क्या अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना सही है?
Stock Market Updates: निफ्टी इस समय वित्त वर्ष 27 की अनुमानित कमाई के करीब 20 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि एनएसई मिडकैप इंडेक्स 28 गुना और स्मॉलकैप इंडेक्स 24 गुना के आसपास है। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में यह स्टॉक पिकर का बाजार बन जाता है, जहां सही शेयर चुनना ही असली खेल है।

गुरुवार को सेंसेक्स में 1236 अंक की जोरदार गिरावट में निवेशकों के करीब ₹आठ लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग ₹464 लाख करोड़ पर आ गया, जो पिछले सत्र में करीब ₹472 लाख करोड़ था। बाजार की यह गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी आधे प्रतिशत से ज्यादा गिर गए। इससे साफ है कि बिकवाली व्यापक थी।
बुधवार को सीएनएन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी सेना मिलिट्री इस सप्ताहांत ही ईरान पर हमला करने वाली है। बताया गया कि ईरान पर अमेरिकी हमला शायद एक ‘बड़ा, हफ्तों तक चलने वाला अभियान’ होगा जो सीमित हमले के बजाय पूरे युद्ध जैसा होगा। बाजार अमेरिका-ईरान रिश्तों से जुड़े घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है। जानकारों का कहना है कि निवेश तनाव के और बढ़ने की उम्मीद में बाजार से रकम निकाल रहे हैं।
विदेशी हिस्सेदारी 15 साल के निचले स्तर पर
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कुछ महीनों में एनएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों से रिकॉर्ड 18.9 अरब डॉलर यानी लगभग ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक निकाल लिया है, जिससे उनका कुल स्वामित्व पिछले 15.5 वर्षों के सबसे निचले स्तर 16.7% पर पहुंच गया है। इस गिरावट का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखा। निफ्टी 50 में एफपीआई का हिस्सा 23.8% तक गिर गया, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम रहा।
आईटी कंपनियों से हाथ खींचे
फरवरी के पहले छह महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय आईटी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लगभग ₹11,000 करोड़ के शेयर बेचे, क्योंकि इस सेक्टर में एआई से पैदा होने वाली चुनौतियों को लेकर चिंता बढ़ रही थी। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के मुताबिक, एक से 15 फरवरी के बीच एफपीआई ने भारतीय आईटी शेयरों में ₹10,956 करोड़ के शेयर बेचे। इससे पहले जनवरी 2026 में एफपीआई ने आईटी सेक्टर से ₹1,835 करोड़ निकाले थे। इस वजह से, 15 फरवरी, 2026 तक आईटी शेयरों में कुल एफपीआई निवेश लगभग 16% घटकर ₹4,48,938 करोड़ रह गया, जो जनवरी के आखिर में ₹5,33,953 करोड़ था।
घरेलू संस्थागत निवेशकों ने संभाला मोर्चा
एफपीआई की निरंतर निकासी के बीच, घरेलू संस्थागत निवेशकों जैसे म्यूचुअल फंड, बैंकों, बीमा कंपनियों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी में तेजी बनाई रखी। घरेलू बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों का कुल हिस्सा अब 19% तक पहुच गया है, जो एफपीआई से अधिक है। इस दौरान म्यूचुअल फंड्स की होल्डिंग्स 11.1% के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंची हैं। यह प्रवाह मुख्यतः एसआईपी यानी सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिये मजबूत निवेश और घरेलू संस्थानों की निरंतर खरीद के कारण रहा है।
ऐसे माहौल में शेयर खरीदने कितना सही?
जानकारों के मुताबिक, निफ्टी इस समय वित्त वर्ष 27 की अनुमानित कमाई के करीब 20 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि एनएसई मिडकैप इंडेक्स 28 गुना और स्मॉलकैप इंडेक्स 24 गुना के आसपास है। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में यह स्टॉक पिकर का बाजार बन जाता है, जहां सही शेयर चुनना ही असली खेल है।
1. प्रॉफिट-बुकिंग के कारण बिकवाली
हाल के तेजी के बाद निवेशक मुनाफा सुरक्षित करने के लिए शेयर बेच रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा है।
2. वैश्विक संकेत कमजोर
अंतरराष्ट्रीय बाजारों के कमजोर रुख और अस्थिरता के कारण विदेशी निवेशक सतर्क हैं, जिससे भारतीय बाजार में बिकवाली बढ़ी।
3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
तेल की बढ़ती कीमतों से लागत और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है, जो निवेशकों के मनोबल को कमजोर करता है।
4. प्रमुख शेयरों में भारी गिरावट
बैंक, वित्तीय सेवाएँ, मेटल, एफएमसीजी जैसे बड़े समूहों के शेयरों में बिकवाली से इंडेक्स को बड़ी चोट लग रही है।
5. वैश्विक नीतिगत अनिश्चितता
यूएस फेडरल रिज़र्व की नीति समेत ग्लोबल नीतिगत असमंजस ने विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रभावित किया है।
6. बाजार में व्यापक मंदी
मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी गिरावट के साथ व्यापक बिकवाली देखने को मिल रही है।




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