प्रिंसिपल को प्रोफेसर बनाने पर उठा विवाद, दिल्ली यूनिवर्सिटी और सेंट स्टीफंस कॉलेज में फिर ठनी
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने सेंट स्टीफंस कॉलेज में जॉन वर्गीज को प्रोफेसर बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। यूजीसी नियमों और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी और देश के मशहूर सेंट स्टीफंस कॉलेज के बीच एक बार फिर तनातनी बढ़ गई है। इस बार विवाद कॉलेज के मौजूदा प्रिंसिपल प्रोफेसर जॉन वर्गीज को अंग्रेजी विभाग में प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त करने को लेकर खड़ा हुआ है। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने साफ शब्दों में कहा है कि ऐसा करना यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नियमों का उल्लंघन होगा। विश्वविद्यालय की तरफ से 29 मई 2026 को भेजे गए आधिकारिक पत्र में कॉलेज प्रशासन को इस प्रक्रिया पर आगे न बढ़ने की सलाह दी गई है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि कॉलेजों में प्रोफेसर की सीधी नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है और सभी पदोन्नतियां तय नियमों के तहत ही हो सकती हैं।
यूजीसी नियमों का हवाला देकर उठाए सवाल
दिल्ली यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने अपने पत्र में यूजीसी रेगुलेशन 2018 का जिक्र करते हुए कहा कि कॉलेजों में मूल रूप से लेक्चरर या असिस्टेंट प्रोफेसर के पद स्वीकृत होते हैं। बाद में शिक्षकों को करियर एडवांसमेंट स्कीम यानी सीएएस के तहत प्रमोशन मिलता है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि किसी प्रिंसिपल को सीधे प्रोफेसर के रूप में नियुक्त करने का कोई कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं है। इसी वजह से गवर्निंग बॉडी की तरफ से लिया गया फैसला नियमों के दायरे से बाहर माना जा रहा है। पत्र में यह भी कहा गया कि जॉन वर्गीज को प्रिंसिपल के तौर पर एक और कार्यकाल देना भी यूजीसी नियमों के खिलाफ है और यह मामला फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
जॉन वर्गीज की नियुक्ति पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
प्रोफेसर जॉन वर्गीज की नियुक्ति को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। आलोचकों का आरोप है कि उन्हें प्रोफेसर बनाने के दौरान पारदर्शी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। कहा गया कि नियुक्ति के लिए कोई औपचारिक चयन प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, न ही किसी चयन समिति का गठन किया गया। इतना ही नहीं, अंग्रेजी विभाग में प्रोफेसर का स्वीकृत पद भी मौजूद नहीं था। इन बातों ने नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता और यूजीसी नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सेंट स्टीफंस कॉलेज ने स्वायत्तता का दिया तर्क
कॉलेज प्रशासन की तरफ से लंबे समय से यह दलील दी जाती रही है कि सेंट स्टीफंस एक अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान है और उसे नियुक्तियों के मामले में कुछ हद तक स्वायत्तता हासिल है। कॉलेज का मानना है कि अपने प्रशासनिक फैसले लेने का अधिकार उसके पास है। हालांकि दिल्ली यूनिवर्सिटी बार-बार यह कह रही है कि स्वायत्तता का मतलब यह नहीं कि यूजीसी और विश्वविद्यालय के नियमों को नजरअंदाज किया जाए। यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है।
महिला प्रिंसिपल की नियुक्ति पर भी हुआ था विवाद
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही दिल्ली यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर सुसन एलियास की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई थी। कॉलेज ने उन्हें नया प्रिंसिपल नियुक्त किया था। दिल्ली यूनिवर्सिटी का आरोप था कि नियुक्ति प्रक्रिया में यूजीसी के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। खास बात यह रही कि 145 साल के इतिहास में पहली बार सेंट स्टीफंस कॉलेज किसी महिला को प्रिंसिपल बना रहा था। लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर पैदा हुए विवाद ने इस ऐतिहासिक फैसले को भी कानूनी बहस के बीच ला खड़ा किया।




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