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बैंक जरूरत न होने के बावजूद भी बीमा पॉलिसी लेने का दबाव बनाए तो क्या करें

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों द्वारा गलत जानकारी के साथ बेची जा रही बीमा पॉलिसी व अन्य उत्पादों पर कड़ी चेतावनी दी है। कहा कि, जरूरत न होने के बावजूद भी ग्राहकों को बीमा बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं, जबकि उनका मुख्य कार्य बैंकिंग सेवाएं देना है।

Tue, 24 Feb 2026 05:53 AMDrigraj Madheshia हिन्दुस्तान टीम
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बैंक जरूरत न होने के बावजूद भी बीमा पॉलिसी लेने का दबाव बनाए तो क्या करें

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों द्वारा गलत जानकारी के साथ बेची जा रही बीमा पॉलिसी व अन्य उत्पादों पर कड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि बैंकों का मूल कार्य जमा (धनराशि) जुटाने और ऋण देने है और बैंक उसी पर ध्यान केंद्रित करें। सोमवार को बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक जरूरत न होने के बावजूद भी ग्राहकों को बीमा बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं जबकि उनका मुख्य कार्य बैंकिंग सेवाएं देना है। उन्होंने कहा कि मिस-सेलिंग लंबे समय से चिंता का विषय रही है और अब इस पर सख्ती जरूरी है।

कई मामलों में ग्राहकों के पास पहले से बीमा पॉलिसी होती है, लेकिन उसके बावजूद बैंक उन पर नई बीमा पॉलिसी लेने का दबाव बनाते हैं। खासकर होम लोन लेते समय ग्राहकों से अतिरिक्त बीमा लेने को कहा जाता है, जबकि संपत्ति पहले से ही गिरवी होती है। ऐसे में नियामक की जिम्मेदारी स्पष्ट न होने के कारण ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि बैंकों को ग्राहकों की जरूरत समझने, जमा बढ़ाने और जिम्मेदारी के साथ ऋण देने पर ध्यान देना चाहिए।

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बैंकों को अधिक मानवीय होने की जरूरत

वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली को अधिक मानवीय और ग्राहक-केंद्रित बनाने की आवश्यकता है। मौजूदा समय में बैंकों ने ग्राहकों के साथ संबंध मजबूत करने और उनकी वित्तीय जरूरतों को समझने की मूल कार्य दूरी बना ली है, जिससे ग्राहकों में असंतोष बढ़ा है। बैंक अपने कम लागत वाले जमा यानी (करंट अकाउंट–सेविंग अकाउंट) को मजबूत करने पर जोर दें और ग्राहक केंद्रित सेवाएं विकसित करें।

कहां और कैसे करें शिकायत

गलत जानकारी देकर उत्पाद बेचने पर आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा, बीमा के लिए इरडा, बैंकिंग के लिए आरबीआई (सीएमएस पोर्टल), या ऑनलाइन माध्यम से शिकायत कर सकते हैं। समस्या का समाधान न होने पर उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

शिकायत करने के प्रमुख मंच

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन : टोल-फ्री नंबर 1915 या 1800-11-4000 पर कॉल करें।

ई-दाखिल पोर्टल: ऑनलाइन उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के लिए।

बीमा मिस-सेलिंग: बीमा कंपनी की शिकायत निवारण सेल में, फिर बीमा लोकपाल या इरडा की वेबसाइट (155255 पर कॉल)।

बैंकिंग मिस-सेलिंग: आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल के पास।

फ्री-लुक पीरियड (आमतौर पर 15-30 दिन) के भीतर शिकायत करने पर पॉलिसी रद्द कर रिफंड पाना आसान होता है।

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