OSM विवाद पर CBSE का यू-टर्न, पहले किया खारिज; अब सुरक्षा खामियों की बात मानी
CBSE ने OSM विवाद पर पहली बार आधिकारिक बयान जारी किया है। बोर्ड ने कहा कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और IIT की टीमें पोर्टल की कमजोरियों को दूर करने में जुटी हैं।

CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर जारी विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। बोर्ड ने ताजा बयान में स्वीकार किया है कि उसके सेवा प्रदाता के OSM पोर्टल में कुछ सुरक्षा कमजोरियों की पहचान हुई थी, जिन्हें नियंत्रित करने और दूर करने का काम जारी है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही दिन पहले CBSE ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि जिस पोर्टल को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह केवल टेस्टिंग साइट थी और उसमें किसी प्रकार का वास्तविक डेटा मौजूद नहीं था।
पहले क्या कहा था CBSE ने?
विवाद सामने आने के बाद CBSE ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल होने वाला वास्तविक पोर्टल अलग URL पर संचालित होता है और उसमें किसी प्रकार की सुरक्षा कमजोरी या समझौते की बात सामने नहीं आई है। बोर्ड ने यह भी कहा था कि जिस cbse.onmark.co.in वेबसाइट को लेकर सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं, वह केवल आंतरिक परीक्षण और समीक्षा के लिए बनाई गई टेस्टिंग साइट है। वहां केवल नमूना डेटा मौजूद था और उसमें न तो वास्तविक मूल्यांकन रिकॉर्ड थे, न अंक और न ही कोई संवेदनशील परीक्षा संबंधी जानकारी।
अब नए बयान में क्या बदला?
अब CBSE ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने ताजा बयान में कहा है कि उसके सेवा प्रदाता के OSM पोर्टल में चिन्हित की गई कमजोरियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। बोर्ड ने यह भी बताया कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों और IIT के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ पिछले कई दिनों से सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने में लगे हुए हैं। CBSE ने कहा कि सामने आई कमजोरियों को फिलहाल नियंत्रित कर लिया गया है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास जारी है कि सिस्टम में कोई अन्य ऐसी कमजोरी न बची हो जिसका दुरुपयोग किया जा सके।
एथिकल हैकर्स को भी दिया श्रेय
अपने नए बयान में CBSE ने उन नागरिकों और एथिकल हैकर्स का धन्यवाद भी किया जिन्होंने संभावित सुरक्षा समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया। बोर्ड ने बताया कि कुछ लोगों से सीधे संपर्क किया गया है और उनके सहयोग की सराहना की गई है। साथ ही अन्य लोगों से भी अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी प्रकार की सुरक्षा कमजोरी दिखाई देती है तो वे उसकी जानकारी बोर्ड की सुरक्षा टीम को ईमेल के माध्यम से भेजें।
निसर्ग अधिकारी और सार्थक सिद्धांत के दावों से शुरू हुआ विवाद
दरअसल OSM विवाद तब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया जब 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी ने दावा किया कि CBSE से जुड़े उत्तर पुस्तिकाओं और प्रश्नपत्रों का डेटा एक AWS बकेट के माध्यम से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो सकता था। इसके बाद 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने CBSE की टेंडर प्रक्रिया का विश्लेषण करते हुए आरोप लगाया कि कुछ महत्वपूर्ण पात्रता और सुरक्षा मानकों में ढील दी गई थी। उनके दावों ने भी OSM परियोजना और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को सवालों के घेरे में ला दिया।




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