BSUSC : विज्ञापन निकला नहीं, शिक्षक बहाल, भर्ती हुए असिस्टेंट प्रोफेसर की जांच में खुल रहीं फर्जीवाड़े की परतें
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग से नियुक्त सहायक प्राध्यापकों की जांच में कई परतें खुल रही हैं। कई शिक्षकों की नियुक्ति का विज्ञापन संबंधित कॉलेज से नहीं निकला और सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति कॉलेज ने कर ली।

बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग से नियुक्त सहायक प्राध्यापकों की जांच में कई परतें खुल रही हैं। कई शिक्षकों की नियुक्ति का विज्ञापन संबंधित कॉलेज से नहीं निकला और सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति कॉलेज ने कर ली। विवि से मांगे गये दस्तावेज में कई शिक्षक संबद्ध कॉलेजों में हुई नियुक्ति के लिए निकले विज्ञापन का प्रमाण नहीं दिखा पा रहे हैं। ऐसे शिक्षकों को 10 दिनों की मोहलत देते हुए दस्तावेज वापस कर दिये गये हैं। किसी भी कॉलेज में नियुक्ति के लिए उसका विज्ञापन निकालना जरूरी है। विवि ने भी सहायक प्राध्यापकों से मांगे आवेदन में इसका भी जिक्र किया था।
रजिस्ट्रार प्रो. समीर कुमार शर्मा का कहना कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जायेगा। सूत्रों ने बताया कि कई ऐसे कॉलेजों से भी अनुभव प्रमाणपत्र जारी कर दिये गए हैं, जिनकी संबद्धता खत्म हो गई है। ऐसे कॉलेजों और सहायक प्राध्यापकों को भी चिन्हित किया जा रहा है। संबद्ध कॉलेजों में कोई भी नियुक्ति सिंडिकेट के अनुमोदन के बाद ही होती है, लेकिन अनुभव प्रमाणपत्रों के साथ सिंडिकेट के अनुमोदन का पत्र भी नहीं मिल रहा है। इससे संदेह और गहराता जा रहा है। बीआरएबीयू में अनुभव प्रमाणपत्रों की जांच के लिए दो टीमें बनायी गई हैं। दोनों टीमों में तीन-तीन लोग हैं। पिछले दिनों विवि प्रशासन ने वर्ष 2020 से अबतक नियुक्त हुए शिक्षकों के अनुभव प्रमाणपत्र की जांच के लिए दस्तावेज मंगाये थे।
जांच में रिसोर्सपर्सन के अनुभव पर भी सहायक प्राध्यापक नियुक्त होने की बात आ रही है। कई अभ्यर्थियों की जांच में उनकी नियुक्ति की कार्यवाही का ब्योरा भी नहीं मिल रहा है। कई शिक्षकों की वैसी जगह नियुक्ति कर दी गई, जहां शिक्षकों के स्वीकृत पद नहीं थे। विवि सेवा आयोग की तरफ से नियुक्त सहायक प्राध्यापकों के अनुभव प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी का पता इस वर्ष फरवरी में चला था।




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