₹20 तक बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से ब्रोकरेज को डर
ब्रोकरेज का अनुमान है कि शुरुआती तौर पर कीमतों में ₹10 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर अगले दो से तीन तिमाहियों तक क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो कीमतों में और भी बढ़ोतरी हो सकती है।

कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से उछाल आया है। इस माहौल के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफे की आशंका बढ़ गई है। Emkay ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लंबे समय तक बंद रहने से सरकार को खुदरा ईंधन की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। शुरुआती तौर पर कीमतों में ₹10 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर अगले दो से तीन तिमाहियों तक क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो कीमतों में और भी बढ़ोतरी हो सकती है। अगले तीन से छह महीनों में खुदरा ईंधन की कीमतें ₹18–20 प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं। बता दें कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय से बंद पड़ा है।
क्या है Emkay की रिपोर्ट में
Emkay ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा- शुरुआती तौर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इससे तेल कंपनियों के घाटे की पूरी भरपाई नहीं हो पाएगी लेकिन कीमतों में बहुत अधिक बढ़ोतरी से भारी महंगाई का दबाव और व्यापक आर्थिक जोखिम पैदा हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर मध्यम अवधि में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो कीमतों में और भी सोच-समझकर बढ़ोतरी किए जाने की संभावना है।
ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि यह संकट कुछ समय के लिए है। भारत की क्रूड बास्केट अभी लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही है। इन स्तरों पर तेल कंपनियों के लिए पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर लगभग ₹18–20 की अंडर-रिकवरी का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है- हमें इस बात की बहुत कम संभावना दिखती है कि पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा। कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से ग्रोथ रफ्तार पर असर पड़ सकता है और इसके कई दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। इससे टैक्स कलेक्शन में कमी और राजकोषीय दबाव में बढ़ोतरी भी हो सकती है।
Emkay Global का अनुमान है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण कई क्षेत्रों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। इन पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। हालांकि Ather एनर्जी जैसी इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों को फायदा हो सकता है। इसके अलावा, महिंद्रा & महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, श्रीराम फाइनेंस और चोलामंडल इन्वेस्टमेंट जैसी कंपनियों पर दबाव पड़ सकता है।
VRL Logistics, डेल्हीवरी, ब्लू डार्ट एक्सप्रेस और TCI एक्सप्रेस जैसी कंपनियों के मुनाफे में कमी आने की उम्मीद है। वहीं, Hindalco इंडस्ट्रीज और जिंदल स्टील पर कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण बुरा असर पड़ सकता है। वरुण बेवरेज, QSR ऑपरेटर और मेट्रो ब्रांड्स को मांग में कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, इंडस टावर्स को भी परोक्ष रूप से मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।




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