उस IAS अफसर की कहानी जिसने कभी UPSC नहीं दिया, अनाथालय में पले, अखबार बेचा, सफाई की
आईएएस बी अब्दुल नासर की सफलता की कहानी हर उस शख्स के लिए एक मिसाल है, जो मुश्किल हालातों में भी मजबूती से खड़ा रहना चाहता है। आईएएस अफसर बी अब्दुल नासर ने कभी यूपीएससी परीक्षा पास ही नहीं की, फिर भी वो आईएएस अफसर बने।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण परीक्षा माना जाता है। हर साल करीब 10 लाख अभ्यर्थी इसका फॉर्म भरते हैं लेकिन 900 से 1000 के आसपास ही चयनित हो पाते हैं। आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अफसर बनने का ख्वाब लिए लाखों उम्मीदवार कई कई सालों से इस परीक्षा की तैयारी करते रहते हैं। इस राह में अभ्यर्थी अकसर दुनिया से खुद को अलग-थलग कर लेते हैं, दिन में 10-14 घंटे पढ़ते हैं, और एग्जाम पास करने के लिए एक स्ट्रिक्ट शेड्यूल भी फॉलो करते हैं। लेकिन आज हम एक ऐसे इंसान के बारे में बात करने जा रहे हैं जो बिना यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दिए आईएएस के पद पर पहुंच गया। उसकी कड़ी मेहनत और लगन ने उसे इस प्रतिष्ठित पद पर पहुंचा दिया। आप सोच रहे होंगे कि सिविल सेवा परीक्षा दिए बिना उसे यह पोस्ट कैसे मिल गई। आइए पढ़ते हैं बी अब्दुल नासर की दिल को छू लेने वाली कहानी के बारे में-
केरल के कन्नूर जिले के थलासेरी से आने वाले नासर बेहद कम उम्र के थे जब उनके पिता का देहांत हो गया। पिता को खोने से उनके परिवार की हालत खराब हो गई थी। इसके बाद वह और उनके भाई-बहन एक अनाथालय में पले-बढ़े। पेट पालने के लिए उनकी मां ने घर-घर जाकर काम किया। आर्थिक तंगी के बावजूद नासर ने अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने अपनी जिंदगी के 13 साल अनाथालय में बिताए। 10 साल की छोटी सी उम्र में नासर ने परिवार की जिम्मेदारियां उठाने का फैसला किया। उन्होंने होटल में सफाई की। वेटर का काम किया।
घर घर अखबार डाला, ट्यूशन पढ़ाया
कठिनाइयों के बीच नासर ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार थालास्सेरी के सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। अपने परिवार की मदद करने के लिए नासर ने कोई भी नौकरी कर ली जो उन्हें मिली। उन्होंने न्यूजपेपर डिलीवरी बॉय, ट्यूटर और यहां तक कि एक फोन ऑपरेटर के तौर पर भी काम किया। 1994 की बात है जब नासर ने अपनी पोस्टग्रेजुएशन पूरी करने के बाद केरल हेल्थ डिपार्टमेंट में एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर अपना करियर शुरू किया। जनता के प्रति उनके समर्पण और कोशिशों की वजह से उन्हें बार-बार प्रमोशन मिला और आखिरकार 2006 तक उन्होंने स्टेट सिविल सर्विस में डिप्टी कलेक्टर का रोल संभाला।
प्रमोशन पाकर बने आईएएस अफसर
फिर 2015 में नसर को राज्य का टॉप डिप्टी कलेक्टर माना गया जिससे 2017 में उनका प्रमोशन आईएएस ऑफिसर के रैंक पर हुआ। 2019 में कोल्लम के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर का रोल संभालने से पहले उन्होंने केरल सरकार में हाउसिंग कमिश्नर के तौर पर काम किया।




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