ताबड़तोड़ साइबर हमले, CBSE पोर्टल को बनाया निशाना; कैसे बचा पूरा सिस्टम?
सीबीएसई के री इवैल्यूएशन पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला हुआ लेकिन 24 घंटे की निगरानी और कड़ी सुरक्षा के चलते लाखों छात्रों का डेटा और सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है।

इस बार सीबीएसई 12वीं के नतीजे आने के बाद हजारों की संख्या में छात्र अपने अंकों से असंतुष्ट नजर आए। इसके बाद सीबीएसई ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम का बवाल भी सामने आया, इस पूरी प्रक्रिया के मद्देनजर सीबीएसई ने दोबारा री-इवैल्यूएशन का पोर्टल खोला जिसके जरिए छात्र मार्क्स वेरिफिकेशन, री-इवैल्यूएशन और कॉपियों की दोबारा जांच जैसी सेवाओं का सहारा ले सकें। लेकिन जरा सोचिए, उस वक्त क्या हो जब छात्रों की इसी उम्मीद और सहूलियत के लिए बनाए गए सिस्टम पर ही कोई सेंध लगाने की कोशिश करे? जी हां, सीबीएसई के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। बोर्ड ने बताया है कि उसके पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल पर लगातार और बहुत ही सुनियोजित तरीके से साइबर हमले किए गए हैं। सीबीएसई की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, इन सभी साइबर हमलों को नाकाम कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीएसई ने अब दिल्ली पुलिस की खास साइबर सेल IFSO यानी इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस में इसकी बाकायदा रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
कैसे शुरू हुआ साइबर हमलों का खेल
आपको बता दें कि छात्रों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई ने 2 जून 2026 को मार्क्स वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन का पोर्टल लाइव किया था। उम्मीद थी कि छात्र शांति से अपनी शिकायतें और आवेदन दर्ज कर सकेंगे। लेकिन पोर्टल के शुरू होने के कुछ ही देर बाद एक अजीब सी हलचल देखने को मिली। वेबसाइट पर अचानक से इतना ज्यादा और अजीब ट्रैफिक आने लगा जो किसी आम इंसान का नहीं हो सकता था। जांच में पता चला कि ये कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया साइबर अटैक था।
हैकर्स ने देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के अनगिनत आईपी एड्रेस का इस्तेमाल करते हुए पोर्टल पर एक साथ भारी मात्रा में संदिग्ध इंटरनेट ट्रैफिक भेजना शुरू कर दिया। हैकर्स का मकसद बड़ा साफ और खतरनाक था। वो चाहते थे कि भारी ट्रैफिक के बोझ तले पोर्टल क्रैश हो जाए और उसकी कार्यप्रणाली पूरी तरह से ठप पड़ जाए। वो ये भी चाहते थे कि जो असली छात्र इस पोर्टल का इस्तेमाल करना चाहते हैं, उनकी पहुंच किसी भी तरह से रोक दी जाए। और सबसे बड़ी बात इस अफरातफरी का फायदा उठाकर सिस्टम से जरूरी और संवेदनशील जानकारियां चुराने की भी फिराक थी।
कैसे नाकाम हुए ये खतरनाक साइबर हमले?
ये सब कुछ यूं ही अचानक से नहीं रुक गया, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत टीम की दिन-रात की मेहनत शामिल थी। सीबीएसई की अपनी साइबर सुरक्षा टीम ने पल-पल की निगरानी रखी। वो 24 घंटे सिस्टम पर नजर गड़ाए बैठे थे, ताकि कोई भी गलत ट्रैफिक अंदर न घुस पाए। और इस काम में बोर्ड अकेला नहीं था। देश के कई बड़े और नामी सरकारी व तकनीकी संस्थानों ने सीबीएसई का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। इनमें आईआईटी मद्रास के एक्सपर्ट्स, डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), CERT-In जैसी बेहतरीन केंद्रीय एजेंसियां शामिल थीं। इन सभी एक्सपर्ट्स ने मिलकर हैकर्स की हर चाल को समय रहते पहचाना, उसकी काट निकाली और हमले के असर को पूरी तरह से बेअसर कर दिया। ये हमारे देश के मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की एक बड़ी जीत भी है। हमला भले ही नाकाम हो गया हो, लेकिन इस गुस्ताखी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि अब दिल्ली पुलिस की स्पेशल यूनिट IFSO ने इस पूरे मामले की तफ्तीश अपने हाथों में ले ली है। अब जांच में कई परतों से पर्दा उठने की उम्मीद है।
अगर हैकर्स कामयाब होते तो क्या होता?
ये कोई छोटा मोटा मामला नहीं था। अगर बोर्ड सही वक्त पर इन हमलों को नहीं पहचान पाता और हैकर्स अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो जाते, तो इसका सीधा असर देशभर के लाखों करोड़ों छात्रों पर पड़ता। जो बच्चे अपने नंबर बढ़ने की उम्मीद में बैठे थे, वो फॉर्म ही नहीं भर पाते। इससे न सिर्फ बच्चों और उनके माता पिता को भारी मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती, बल्कि पूरे देश में एक अजीब सी प्रशासनिक अव्यवस्था और अफरातफरी का माहौल पैदा हो जाता। सीबीएसई ने भी माना है कि ये एक बहुत बड़ी साइबर सुरक्षा चुनौती थी, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। बोर्ड का साफ कहना है कि जिन भी लोगों या संगठनों ने इस हरकत को अंजाम दिया है, उनकी पहचान करके उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा करना बेहद जरूरी है।
क्या छात्रों का डेटा सुरक्षित है?
जैसे ही ये खबर बाहर आई, सबसे पहला डर जो छात्रों और अभिभावकों के मन में बैठा, वो ये था कि कहीं उनकी निजी जानकारी या परीक्षा के नंबरों से छेड़छाड़ तो नहीं हो गई? कहीं उनका डेटा तो लीक नहीं हो गया? इन तमाम जायज सवालों और चिंताओं पर सीबीएसई ने बहुत ही साफ शब्दों में इत्मीनान दिलाया है। बोर्ड ने पूरी जिम्मेदारी के साथ स्पष्ट किया है कि इतने बड़े और लगातार हुए हमलों के बावजूद उनका सिस्टम एक चट्टान की तरह खड़ा रहा। उनका डेटाबेस पूरी तरह से महफूज है। किसी भी तरह की कोई डेटा चोरी, सिस्टम के अंदर अनधिकृत पहुंच या सुरक्षा में सेंध लगने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इसका सीधा सा मतलब ये है कि किसी भी छात्र के अंक, उनकी कोई भी व्यक्तिगत जानकारी और परीक्षा से जुड़ा पूरा का पूरा रिकॉर्ड सौ फीसदी सुरक्षित है। इसलिए किसी भी छात्र या अभिभावक को घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।




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