AICTE से मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग छात्रों को परीक्षा से रोका, होगी CBI जांच
झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के 120 में से 60 छात्रों का रजिस्ट्रेशन रोके जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। साथ ही मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।

झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के 120 में (आरक्षित को छोड़कर) से 60 छात्रों का रजिस्ट्रेशन रोके जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। साथ ही मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। आदेश डीआईटी (धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) की रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। अगली सुनवाई तीन फरवरी को होगी।
रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए डीआईटी को 30 अप्रैल 2025 को मान्यता दी थी। इसके बावजूद झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) द्वारा छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोका गया। अदालत ने इसे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बताते हुए बेहद गंभीर मामला बताया।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस तरह ट्रैफिक पुलिस ‘नो एंट्री’ या ‘पार्किंग’ बोर्ड हटाकर लोगों को फंसाती है, प्रथम दृष्टया वैसा ही रवैया जेयूटी ने अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
जेयूटी और एआईसीटीई की भूमिका की होगी जांच
अदालत के अनुसार, छात्रों ने वैध मान्यता के आधार पर ही संस्थान में दाखिला लिया था, अब उन्हें परीक्षा से वंचित किया जा रहा है, जो भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देख सीबीआई जांच का निर्देश दिया कि एआईसीटीई और जेयूटी ने मिलकर छात्रों को किस तरह फंसाया और इसमें किस अधिकारी की क्या भूमिका रही। हाईकोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया को भी पक्षकार बनाते हुए जेयूटी और एआईसीटीई को जांच में सहयोग का निर्देश दिया।




साइन इन