आसान या कठिन, कैसा CBSE क्लास 10 हिंदी का पेपर? NCERT तैयार करना कितना रहा कारगर
कक्षा 10 का हिंदी पेपर इस बार आसान से मॉडरेट स्तर का रहा। ज्यादातर प्रश्न पाठ्यक्रम से आए और समझ आधारित रहे, जिससे तैयार छात्रों ने आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी।

आज 2 मार्च को सीबीएसई द्वारा कक्षा 10वीं के लिए हिंदी की परीक्षा आयोजिक की गई। दोपहर को जैसे ही कक्षा 10 के छात्र परीक्षा केंद्रों से बाहर निकले उनके चेहरों पर घबराहट नहीं बल्कि सुकून दिखाई दे रहा था। हिंदी की परीक्षा को लेकर जो आशंका थी, वह काफी हद तक खत्म होती नजर आई। छात्रों का कहना था कि पेपर ऐसा था जिसे नियमित पढ़ाई और अभ्यास करने वाला विद्यार्थी आराम से हल कर सकता था।
आज आयोजित हुई हिंदी की परीक्षा को लेकर शुरुआती प्रतिक्रियाओं में छात्रों और शिक्षकों दोनों ने इसे आसान से मध्यम स्तर का बताया। सबसे राहत की बात यह रही कि लगभग सभी प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम पर आधारित थे और पाठ्यपुस्तक से बाहर कुछ भी नहीं पूछा गया। सीबीएसई द्वारा तैयार प्रश्नपत्र में रटने के बजाय समझ, व्याख्या और भाषा के सही उपयोग पर ज्यादा ध्यान दिया गया।
पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र अभ्यास रहे कारगर
कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र और नमूना पेपर का अभ्यास किया था, जिससे उन्हें परीक्षा देते समय आत्मविश्वास महसूस हुआ। उनका कहना था कि जब प्रश्न परिचित लगते हैं, तो समय भी बचता है और उत्तर बेहतर तरीके से लिखे जा सकते हैं।
परीक्षा का ढांचा चार मुख्य हिस्सों में बांटा गया था, जिसमें पठन, लेखन, व्याकरण और साहित्य से जुड़े प्रश्न शामिल थे। पहले भाग में अपठित गद्य और कविता से जुड़े प्रश्न थे, जिनमें बहुविकल्पीय और वर्णनात्मक दोनों तरह के सवाल आए। यह हिस्सा छात्रों को सहज लगा क्योंकि इसमें समझ पर आधारित सीधे प्रश्न थे।
दूसरे भाग में व्याकरण से जुड़े प्रश्न पूछे गए। कुछ छात्रों ने इसे थोड़ा चुनौतीपूर्ण बताया, खासकर अलंकार और पद परिचय से जुड़े प्रश्नों में सोचने की जरूरत पड़ी। हालांकि जिन्होंने नियमित अभ्यास किया था, उनके लिए यह हिस्सा भी संभालने योग्य रहा।
तीसरे भाग में योग्यता और मूल्य आधारित प्रश्न शामिल थे। इन सवालों में विद्यार्थियों की विषय की समझ और विचार व्यक्त करने की क्षमता को परखा गया। शिक्षकों का मानना है कि ऐसे प्रश्न छात्रों को भाषा का वास्तविक उपयोग सिखाते हैं, केवल याद करने पर निर्भर नहीं रहने देते। लेखन कौशल वाला भाग छात्रों ने काफी अच्छे से किया। इसमें दिए गए विषय रोचक और स्पष्ट थे, जिससे विद्यार्थियों को लिखने में आसानी हुई। रचनात्मक लेखन से जुड़े प्रश्नों ने छात्रों को अपनी कल्पना और भाषा क्षमता दिखाने का मौका दिया। हालांकि ईमेल लेखन का प्रश्न कुछ विद्यार्थियों को थोड़ा नया लगा, लेकिन कुल मिलाकर उन्होंने इसे भी ठीक से प्रयास किया। वहीं लघुकथा लेखन का विषय छात्रों को पसंद आया और उन्होंने इसमें दिलचस्पी के साथ उत्तर लिखा।
सेट पर क्या बोले छात्र
कुछ छात्रों का कहना था कि एक सेट अन्य सेटों की तुलना में थोड़ा कठिन लगा, लेकिन वह भी पाठ्यक्रम से बाहर नहीं था। बाकी सेटों को छात्रों ने संतुलित और सहज बताया। इस तरह अलग अलग सेटों के बीच कठिनाई का हल्का अंतर जरूर दिखा, पर कुल मिलाकर पेपर संतुलित रहा।
गौरतलब है कि प्रश्नपत्र का उद्देश्य छात्रों की वास्तविक समझ को परखना था। पठन खंड में दिए गए गद्यांश सरल और स्पष्ट थे, जिससे छात्र अर्थ समझकर उत्तर दे सके। व्याकरण सीधे पाठ्यपुस्तक के सिद्धांतों पर आधारित था और साहित्य खंड परिचित पाठों से लिया गया था। यह भी कहा कि इस बार प्रश्नों का स्वरूप ऐसा था जो छात्रों को विश्लेषण करने, सही भाषा प्रयोग करने और अपने विचारों को व्यवस्थित ढंग से लिखने के लिए प्रेरित करता है। यानी परीक्षा केवल अंक लाने का माध्यम नहीं, बल्कि भाषा सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करने वाली रही।
कई विद्यार्थियों ने माना कि समय प्रबंधन यहां महत्वपूर्ण रहा, खासकर लेखन वाले भाग में। जिन्होंने पहले से अभ्यास किया था, वे पूरे प्रश्नपत्र को आराम से पूरा कर पाए। इस बार का हिंदी प्रश्नपत्र इस बात का संकेत देता है कि पढ़ाई अगर नियमित और समझ के साथ की जाए, तो भाषा विषय में अच्छा प्रदर्शन करना कठिन नहीं होता।




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