ईरान युद्ध का असर! महंगे तेल ने बिगाड़ी भारत की चाल, आपकी जेब पर ऐसे पड़ेगा भारी
Impact of Iran War on India: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार FY2027 में GDP ग्रोथ घटकर 6.2% रह सकती है, जबकि महंगाई बढ़ने का खतरा भी है। महंगे तेल से आयात बिल बढ़ेगा, कंपनियों का खर्च बढ़ेगा और आम लोगों की जेब पर भी सीधा असर पड़ेगा।

Impact of Iran War on India: ग्लोबल स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी असर दिखाने लगा है। हाल ही में आई मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) की रिपोर्ट में भी इसका संकेत साफ दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, महंगे तेल की वजह से भारत की आर्थिक ग्रोथ पर दबाव बढ़ गया है। यही वजह है कि FY2027 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान घटाकर 6.2% कर दिया गया है। आइए जरा विस्तार से समझते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का सीधा असर भारत पर कैसा पड़ेगा?
आपको बता दें कि जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। इससे ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि लोगों की जेब पर दबाव बढ़ता है और खर्च कम हो जाता है, जिससे डिमांड भी कमजोर पड़ने लगती है।
95 डॉलर प्रति बैरल होंगी तेल की कीमतें
रिपोर्ट के अनुसार, अगर तेल की कीमतें औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती हैं, तो उद्योगों की लागत बढ़ेगी, कंपनियों का मुनाफा घटेगा और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा, जो बढ़कर करीब 5.1% तक पहुंचने का अनुमान है।
85% कच्चा तेल आयात
भारत की एक बड़ी चुनौती यह भी है कि वह अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ जाता है और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी बढ़कर 2.5% तक जा सकता है। इससे रुपये पर भी दबाव बन सकता है।
किस-किस पर होगा असर?
इसका असर आम लोगों से लेकर कंपनियों और सरकार तक सभी पर पड़ता है, जहां आम आदमी की खरीदारी घटती है, वहीं कंपनियों के खर्च बढ़ जाते हैं और सरकार को सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है। हालांकि, RBI (Reserve Bank of India) फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए स्थिति संभालने की कोशिश कर सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं और तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो ग्रोथ 5.7% तक गिर सकती है और महंगाई 6% के पार जा सकती है। फिर भी मजबूत घरेलू मांग और सरकारी नीतियों की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था इस चुनौती का सामना करने में सक्षम मानी जा रही है।




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