पवन हंस की बिक्री पर फंसा पेच, प्रक्रिया रद्द करेगी सरकार, यह है मामला
पवन हंस की 51 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए सरकार ने आरक्षित मूल्य 199.92 करोड़ रुपये तय किया गया था। पवन हंस की बिक्री के लिए सरकार को तीन कंपनियों से बोलियां मिली थीं।

हेलीकॉप्टर सर्विस प्रोवाइडर कंपनी पवन हंस की बिक्री प्रक्रिया में एक बार फिर पेच फंस गया है। दरअसल, सरकार ने 51 प्रतिशत बहुमत हिस्सेदारी बेचने की प्रस्तावित योजना को रद्द करने का फैसला किया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि अंतर-मंत्रालयी समूह जल्द ही बिक्री प्रक्रिया को रद्द कर देगा। अधिकारी के मुताबिक हमें जल्द ही पवन हंस का विनिवेश करने की संभावना नहीं है।
बिजनेस टुडे से अधिकारी ने कहा कि प्रतिस्पर्धी बोली के बावजूद बोली लगाने वाले के खिलाफ आरोपों की प्रकृति ने प्रक्रिया की पारदर्शिता को बाधित किया है। वित्त मंत्री, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्री का एक समूह पवन हंस की बिक्री की जांच कर रहा है।
क्या है मामला: अल्मास ग्लोबल ऑपर्च्युनिटी फंड के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम स्टार9 मोबिलिटी ने घाटे में चल रही हेलीकॉप्टर फर्म में सरकार की 51 फीसदी हिस्सेदारी के लिए 211 करोड़ रुपये से अधिक की बोली लगाकर बोली जीती थी। हाल ही में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की कोलकाता पीठ ने अल्मास ग्लोबल के खिलाफ कोलकाता स्थित पावर कंपनी ईएमसी लिमिटेड के अधिग्रहण पर एक आदेश दिया। इसके बाद केंद्र को बिक्री प्रक्रिया को रोकना पड़ा और स्टार9 मोबिलिटी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया।
आपको बता दें कि पवन हंस में तेल कंपनी ओएनजीसी की फर्म में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसके पास 41 हेलीकॉप्टरों का बेड़ा है। पवन हंस की 51 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए सरकार ने आरक्षित मूल्य 199.92 करोड़ रुपये तय किया गया था। पवन हंस की बिक्री के लिए सरकार को तीन कंपनियों से बोलियां मिली थीं। इनमें से स्टार9 मोबिलिटी 211.14 करोड़ रुपये की बोली के साथ सबसे बड़ी बोलीकर्ता के रूप में सामने आई है। बाकी दो बोलियां 181.05 करोड़ रुपये एवं 153.15 करोड़ रुपये की थी।




साइन इन