शेयर बाजार में मचा हाहाकार, निवेशकों के डूब गए ₹6.3 लाख करोड़, जानिए क्या है वजह
Stock Market Crash- बाजार में आई इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में लगभग 6.3 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। और बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 469 लाख करोड़ रुपये से घटकर 462 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

Stock Market Crash: शेयर बाजार में आज मंगलवार, 24 फरवरी की सुबह जोरदार गिरावट देखने को मिली। फ्रंटलाइन इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही दबाव में रहे। BSE सेंसेक्स 1300 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 1.3% गिरकर 25,387 पर आ गया। बिकवाली सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 1% तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में आई इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में लगभग 6.3 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। और बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 469 लाख करोड़ रुपये से घटकर 462 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।
क्यों गिर रहा मार्केट
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से जुड़ी अनिश्चितता मानी जा रही है। हाल ही में अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने ट्रंप के टैरिफ फैसले को रद्द कर दिया था, लेकिन इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और आक्रामक रुख में नजर आ रहा है। खबर है कि 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट के सेक्शन 232 के तहत नए सिरे से टैरिफ लगाने की तैयारी की जा रही है। साथ ही, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन पर भी दुनिया भर के बाजारों की नजर टिकी हुई है। निवेशकों को डर है कि अगर टैरिफ को लेकर सख्त रुख अपनाया गया तो ग्लोबल ट्रेड और उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव
दूसरी बड़ी चिंता अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों और वहां की सरकार की सख्त कार्रवाई से हालात गंभीर बने हुए हैं। अमेरिका ने भी ईरान को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 26 फरवरी को होने वाली परमाणु वार्ता से पहले अनिश्चितता और बढ़ गई है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से ग्लोबल बाजारों में सतर्कता का माहौल है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिख रहा है।
आईटी सेक्टर की भारी गिरावट
आईटी सेक्टर की भारी गिरावट ने भी बाजार की कमर तोड़ दी है। निफ्टी आईटी इंडेक्स इंट्राडे में करीब 4% तक लुढ़क गया और फरवरी महीने में अब तक लगभग 20% टूट चुका है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते असर, अमेरिकी ब्याज दरों के ऊंचे स्तर और आईटी कंपनियों के एडीआर में कमजोरी से निवेशक घबराए हुए हैं। आईटी शेयरों में लगातार बिकवाली से सेंसेक्स और निफ्टी पर सीधा दबाव पड़ा, क्योंकि इन इंडेक्स में आईटी कंपनियों का अच्छा-खासा वेटेज है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की मजबूती भी बाजार के लिए निगेटिव संकेत दे रही हैं। ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो छह महीने के उच्च स्तर के करीब है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ाता है। वहीं डॉलर इंडेक्स में मजबूती से विदेशी निवेशकों का रुख बदल सकता है। हाल के दिनों में एफआईआई ने खरीदारी शुरू की थी, लेकिन अगर डॉलर और मजबूत हुआ तो पूंजी का बहिर्वाह बढ़ सकता है। ऊंचे वैल्यूएशन और कमजोर कमाई ग्रोथ के बीच बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव जारी रहने के संकेत हैं।




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