PSU Bank Recruitment: बैंक में सरकारी नौकरी चाहिए? तो सुधार लें अपना क्रेडिट स्कोर, जानें नए कड़े नियम
PSU Bank Recruitment Credit Score Rule: सरकारी बैंकों ने अब उम्मीदवारों के 'क्रेडिट स्कोर' को लेकर नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। यदि किसी अभ्यर्थी का क्रेडिट स्कोर खराब है तो उसे सरकारी बैंक में नौकरी मिलने में बड़ी मुश्किल आ सकती है।

PSU Bank Recruitment Credit Score Rule: अगर आप बैंकिंग क्षेत्र में अपना करियर बनाने का सपना देख रहे हैं और सरकारी बैंकों (PSU Banks) में क्लर्क या ऑफिसर बनने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अब केवल लिखित परीक्षा पास करना और इंटरव्यू में अच्छा प्रदर्शन करना ही बैंक में नौकरी पाने के लिए काफी नहीं होगा। सरकारी बैंकों ने अब उम्मीदवारों के 'क्रेडिट स्कोर' को लेकर नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि किसी अभ्यर्थी का क्रेडिट स्कोर खराब है या उसने किसी बैंक का कर्ज नहीं चुकाया है, तो उसे सरकारी बैंक में नौकरी मिलने में बड़ी मुश्किल आ सकती है।
क्या है नया नियम और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
बैंकिंग इंडस्ट्री के एक्सपर्ट और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के मैनेजमेंट ने यह निर्णय लिया है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों के 'सिबिल स्कोर' (CIBIL Score) या क्रेडिट हिस्ट्री की जांच की जाएगी। बैंकों का तर्क है कि जो व्यक्ति बैंक में वित्तीय लेनदेन और जनता के पैसे को संभालने की जिम्मेदारी उठाने जा रहा है, उसका अपना वित्तीय रिकॉर्ड बेदाग होना चाहिए। यदि कोई उम्मीदवार 'डिफॉल्टर' पाया जाता है या उसका क्रेडिट स्कोर (Credit Score) एक निश्चित सीमा से नीचे है, तो बैंक उसकी नियुक्ति को रद्द कर सकते हैं।
किन उम्मीदवारों पर पड़ेगा इसका असर?
यह नियम उन सभी पदों के लिए लागू होगा जो आईबीपीएस (IBPS) या बैंक द्वारा सीधे आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं के माध्यम से भरे जाते हैं।
लोन डिफॉल्टर: यदि किसी उम्मीदवार ने पहले से कोई पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का बिल बकाया रखा है और उसे चुकाया नहीं है, तो उन्हें 'अनफिट' माना जा सकता है।
कम क्रेडिट स्कोर: जिन छात्रों ने किस्तों (EMIs) के भुगतान में देरी की है, जिससे उनका स्कोर गिर गया है, उन्हें भी जॉइनिंग के समय दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
एजुकेशन लोन: यहां एक राहत की बात यह है कि बैंकों ने एजुकेशन लोन के मामले में कुछ लचीलापन दिखाया है। यदि एजुकेशन लोन में भी जानबूझकर चूक की गई है, तो विचार किया जाएगा।
नौकरी से पहले 'कैरेक्टर और एंटीसिडेंट' वेरिफिकेशन
बैंक अब भर्ती से पहले 'कैरेक्टर और एंटीसिडेंट' (C&A) वेरिफिकेशन के हिस्से के रूप में सिबिल रिपोर्ट मांग रहे हैं। कई मामलों में, चयनित उम्मीदवारों को अपनी सिबिल रिपोर्ट खुद जमा करने के लिए कहा जा रहा है। यदि रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की कमी पाई जाती है, तो बैंक उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने का मौका दे सकते हैं, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।
एक्सपर्ट की सलाह: छात्र क्या करें?
बैंकिंग एक्सपर्ट का कहना है कि उम्मीदवारों को परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ अपने वित्तीय स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। छात्र समय-समय पर फ्री सिबिल रिपोर्ट चेक करें। यदि किसी पुराने लोन या क्रेडिट कार्ड को लेकर बैंक के साथ कोई विवाद है, तो उसे तुरंत 'सेटल' या 'क्लोज' करें। लोन चुकाने के बाद बैंक से 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' जरूर लें, जो वेरिफिकेशन के समय काम आ सकता है।




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