BEd का शानदार विकल्प 4 वर्षीय ITEP कोर्स यूपी की एक और यूनिवर्सिटी में, 12वीं के बाद होगा दाखिला
एमएमएमयूटी, गोरखपुर में आईटीईपी का रास्ता साफ हो गया है। नए सत्र से यहां आईटीईपी में भी दाखिला होगा। यहां बीबीए पाठ्यक्रम की तर्ज पर छात्रों को वार्षिक शुल्क देना होगा।

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में आईटीईपी (इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम) का रास्ता साफ हो गया है। नए सत्र से आईटीईपी में छात्र प्रवेश भी ले सकेंगे। इसके लिए विवि प्रशासन ने शुल्क भी तय कर दिए हैं। बीबीए पाठ्यक्रम की तर्ज पर छात्रों को आईटीईपी का शुल्क देना होगा। कैंपस के बाहर रहने वाले छात्रों के लिए शुल्क की अलग व्यवस्था की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत आईटीईपी कोर्स शुरू किया गया है। चार साल का एकीकृत स्नातक कोर्स होने की वजह से इसमें 12वीं के बाद सीधे प्रवेश लिया जा सकता है। इस कोर्स की खासियत यह है कि 12वीं पास छात्रों को ग्रेजुएशन और बीएड की डिग्री एक साथ प्रदान करता है, जिससे उन्हें शिक्षक बनने के लिए केवल चार साल का समय लगेगा। इस कोर्स की अनुमति एमएमएमयूटी को इस साल मिल गई है।
अनुमति मिलने के बाद एमएमएमयूटी ने इसे वित्त समिति की बैठक में रख चुका है। इसका फायदा यह हुआ है कि समिति ने इसके लिए फीस तय कर दी है। प्रथम सेमेस्टर हॉस्टल के साथ छात्रों की फीस 80000 रुपये तय की गई है। वहीं, द्वितीय सेमेस्टर में हॉस्टल के साथ 72000 रुपये शुल्क रखा गया है। जबकि, कैंपस के बाहर रहने वाले प्रथम सेमेस्टर के छात्रों को 82500 रुपये शुल्क के तौर पर देने होंगे।
वहीं द्वितीय सेमेस्टर के कैंपस के बाहर रहने वाले छात्रों के लिए 74500 रुपये शुल्क तय किए गए हैं। इस चार वर्षीय कोर्स करने के बाद छात्र शिक्षक भर्ती के लिए किसी भी परीक्षा में बैठ सकेंगे।
बता दें कि अब तक बीएड करने के लिए छात्रों को पहले ग्रेजुएशन करना पड़ता था। लेकिन इस कोर्स के शुरू होने के बाद छात्रों को 12वीं बाद सीधे ग्रेजुएशन और बीएड की डिग्री एक साथ मिलेगी।
एमएमएमयूटी में अगले सत्र से आईटीईपी में छात्र प्रवेश ले सकेंगे। इस पाठ्यक्रम की अनुमति मिल गई है। वित्त समिति में इसके शुल्क भी तय कर दिए गए हैं। चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम छात्रों को नई दिशा देगा। इससे छात्रों को एक साथ ग्रेजुएशन और बीएड की डिग्री मिल सकेगी। इससे छात्रों का समय बचेगा। -प्रो. जेपी सैनी, कुलपति




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