लॉकडाउन की आहट और युद्धविराम खत्म होने का डर, शेयर बाजार में और बिगड़ेंगे हालात?
शेयर बाजारों में मंगलवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट आई और बीएसई सेंसेक्स 1,456 अंक लुढ़क गया जबकि एनएसई निफ्टी 23,500 अंक के नीचे आ गया। बाजार में गिरावट के कारण निवेशकों को 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

ग्लोबल टेंशन और लॉकडाउन की आहट से भारतीय शेयर बाजार भरभरा गया है। सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार को शेयर बाजार करीब 2% टूटा। बाजार में गिरावट के कारण निवेशकों को 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। कारोबार के अंत में बीएसई का मार्केट कैपिटल घटकर 457 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस दौरान भारतीय करेंसी रुपया भी अपने ऑल टाइम लो पर पहुंच गया। आइए जान लेते हैं कि बाजार में भूचाल के क्या कारण हैं?
ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज किया: ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता असफल होने की आशंका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम कमजोर स्थिति में है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और उन मांगों की सूची पर अड़ा हुआ है जिन्हें ट्रंप ने बेकार बताया है।
तेल की कीमतें 107 डॉलर से ऊपर: युद्धविराम पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य के लंबे समय तक बंद रहने की आशंकाओं से तेल की कीमतों में उछाल आया है। मंगलवार दोपहर को ब्रेंट क्रूड में लगभग 3% की वृद्धि हुई और यह 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहा जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड में भी लगभग 3% की वृद्धि हुई और यह 101 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
रुपया में ऐतिहासिक गिरावट: मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 35 पैसे टूटकर 95.63 के अपने सबसे निचले स्तर पर रहा। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.57 पर खुला और कारोबार के दौरान 95.74 के अब तक के निचले स्तर तक आ गया। कारोबार के अंत में यह 95.63 पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 35 पैसे की गिरावट है। सोमवार को भी रुपया 79 पैसे टूटकर 95.28 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।
- विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल के विवेकपूर्ण इस्तेमाल और विदेशी मुद्रा को बचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह से देश की ऊर्जा स्थिति से जुड़ी चिंताएं और बढ़ गई हैं। इसका असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखा जा रहा है।
- विदेशी निवेशकों के मोहभंग से भी बाजार के हालात बिगड़े हैं। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 8,437.56 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पांचवां सत्र था जब बिकवाली जारी रही।
आगे के लिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा-जब तक अमेरिका और ईरान की बातचीत में कोई सार्थक प्रगति नहीं होती या पश्चिम एशिया संघर्ष में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं मिलते तब तक बाजार में गिरावट का दौर जारी रहने की आशंका है। उन्होंने बताया कि अमेरिका-ईरान वार्ता रुकने से ब्रेंट क्रूड 107.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बिकवाली के मूड में बने रहे और रुपया डॉलर के मुकाबले नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। मुद्रा में आई इस गिरावट ने आयात बिल और महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में कच्चे तेल, खाद्य तेल और सोने के बढ़ते आयात से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले दबाव का जिक्र किया है। इसे एक चेतावनी संकेत के रूप में देख रहा है। इस वजह से भी निवेशक सर्तक रुख अपना रहे हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
चौतरफा बिकवाली के बीच, तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 1,456.04 अंक यानी 1.92 प्रतिशत टूटकर 74,559.24 अंक पर बंद हुआ। कारोबार दौरान, यह 1,565.78 अंक लुढ़क कर 74,449.50 अंक पर आ गया था। बीएसई में सूचीबद्ध शेयरों में 3,412 में गिरावट रही जबकि 869 शेयर लाभ में रहे। वहीं 129 के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 436.30 अंक यानी 1.83 प्रतिशत का गोता लगाकर 23,379.55 अंक पर बंद हुआ। चार कारोबारी दिन में बीएसई सूचकांक 3,399.28 अंक यानी 4.36 प्रतिशत लुढ़का जबकि निफ्टी 951.4 अंक यानी 3.91 प्रतिशत नीचे आया है।




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