रिजर्व बैंक का बड़ा एक्शन, 130 से ज्यादा NBFCs के रजिस्ट्रेशन को किया रद्द
रिजर्व बैंक ने 135 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं। जिन एनबीएफसी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द किए गए, उनमें से ज्यादातर का रजिस्टर्ड कार्यालय का पता पश्चिम बंगाल में था।

भारतीय रिजर्व बैंक ने 135 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं। इनमें एक्सप्रेस फिनकैप हाउस, अक्षय फिस्कल सर्विसेज, टाइम्स फाइनेंस (पी), जुपिटर प्रोजेक्ट्स (पी), जुपिटर फिनवेस्ट, एसेल फाइनेंस बिजनेस लोन्स और सिटीवाइड फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कंपनियां शामिल हैं। रिजर्व बैंक ने बताया कि जिन एनबीएफसी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द किए गए, उनमें से ज्यादातर का रजिस्टर्ड कार्यालय का पता पश्चिम बंगाल में था। इसके अलावा, 13 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने अपना व्यवसाय बंद करने या विलय/समापन/स्वैच्छिक रूप से नाम हटाने के कारण कानूनी इकाई न रहने की वजह से केन्द्रीय बैंक को अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सौंप दिए हैं।
लाइसेंस भी लौटाए गए
रिजर्व बैंक के बयान में कहा गया है कि जे. थॉमस फाइनेंस, इकोन-सुपर सेल्स, हितेशा फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट, तिनेवेली तुतीकोरीन इन्वेस्टमेंट्स, कार्नेक्स विनिमय और इम्पैक्ट लीजिंग ने गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (एनबीएफआई) का व्यवसाय छोड़ने के कारण अपने लाइसेंस लौटा दिए। इसके साथ ही, फोररनर कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स का लाइसेंस इसलिए सुपुर्द किया गया क्योंकि वह बिना पंजीकरण वाली कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीआईसी) के लिए तय मानदंडों को पूरा करती थी, जिसके लिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होती है।
आरबीआई के मुताबिक कैस्पियन इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट्स, हरि दर्शन सेल्स, आइवरी कंसल्टेंट्स, एसकेए कंसल्टेंसी सर्विसेज, त्रिशिता मैनेजमेंट और सुबन ट्रेड्स जैसी एनबीएफसी ने अपने लाइसेंस लौटा दिए, क्योंकि विलय/समापन/स्वैच्छिक रूप से नाम हटाने आदि के कारण वे कानूनी इकाई नहीं रहीं।
काउंटरपार्टी के लिए सर्कुलर
इस बीच, रिजर्व बैंक ने 'काउंटरपार्टी' यानी प्रतिपक्ष ऋण जोखिम (सीसीआर) से जुड़े संशोधित दिशानिर्देशों के ड्राफ्ट पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। केंद्रीय बैंक ने एक सर्कुलर में कहा कि प्रस्तावित बदलावों में बैंकिंग और ट्रेडिंग के लिए रखी गई संपत्तियों से जुड़े जोखिम में सीसीआर के दायरे को स्पष्ट करना शामिल है। इसके साथ ही, कई मार्जिन समझौतों और कई ट्रांजैक्शन को जोड़-घटाकर जोखिम निकालने के नियमों पर कानूनी एवं नियामकीय विकासों के अनुरूप विस्तृत दिशा-निर्देश देने का प्रस्ताव है। आरबीआई ने सेबी से मान्यता-प्राप्त शेयर बाजारों के इक्विटी और जिंस आधारित ट्रेडिंग के सेग्मेंट में समाशोधन सदस्य के रूप में बैंकों द्वारा किए जाने वाले ट्रांजैक्शन को लेकर भी स्पष्ट करने की बात कही है। इसके अलावा, ऑप्शन प्रीमियम के भुगतान को टालने आदि का भी प्रस्ताव है।
बता दें कि आरबीआई ने वर्ष 2016 में डेरिवेटिव लेनदेन से जनरेटेड सीसीआर जोखिम की गणना और केंद्रीय प्रतिपक्षों के प्रति बैंकों की पूंजी जरूरतों पर दिशानिर्देश जारी किए थे, जिनका कार्यान्वयन बाद में स्थगित कर दिया गया था। केंद्रीय बैंक ने विनियमित संस्थाओं, बाजार प्रतिभागियों और अन्य हितधारकों से इन प्रस्तावों पर एक जुलाई, 2026 तक टिप्पणियां मांगी हैं।




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