नई श्रम शक्ति नीति-2025: गिग वर्कर्स को भी पेंशन और बीमा का मिलेगा लाभ
नई श्रम शक्ति नीति-2025 के तहत स्विगी, जोमैटो, ओला, उबर, अमेजन जैसे ऑनलाइन मंचों के लिए काम करने वाले औपचारिक या अस्थायी श्रमिकों (गिग वर्करों) को मान्यता मिलेगी। इसका मतलब है कि उन्हें भी अब सामाजिक सुरक्षा, बीमा और पेंशन योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।

केंद्र सरकार की ओर से नई श्रम शक्ति नीति में श्रमिकों के लिए कई नए प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। इसके तहत अब स्विगी, जोमैटो, ओला, उबर, अमेजन जैसे ऑनलाइन मंचों के लिए काम करने वाले औपचारिक या अस्थायी श्रमिकों (गिग वर्करों) को मान्यता मिलेगी। इसका मतलब है कि उन्हें भी अब सामाजिक सुरक्षा, बीमा और पेंशन योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
इसके लिए राज्य सरकारों को ऐसे श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन अभियान चलाना होगा। इससे डिजिटल मंचों के जरिए सेवाएं प्रदान करने वाले गिग वर्करों को भी सामाजिक सुरक्षा का पूरा लाभ मिल सकेगा। इसके अलावा अब सभी श्रमिकों और कंपनियों से जुड़ा डाटा श्रम पोर्टल पोर्टल रहेगा।
यह सिस्टम बताएगा कि किस क्षेत्र में कितने लोग काम कर रहे हैं, किसे बीमा या पेंशन का लाभ मिला और कहां सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ। शिकायतें भी अब ऑनलाइन दर्ज होंगी और समयबद्ध तरीके से उनका समाधान किया जाएगा। नीति को कुल तीन चरणों में लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें नीति से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने पर ध्यान दिया जाएगा।
अवसर मुहैया कराने पर होगा ध्यान
नई श्रम नीति रोजगार सुगमकर्ता के रूप में कार्य करेगी, जो श्रमिकों, नियोक्ताओं और प्रशिक्षण संस्थानों को जोड़ने का काम करेगा। नेशनल करियर सर्विस को भारत की डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर एम्प्लॉयमेंट के रूप में विकसित किया जाएगा, जो युवाओं को नौकरी मिलान , कौशल सत्यापन और कौशल के अनुरुप रोजगार के अवसर मुहैया कराने का काम करेगा। मसौदे के अनुसार, यह नीति भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में मदद करेगी।
भारत के पास 50 करोड़ से अधिक श्रमिक बल
मसौदे में कहा गया है कि भारत की कार्यबल में 50 करोड़ से अधिक श्रमिक शामिल हैं, जिनमें औपचारिक,अनौपचारिक , गिग और स्व-रोजगार से जुड़ी श्रमिक शामिल हैं। यह कार्यबल भारत की सबसे बड़ी उत्पादक संपत्ति है।
इतनी बड़ी जनसंख्या और विविधता भारत को रणनीतिक बढ़त को दर्शाता है लेकिन समान विकास, गुणवत्तापूर्ण रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी जटिल चुनौतियां भी हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए एकीकृत रूप से सामाजिक सुरक्षा के लिए काम किए जाने की जरूरत है।
नीति से जुड़े अहम लक्ष्य
- श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराने के लिए ईपीएफओ, ईएसआईसी, पीएमजेवाई, ई-श्रम और राज्य कल्याण बार्डों को जोड़कर एकीकृत सामाजिक सुरक्षा खाता बनाया जाएगा।
- कार्यस्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य संहिता 2020 का कार्यान्वयन किया जाएगा, जिसमें जोखिम आधारित निरीक्षण और महिलाओं के लिए संवेदनशील मानक शामिल होंगे।
- स्किल इंडिया, एनएपीएस और पीएमकेवीवाई कार्यक्रमों को जोड़कर एक एकीकृत करियर ढांचा तैयार किया जाएगा।
- वर्ष 2030 तक महिलाओं की श्रम भागीदारी 35 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। युवाओं के लिए उद्यमिता और करियर मार्गदर्शन के नए अवसर देने पर जोर दिया जाएगा।
- एमएसएमई के लिए सिंगल विंडो डिजिटल अनुपालन और सेल्फ सर्टिफिकेशन प्रणाली लागू की जाएगी।
- ग्रीन जॉब्स, एआई-सक्षम सुरक्षा प्रणालियां और पर्यावरण-हितैषी उद्योगों को बढ़ावा।
- इंटीग्रेटेड नेशनल लेबर डेटा आर्किटेक्चर के माध्यम से पारदर्शिता और मंत्रालयों के बीच तालमेल सुनिश्चित किया जाएगा।
नीति को तीन फेज में लागू किया जाएगा
पहला फेज: 2025–27 सभी श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन और सामाजिक सुरक्षा प्लेटफॉर्म तैयार करना।
दूसरा फेज: 2027–30 स्किल इंडिया और नेशनल करियर सर्विस को जोड़ना, डिजिटल सिस्टम को मजबूत बनाना।
तीसरा फेज: 2030 के बाद 100 फीसदी श्रमिकों का कवरेज और एकीकृत राष्ट्रीय श्रम डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
मेल के माध्यम से दें सुझाव: मंत्रालय ने नीति से जुड़ा मसौदा जाती करते हुए हितधारकों से जुझाव मांगे हैं, जो www.ddg-dget@nic.in पर मेल किए जा सकते हैं।




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