PF कवरेज के लिए सैलरी लिमिट में होगा इजाफा, मोदी सरकार कर रही तैयारी
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत सैलरी लिमिट को मौजूदा ₹15000 से बढ़ाकर ₹25000 या ₹30000 प्रति माह तक किया जा सकता है। हालांकि, कर्मचारियों के नियोक्ता की बैलेंस शीट पर कुछ दबाव पड़ सकता है।

केंद्र सरकार, प्रॉविडेंट फंड कवरेज के लिए सैलरी लिमिट बढ़ाने के प्रस्ताव पर फिर से विचार कर रही है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत सैलरी लिमिट को मौजूदा ₹15000 से बढ़ाकर ₹25000 या ₹30000 प्रति माह तक किया जा सकता है। EPFO के तहत अनिवार्य योगदान के लिए सैलरी लिमिट बढ़ाने से इसका दायरा बढ़ेगा और ज्यादा कामगार औपचारिक वर्कफोर्स में शामिल होंगे। इसके अलावा, कर्मचारियों का रिटायरमेंट फंड भी बढ़ेगा।
हालांकि, कर्मचारियों के नियोक्ता की बैलेंस शीट पर कुछ दबाव पड़ सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि सैलरी लिमिट बढ़ाने से नियोक्ता पर बड़ा वित्तीय असर पड़ेगा। बता दें कि लंबे समय से सैलरी लिमिट को बढ़ाने की मांग हो रही थी। इसको लेकर सरकार की ओर से विचार करने की भी खबरें आई थीं लेकिन फिर यह ठंडे बस्ते में चला गया।
क्यों हो रहा विचार?
ईटी की एक खबर के मुताबिक हाल ही में हुई वेतन वृद्धि के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा दायरे से बाहर हो जाने का खतरा पैदा हो गया है। बता दें कि NCR में औद्योगिक मजदूरों की मजदूरी में हुई भारी बढ़ोतरी से कई स्किल कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज से बाहर हो सकते हैं। इससे सरकार का सभी को सामाजिक सुरक्षा देने का लक्ष्य कमजोर पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि सरकार ESIC के तहत मजदूरी की सीमा बढ़ाने पर भी दोबारा विचार कर रही है ताकि बेहतर अनुपालन और व्यापार करने में आसानी के लिए दोनों को एक-दूसरे के बराबर लाया जा सके। ESIC के तहत मौजूदा सीमा ₹21,000 प्रति माह है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने ET को बताया कि श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कुछ राज्यों में मजदूरी में हाल ही में हुई बढ़ोतरी पर ध्यान दिया है और इन मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज पर असर का आकलन कर रहा है। अधिकारी ने कहा- इस मामले पर अंदरूनी तौर पर चर्चा चल रही है और मंत्रालय जल्द ही जरूरी मंजूरियां लेगा।
पहले भी किया गया था विचार
सरकार ने पहले भी EPFO के तहत सैलरी लिमिट बढ़ाने पर विचार किया था ताकि इसे ESIC के बराबर किया जा सके। EPFO की सैलरी लिमिट में आखिरी बदलाव 2014 में हुआ था, जब इसे ₹6500 से बढ़ाकर ₹15000 प्रति माह कर दिया गया था। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी सैलरी लिमिट बढ़ाने की पहल अब और भी जरूरी होती जा रही है क्योंकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ती मजदूरी और महंगाई के हिसाब से इस सीमा को अपडेट करने की जरूरत पर जोर दिया है।




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