MBBS Fail student news update: First action against brd medical college student police si father called MBBS : 11 साल से एमबीबीएस फर्स्ट ईयर में अटके छात्र पर पहली कार्रवाई, मेडिकल कॉलेज ने उठाया यह कदम, Career Hindi News - Hindustan
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MBBS : 11 साल से एमबीबीएस फर्स्ट ईयर में अटके छात्र पर पहली कार्रवाई, मेडिकल कॉलेज ने उठाया यह कदम

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 11 साल से एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रहे छात्र के मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है। सोमवार को एकेडमिक कमेटी की बैठक प्राचार्य कार्यालय में हुई। कमेटी ने तय किया कि एमबीबीएस छात्र के पिता को बुलाकर बात की जाए।

Wed, 31 Dec 2025 09:33 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता
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MBBS : 11 साल से एमबीबीएस फर्स्ट ईयर में अटके छात्र पर पहली कार्रवाई, मेडिकल कॉलेज ने उठाया यह कदम

यूपी में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 11 साल से एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रहे छात्र के मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है। सोमवार को एकेडमिक कमेटी की बैठक प्राचार्य कार्यालय में हुई। बैठक की अध्यक्षता मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने की। इस कमेटी में आठ सदस्य हैं, जिसमें से छह विभागाध्यक्ष हैं। कमेटी में हॉस्टल के वार्डन को भी बुलाया गया। उनसे पूरे मामले की जानकारी ली गई। इसके बाद कमेटी ने तय किया कि एमबीबीएस छात्र के पिता को बुलाकर बात की जाए। छात्र के पिता दारोगा हैं। छात्र से भी संवाद किया जाएगा। दोनों पक्षों से संवाद के बाद ही कोई रास्ता निकाला जाएगा।

एकेडमिक कमेटी में मौजूद शिक्षकों ने तय किया कि छात्र को मौका मिलना चाहिए। इसके लिए कुछ पहल छात्र को भी करनी पड़ेगी। उसे पढ़ना पड़ेगा। तैयारी करनी पड़ेगी। समय से परीक्षा देनी होगी। एकेडमिक कमेटी ने छात्र की काउंसलिंग करने का भी फैसला किया है। इसके साथ यह भी तय किया है कि अगर छात्र पढ़ना चाहेगा तो उसे शिक्षक अतिरिक्त क्लास देंगे। उसकी काउंसलिंग की जाएगी।

यह है मामला

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक छात्र बवाले जान बना है। मेडिकल कॉलेज में छात्र बीते 11 वर्ष से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। वह आजमगढ़ का रहने वाला है। उसके पिता पुलिस में दारोगा हैं। छात्र ने वर्ष 2014 में सीपीएमटी के जरिए प्रवेश लिया था। बीते 11 वर्षो में उसने सिर्फ एक बार एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा दी। उस समय सभी पेपर में वह फेल हो गया। उसके बाद से उसने दोबारा कभी परीक्षा दी ही नहीं। वह मेडिकल कॉलेज के एक हॉस्टल में रहता है। हॉस्टल के वार्डन ने इसकी शिकायत पूर्व प्राचार्य डॉ गणेश कुमार से तीन-चार बार की थी। उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। अब वार्डन ने वर्तमान प्राचार्य डॉ रामकुमार जायसवाल से शिकायत दर्ज कराई है।

कहां फंस रहा पेच

जब छात्र का प्रवेश हुआ था तब मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) के नियमों के तहत प्रवेश होता था। एमसीआई के नियमों में कहीं भी छात्रों के लिए कोई बंदिश नहीं थी। वह कितने भी वर्ष में पढ़ाई पूरी कर सकते थे। वर्ष 2023 में एनएमसी के प्रावधान मेडिकल कॉलेज पर लागू हुए। एनएमसी में नियम सख्त हैं। इस छात्र पर एनएमसी के नियम लागू होंगे या नहीं यह विधिक सवाल है। एनएमसी के मौजूदा नियमों के अनुसार, MBBS छात्रों को पहले साल की परीक्षा चार अटेंप्ट में पास करनी होती है और पूरा कोर्स 9 साल (पढ़ाई और इंटर्नशिप को मिलाकर) में पूरा करना होता है।

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यह छात्र 2014 बैच का है, जब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) मेडिकल एजुकेशन को रेगुलेट करती थी। 2014 से पहले एमसीआई के नियम स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियम, 1997 के अंतर्गत आते थे इसलिए यह मामला रेगुलेटरी ग्रे एरिया में आता है, जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई करना मुश्किल हो रहा है।

गोरखपुर का छात्र 22 वर्ष में पास हुआ था एमबीबीएस

मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कई वर्ष में करने का यह पहला मामला नहीं है। यहां कई ऐसे छात्र रहें, जो 4.5 वर्ष के इस कोर्स को 10 से 12 वर्ष में पूरा किए। बताया जाता वर्ष 1980 में प्रवेश लेने वाले एक छात्र ने करीब 22 वर्ष में यह पढ़ाई पूरी की थी। यह कालेज में सबसे लंबे समय तक छात्र के पढ़ाई करने का रिकार्ड हैं। उस छात्र ने सामान्य श्रेणी में प्रवेश लिया था। वह छात्र गोरखपुर का ही था।

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