वेतन आयोग पर PM मोदी का बड़ा ऐलान, इन सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी
केंद्रीय कर्मचारी आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7वें वेतन आयोग पर एक बड़ी गारंटी दी है। यह लाखों सरकारी कर्मचारियों के काम की गारंटी है।

केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो वेतन आयोग साल 2027 की पहली छमाही तक अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप देगा। ऐसा माना जा रहा है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें बैकडेट में जाकर एक जनवरी 2026 से प्रभावी होंगी। इस माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सातवें वेतन आयोग को लेकर एक बड़ी गारंटी दी है। हालांकि, यह गारंटी पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए है।
क्या है गारंटी?
पश्चिम बंगाल के पुरबा मिदनापुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आते ही राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग की घोषणा कर दी जाएगी। पीएम मोदी ने बंगाल की जनता के लिए 6 गारंटी का जिक्र किया। इसमें आखिरी गारंटी सातवें वेतन आयोग से जुड़ा था। पीएम मोदी ने कहा- राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद हम राज्य के कर्मचारियों, शिक्षकों और संबंधित क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए 7वें वेतन आयोग को लागू करेंगे।
अभी 6वें वेतन आयोग की सिफारिशें
वर्तमान में पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को 6वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सैलरी मिल रही है। अगर कोई भी सरकार 7वें वेतन आयोग को लागू करती है तो इससे पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लाभ मिल सकता है। इससे राज्य के सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में बंपर उछाल होगा। अब बंगाल में चुनावी माहौल है तो 7वां वेतन आयोग एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इस मुद्दे को पीएम मोदी ने अपनी 6 गारंटी में शामिल किया है।
केंद्र और राज्यों में वेतन आयोग: यह जरूरी नहीं है कि राज्य सरकारें अपने वेतन आयोगों को केंद्र के वेतन आयोगों के साथ ही रखें। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल और पंजाब में 6वां वेतन आयोग चल रहा है। केरल में 11वां वेतन आयोग चल रहा है जबकि कर्नाटक और असम में वेतन आयोग वही है जो केंद्र में है। बता दें कि केंद्र ने अपना पहला वेतन आयोग 1946-47 में बनाया था, वहीं उस समय कई राज्य अस्तित्व में ही नहीं थे। जब नए राज्य बने तो अपने हिसाब से वेतन आयोग बनाए गए। वहीं, वेतन आयोगों के लिए केंद्र और राज्यों का बजट आवंटन भी अलग-अलग होता है। इसलिए, ज्यादातर मामलों में, केंद्र और राज्यों के वेतन आयोगों का एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठा पाना मुमकिन नहीं होता।
राज्य अपने खुद के वेतन आयोग क्यों बनाते हैं?
केंद्र सरकार की तरह राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन में भी समय-समय पर बदलाव होता है। उनके वेतन, पेंशन और भत्तों में संशोधन किया जाता है। संशोधन की शर्तें राज्य की अर्थव्यवस्था और किसी खास वेतन आयोग के लिए तय बजट के हिसाब से हो सकती हैं। इसलिए, केंद्र के वेतन आयोग की सिफारिशों को सीधे-सीधे अपनाने के बजाय, राज्य अपने खुद के वेतन आयोग भी बना सकते हैं।




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