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होम लोन की EMI पर मिलेगी राहत या लगेगा झटका? रिजर्व बैंक शुक्रवार को करेगा ऐलान

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति के फैसले की घोषणा करेंगे। बता दें कि रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर है। ऐसा अनुमान है कि इस बार रिजर्व बैंक रेपो रेट में बदलाव नहीं करेगा।

Thu, 4 June 2026 10:59 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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होम लोन की EMI पर मिलेगी राहत या लगेगा झटका? रिजर्व बैंक शुक्रवार को करेगा ऐलान

होम लोन या कार लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए शुक्रवार का दिन काफी अहम रहने वाला है। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले की घोषणा करेंगे। यह उम्मीद जताई जा रही है कि रिजर्व बैंक मुख्य रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और यह 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रहेगा। अगर ऐसा होता है तो आपके होम लोन की ईएमआई पर फिलहाल राहत नहीं मिलेगी। जानकारों की मानें तो पश्चिम एशिया संकट के कारण महंगाई और आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर पैदा हो रही चुनौतियों को देखते हुए सतर्क रुख अपनाया जा रहा है।

सर्वेक्षण में क्या कहा गया है?

अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, रिजर्व बैंक इस बार रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, अधिकांश प्रतिभागियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़ती मुद्रास्फीति जोखिमों के बीच मौद्रिक सख्ती फिर से शुरू कर सकता है। सर्वेक्षण में शामिल 11 प्रतिभागियों ने दरों को यथावत रखने की उम्मीद जताई जबकि चार ने 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना जताई।

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अधिकांश प्रतिभागियों ने चालू वित्त वर्ष के दौरान कम से कम दो बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है, जबकि कुछ का मानना है कि मुद्रास्फीति दबाव बढ़ने पर इससे अधिक बढ़ोतरी हो सकती है।

ऊर्जा कीमतों में उछाल, सप्लाई चेन संबंधी चुनौतियों के बने रहने और रुपये में गिरावट के बीच कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को बढ़ा सकता है और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के वृद्धि दर के अनुमान को घटा सकता है। आरबीआई ने अप्रैल में पश्चिम एशिया संघर्ष के ऊर्जा आपूर्ति, मुद्रास्फीति और वृद्धि पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए सतर्क रुख अपनाते हुए रेपो दर को यथावत रखा था।

यस बैंक की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

यस बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध की स्थिति में कुछ सुधार के बावजूद नीतिगत चुनौतियां बनी हुई हैं और अर्थव्यवस्था अब भी आपूर्ति संबंधी झटकों के प्रति संवेदनशील है। रिपोर्ट के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई का असर अब खुदरा मुद्रास्फीति पर दिखना शुरू हो गया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ कॉमर्शियल एलपीजी की कीमतें भी बढ़ी हैं। सभी विकल्प खुले हैं लेकिन हमारा मानना है कि जून में दरों और नीतिगत रुख में बदलाव की संभावना बहुत कम है क्योंकि आरबीआई कीमतों में वृद्धि के प्रभावों का आकलन करने के लिए समय लेना चाहेगा।

शेयर बाजार पर रहेगी नजर

केंद्रीय रिजर्व बैंक के फैसले के बीच शेयर बाजार पर निवेशकों की नजर रहेगी। मौद्रिक नीति समिति के रेपो रेट पर आने वाले फैसले से पहले भी बाजार में सतर्कता का माहौल रहा। गुरुवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 13.84 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 74,360.01 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 74,544.24 के ऊपरी और 73,807.30 अंक के निचले स्तर तक गया।

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इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 10.95 अंक यानी 0.05 प्रतिशत चढ़कर 23,416.55 अंक पर बंद हुआ।

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