड़ों ने एनसीईआरटी की एक और बड़ी चुनौती को उजागर किया है। राज्यसभा में 17 दिसंबर को रखे गए आंकड़ों के अनुसार, परिषद में स्वीकृत पदों का आधे से ज्यादा हिस्सा खाली पड़ा है। मुख्यालय, क्षेत्रीय संस्थानों और विभिन्न विभागों में कुल 2844 स्वीकृत पदों में से केवल 1219 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 1625 पद खाली हैं। ये रिक्तियां समूह ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ सभी श्रेणियों में हैं।
संसद में क्या बोली सरकार
यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय ने राज्यसभा सदस्य समीरुल इस्लाम के एक सवाल के जवाब में दी, जिसमें पिछले पांच वर्षों के दौरान स्थायी भर्तियों, संविदा नियुक्तियों और रिक्त पदों का ब्योरा मांगा गया था। आंकड़ों के मुताबिक, शैक्षिक प्रौद्योगिकी के केंद्रीय संस्थान में 116 स्वीकृत पदों में से केवल 45 पद भरे हुए हैं, जबकि उत्तर पूर्व क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में 55 में से महज 26 पदों पर ही तैनाती है।
गौरतलब है कि जहां एक ओर एनसीईआरटी को नकली किताबों के खिलाफ सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्टाफ की भारी कमी उसके कामकाज पर दबाव बढ़ा रही है। ऐसे में अवैध छपाई पर लगाम कसने के साथ साथ संस्थान की आंतरिक मजबूती और समय पर भर्तियां भी उतनी ही जरूरी हैं।




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