Constitution Day Speech In Hindi : easy and short Speech on Constitution Day of India Samvidhan Divas bhashan Constitution Day Speech In Hindi : 26 नवंबर संविधान दिवस पर दें यह छोटा और सरल भाषण, Career Hindi News - Hindustan
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Constitution Day Speech In Hindi : 26 नवंबर संविधान दिवस पर दें यह छोटा और सरल भाषण

Constitution Day Speech In Hindi : 26 नवंबर संविधान दिवस के अवसर पर स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों में कई तरह के कार्यक्रम होते हैं। यहां हम स्कूल के बच्चों के लिए ' संविधान दिवस पर भाषण ' का उदाहरण दे रहे हैं । यहां से आइ़डिया लेकर वह अपनी स्पीच तैयार कर सकते हैं।

Sat, 22 Nov 2025 10:47 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Constitution Day Speech In Hindi : 26 नवंबर संविधान दिवस पर दें यह छोटा और सरल भाषण

Constitution Day Speech In Hindi : देश में हर साल 26 नवंबर का दिन संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। 1949 में इसी दिन संविधान को अपनाया गया था जो कुछ दिन बाद 26 जनवरी 1950 को भारत में लागू हुआ। संविधान को अपनाए जाने की याद में हर साल देश में संविधान दिवस मनाया जाता है। हमारा संविधान सर्वोच्च मानवीय मूल्यों, उत्कृष्ट लोकतांत्रिक आदर्शों, कर्तव्यों व अधिकारों की पावन अभिव्यक्ति है। संविधान दिवस पर सभी देशवासी एक दूसरे को संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं भेज रहे हैं। 26 नवंबर का दिन देश में राष्ट्रीय कानून दिवस भी मनाया जाता है। संविधान दिवस के अवसर पर स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों में कई तरह के कार्यक्रम होते हैं। भाषण, निबंध लेखन व क्विज प्रतियोगिताएं होती हैं। यहां हम स्कूल के बच्चों के लिए ' संविधान दिवस पर भाषण ' का उदाहरण दे रहे हैं । यहां से आइ़डिया लेकर वह अपनी स्पीच तैयार कर सकते हैं।

Constitution Day Speech In Hindi : संविधान दिवस पर भाषण

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे प्यारे दोस्तों । आपको सभी को संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।...

आज हम सब यहां संविधान दिवस मनाने के लिए जुटे हैं। हर साल 26 नवंबर का दिन देश में संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। 26 नवंबर 1949 के दिन देश की संविधान सभा ने संविधान को अपनाया था। यही वह दिन है जब संविधान बनकर तैयार हुआ था। संविधान दिन का मकसद देश के नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ाना है। यह संविधान ही है जो अलग-अलग धर्मों व जातियों की भारत की 140 करोड़ की आबादी को एक देश की तरह जोड़ता है। इसी संविधान के तहत हमारे देश के सभी कानून बनते हैं। इस संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट समेत देश की सभी अदालतें, संसद, राज्यों के विधानमंडल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत सभी इसी के तहत काम करते हैं। और इसी के तहत हम सभी को अधिकार भी मिलते हैं कि हम सब पूरी स्वतंत्रता व समानता के साथ जीवन जी सके।

हर भारतीय नागरिक के लिए 26 नवंबर संविधान दिवस बेहद गर्व का दिन है। कोई भी देश बिना संविधान के नहीं चल सकता। यह संविधान ही है जो अलग-अलग धर्मों व जातियों की भारत की 140 करोड़ की आबादी को एक देश की तरह जोड़ता है। संविधान में ही देश के सिद्धांत और उसको चलाने के तौर तरीके होते हैं।

साथियों! यह संविधान ही है जो हमें एक आजाद देश का आजाद नागरिक की भावना का एहसास कराता है। जहां संविधान के दिए मौलिक अधिकार हमारी ढाल बनकर हमें हमारा हक दिलाते हैं, वहीं इसमें दिए मौलिक कर्तव्य हमें हमारी जिम्मेदारियां भी याद दिलाते हैं। यह भी जानना जरूरी है कि 26 नवंबर का दिन देश में राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

हमारा देश जब 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ, तब हमारे पास अपना कोई संविधान नहीं था। संविधान के बगैर देश नहीं चलाया जा सकता था इसलिए इसको बनाने के लिए एक संविधान सभा का गठन किया गया। जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान की ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे इसलिए उन्हें संविधान निर्माता भी कहा जाता है। यह 26 नवंबर, 1949 को पूरा हुआ और इसे अपनाया गया। इसके बाद 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू हुआ।

साल 2015 में भारत सरकार ने 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया था। 2015 इसलिए खास वर्ष था क्योंकि उस साल संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की 125वीं जयंती मनाई जा रही थी। संवैधानिक मूल्यों के प्रति नागरिकों में सम्मान की भावना को बढ़ावा देने के लिए तब से यह दिवस हर साल मनाया जाता आ रहा है।

संविधान के पहले का भारत कुछ और था, संविधान के बाद का भारत एक नया भारत बना। बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर संविधान को लागू करने वाले लोग ठीक न हुए, तो यह केवल कागजों का पुलिंदा मात्र रह जाएगा और उनकी दूसरी चेतावनी थी कि अगर हमने सामाजिक और आर्थिक गैर-बराबरी दूर न की, तो इस राजनीतिक बराबरी आधारहीन साबित होगी। बाबा साहब की चेतावनी आज भी हमसे एक उम्मीद रखती है कि हम मुल्क के आइने को भी बचाएं और उसे कायदे से जमीन पर उतारने के लिए संकल्प लें। इस संविधान दिवस पर हमें जीवन भर अपने मौलिक कर्तव्यों और देश का कानून का पालन करने का प्रण लेना चाहिए। देश का अच्छा और जिम्मेदार नागरिक बनने से न सिर्फ संविधान का मकसद पूरा होगा बल्कि संविधान निर्माताओं के सपनों के राष्ट्र का निर्माण होगा।

धन्यवाद। जय हिंद, जय भारत।

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