JOSAA में बिना सहमति दे दी IIT सीट, अयोग्य घोषित अभ्यर्थी को JEE एडवांस्ड में बैठने की इजाजत, कोर्ट ने क्या दिया तर्क
दिल्ली हाईकोर्ट ने उस अभ्यर्थी को जेईई एडवांस 2026 में शामिल होने की अनुमति दी। इस विद्यार्थी को अधिकारियों ने इस आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया था कि उसने पिछले वर्ष एक आईआईटी में सीट स्वीकार कर ली थी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को उस अभ्यर्थी को आईआईटी प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस 2026 में शामिल होने की अनुमति दी। इस विद्यार्थी को अधिकारियों ने इस आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया था कि उसने पिछले वर्ष एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में सीट स्वीकार कर ली थी। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने याचिकाकर्ता को इस परीक्षा के लिए आवेदन करने की अनुमति दी और आयोजक को एक सप्ताह के भीतर उसे एडमिट कार्ड जारी करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा, 'आप इस संस्थान का महत्व नहीं समझते। यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है। बच्चे पहली कक्षा से ही आईआईटी में प्रवेश पाने का सपना देखते हैं। यह बच्चों का सपना होता है और मैं इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता।'
यह छात्र कहीं अमेरिका पढ़ने चला गया थो
अदालत ने अधिकारियों की ओर से पेश वकील से मौखिक रूप से कहा, 'आप राष्ट्रीय संसाधनों के जाने की बात करते हैं। यह छात्र कल किसी अमेरिकी विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सकता है। इससे प्रतिभा पलायन होगा। आपको इस छात्र को प्रवेश देना चाहिए। यह आपका ही मानव संसाधन है। मैं इस याचिका को आपकी सुविधा अनुसार सुनूंगा, लेकिन आज ही इसे प्रवेश-पत्र दूंगा।'
17 मई 2026 को होगी जेईई एडवांस्ड
अदालत ने आदेश दिया, 'याचिकाकर्ता को 17 मई 2026 को प्रस्तावित परीक्षा 'जेईई-एडवांस 2026' में शामिल होने के लिए आज से एक सप्ताह के भीतर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रवेश-पत्र दिया जाए।'
छात्र केस हारा तो उसकी जेईई एडवांस्ड परीक्षा अमान्य होगी
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाती तो उसकी याचिका निरर्थक हो जाएगी, और यदि वह मामला हार जाता है तब भी उसकी परीक्षा को अमान्य घोषित किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील तन्वी दुबे ने बताया कि उसने 2025 की जेईई (मेंस) उत्तीर्ण की थी और जेईई (एडवांस) 2025 के लिए पात्र हुआ था, लेकिन उसने किसी भी संस्थान में प्रवेश नहीं लिया। अदालत ने कहा कि उसका प्रथम दृष्टया मत यह है कि सीट की अंतिम पुष्टि इस बात पर निर्भर थी कि याचिकाकर्ता पात्रता की शर्तें पूरी करता है या नहीं, लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
JoSAA छठे राउंड में बिना सहमति के अलॉट कर दी सीट
छात्र के वकील ने अदालत को बताया गया कि काउंसलिंग के छठे राउंड में, IIT गुवाहाटी में एक सीट को डीम्ड एक्सेप्टेड ( स्वीकृत मान लिया गया) और जुलाई 2025 में, उसकी जानकारी या सहमति के बिना ही, उसे वह सीट अलॉट कर दी गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि हालांकि उसने तुरंत IIT गुवाहाटी में शामिल न होने की अपनी इच्छा बता दी थी, फिर भी आयोजन करने वाले अधिकारियों ने उसे इस साल IIT प्रवेश परीक्षा में बैठने से रोक दिया। जेईई एडवांस्ड 2026 के नियमों के अनुसार वह परीक्षा के लिए पात्र नहीं था।
अदालत ने कहा कि उसकी प्रथम दृष्टया राय यह है कि सीट की अंतिम पुष्टि इस बात पर निर्भर थी कि याचिकाकर्ता पात्रता की शर्तों को पूरा करता है या नहीं, लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
याचिका में दावा किया गया कि इस तरह से अपने-आप स्वीकृति मान लेना—और साथ ही, अंतिम राउंड में नाम वापस लेने का अवसर न मिलना—स्पष्ट रूप से अन्याय है और यह निष्पक्षता तथा औचित्य की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
याचिका में कहा गया कि अधिकारियों का निर्णय स्पष्ट रूप से मनमाना, अविवेकपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करने वाला है।




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