आने वाला है गेल गैस का IPO, कब तक हो जाएगा लॉन्च, जानें सबकुछ
यह कदम सरकार की एसेट मोनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 का हिस्सा है, जिसके तहत CPSEs वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2030 के बीच अपनी सहायक कंपनियों में हिस्सेदारी बेचेंगी। पहली योजना के तहत 2024/25 तक 5.3 ट्रिलियन रुपये जुटाए गए थे।

अगर सबकुछ ठीक रहा तो गेल गैस का IPO वित्त वर्ष 2028 में लॉन्च हो जाएगा। दरअसल, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शहर गैस वितरण कंपनियों में GAIL की हिस्सेदारी को डीमर्जर या शेयर हस्तांतरण के माध्यम से गेल गैस को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव दिया है। पुनर्गठन के बाद, गेल गैस सूचीबद्ध होगी और IPO के माध्यम से अल्पसंख्यक हिस्सेदारी को कम करने की योजना है।
प्रस्तावित गेल गैस IPO से लगभग ₹3,100 करोड़ जुटाने की उम्मीद है। इसके अलावा, शहर गैस वितरण इकाइयों के लिए आंशिक इक्विटी विनिवेश का भी प्रस्ताव है। यह कदम सरकार की एसेट मोनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 का हिस्सा है, जिसके तहत CPSEs वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2030 के बीच अपनी सहायक कंपनियों में हिस्सेदारी बेचेंगी। पहली योजना के तहत 2024/25 तक 5.3 ट्रिलियन रुपये जुटाए गए थे, जो सरकार के 6 ट्रिलियन रुपये के लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है।
5 साल का लक्ष्य?
बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 जारी की है। इसमें पांच साल के भीतर 10 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों की एसेट के मौद्रीकरण से वित्त वर्ष 2025-26 से लेकर 2029-30 के दौरान कुल 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने की संभावित क्षमता का आकलन किया गया है। इसमें 5.8 लाख करोड़ रुपये निजी क्षेत्र के निवेश के रूप में शामिल हैं। वित्त मंत्री के मुताबिक एनएमपी 2.0 'विकसित भारत' के लक्ष्य के अनुरूप है और अवसंरचना विकास को गति देकर आर्थिक वृद्धि को बल देगी। उन्होंने मंत्रालयों से प्रक्रिया सरलीकरण और मानकीकरण पर जोर देने को कहा ताकि एसेट का मौद्रीकरण निर्बाध और समयबद्ध तरीके से हो सके।
किस क्षेत्र में कितने पैसे जुटाने का प्लान?
क्षेत्रवार लक्ष्यों के तहत राजमार्ग से 4.42 लाख करोड़ रुपये, बिजली से 2.77 लाख करोड़ रुपये, बंदरगाह से 2.64 लाख करोड़ रुपये और रेलवे से 2.62 लाख करोड़ रुपये जुटाने का अनुमान है। इसके अलावा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नागर विमानन, गोदाम, शहरी अवसंरचना, कोयला, दूरसंचार और पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी परिसंपत्तियों को भी इसमें शामिल किया गया है। सरकार ने कहा कि परिसंपत्ति मौद्रीकरण से मिलने वाली राशि को नए पूंजीगत व्यय में पुनर्निवेश किया जाएगा, जिससे बजटीय बोझ कम होगा।
मंत्रिमंडलीय सचिव की अध्यक्षता में एसेट मौद्रीकरण पर सचिवों का प्रमुख समूह' इस कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करेगा। मौद्रीकरण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) रियायतें और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) जैसे पूंजी बाजार साधनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सार्वजनिक और निजी दोनों पक्षों के लिए मूल्य सृजन सुनिश्चित होने का अनुमान है।




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