टैरिफ पर ब्रिक्स की आलोचना से भड़के ट्रंप, 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क की दी धमकी
17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान समूह में शामिल देशों ने ट्रंप का नाम लिए बिना शुल्क वृद्धि की निंदा की। इससे ट्रंप भड़क गए। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर धमकी देते हुए लिखा कि ब्रिक्स की अमेरिका विरोधी नीतियों से जुड़ने वाले किसी भी देश पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ब्रिक्स देशों के खिलाफ फिर मोर्चा खोल दिया। उन्होंने धमकी कि जो भी देश ब्रिक्स समूह की ‘अमेरिका विरोधी नीतियों’ का साथ देंगे, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जाएगा। ट्रंप की इस धमकी का चीन ने भी जवाब दिया।
यह धमकी तब आई जब ब्राजील में चल रहे 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान समूह में शामिल देशों ने ट्रंप का नाम लिए बिना शुल्क वृद्धि की निंदा की। इससे ट्रंप भड़क गए। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर धमकी देते हुए लिखा कि ब्रिक्स की अमेरिका विरोधी नीतियों से जुड़ने वाले किसी भी देश पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। इसमें कोई अपवाद नहीं होगा।
टैरिफ पर किया था पलटवार
ट्रंप की इस धमकी के ठीक एक दिन पहले ब्रिक्स समूह में शामिल देशों ने अमेरिका की टैरिफ नीति की आलोचना की थी और इसे विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ बताया था। जारी संयुक्त बयाने में ब्रिक्स नेताओं ने बिना ट्रंप का नाम लिए बैगर कहा था कि ऐसे प्रतिबंधों वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा हैं। इससे वैश्विक आपूर्ति में बाधा पैदा होने और अनिश्चितता का संकट खड़ा हो गया है। ब्राजील में 17वीं ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 6 से 7 जुलाई तक चला।
भारत की स्थिति
हालांकि ट्रंप ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि ‘अमेरिका विरोधी नीतियां’ किसे माना जाएगा। यही कारण है कि फिलहाल इसकी व्याख्या को लेकर भ्रम की स्थिति है। हालांकि, उन्होंने जिस अपवाद की बात की है, उसमें सीधे तौर पर भारत भी शामिल हो सकता है। दरअसल, अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर कृषि-डेयरी और ऑटोमोबाइल समेत कुछ मुद्दों पर पेच फंसा हुआ है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने आर्थिक हितों से समझौता नहीं करेगा।
पहले भी चेताया था
इससे पहले ट्रंप ने इस साल जनवरी में भी चेतावनी दी थी कि अगर ब्रिक्स देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर की जगह किसी और मुद्रा के इस्तेमाल का प्रयास करेंगे तो वह उन पर 100 प्रतिशत शुल्क लगा देंगे। दरअसल, ब्रिक्स के कुछ सदस्य देश विशेष रूप से रूस और चीन अमेरिकी डॉलर का विकल्प या ब्रिक्स मुद्रा बनाने की मांग कर रहे हैं। ट्रंप ने कई बार इस पर आपत्ति जताई है। हालांकि, इस मामले में भारत ने साफ कहा है कि वह 'डी-डॉलराइजेशन' (विश्व व्यापार और वित्तीय लेनदेन में डॉलर के उपयोग में कमी) के खिलाफ है।
टकराव नहीं चाहते : चीन
ट्रंप की ताजा धमकी पर चीन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ब्रिक्स समूह टकराव नहीं चाहता है और यह किसी अन्य देश को निशाना नहीं बनाता है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि ब्रिक्स उभरते बाजारों और विकासशील देशों के बीच सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। ब्रिक्स खुलेपन, समावेशन और सभी के फायदे के लिए सहयोग की वकालत करता है।
आज समझौता पत्र जारी करेंगे ट्रंप
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अलग से जानकारी दी कि अमेरिका सोमवार से विभिन्न देशों को शुल्क और समझौतों के सिलसिले में ''पत्र'' भेजेगा। उन्होंने कहा कि मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि दुनिया भर के विभिन्न देशों के साथ अमेरिका के शुल्क पत्र और/या समझौते सात जुलाई को से वितरित किए जाएंगे।
क्या है ब्रिक्स समूह
-ब्रिक्स दस देशों का संगठन है। इसकी की स्थापना 2009 में हुई थी। इस समूह में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे।
- 2024 में इसका विस्तार करके मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को इसमें शामिल किया गया, जबकि इंडोनेशिया 2025 में शामिल हुआ।
- इसके अलावा इस समूह में बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान रणनीतिक भागीदार देश के रूप में शामिल हैं।
- सदस्य देशों की कुल अर्थव्यवस्था 25.5 ट्रिलियन से अधिक है, जो वैश्विक अर्थ्व्यवस्था का 28% है
- यह एकमात्र ऐसा अंतरराष्ट्रीय समूह है, जिसका अमेरिका हिस्सा नहीं है।
- ब्रिक्स देशों की कुल आबादी करीब 3.5 अरब यानी दुनिया की 45% है
ब्रिक्स देशों के साथ अमेरिका का व्यापार (अरब डॉलर)
देश निर्यात आयात
भारत 40.1 87.3
चीन 147.8 448
ब्राजील 44.8 41
यूएई 24.9 --
इंडोनेशिया -- 28.1
सऊदी अरब 13.9 16.5
अन्य सदस्य 23.5 29
कुल 294.9 649.9
(2023 के आंकड़े, स्त्रोत: यूएन ट्रेड डाटाबेस)




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