भारत में पेट्रोल-डीजल अब भी महंगा नहीं… इन देशों में बेहाल है आम जनता
पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब मई, 2022 के बाद से उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। आखिरी बार कीमतों में वृद्धि अप्रैल 2022 में हुई थी।

वैश्विक कच्चे तेल संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर से बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 दिनों से भी कम समय में शनिवार को तीसरी बार बढ़ोतरी की गई। पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे लीटर जबकि डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। ताजा बढ़ोतरी के बाद 10 दिनों के भीतर पेट्रोल एवं डीजल के दाम देशभर में लगभग पांच रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं। इससे पहले 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर और 19 मई को लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। हालांकि, दूसरे देशों के मुकाबले अब भी भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कम बढ़ोतरी की गई है।
किस देश में क्या है कीमत
फरवरी और मई 2026 के बीच म्यांमार में पेट्रोल की कीमतें लगभग 90 प्रतिशत, पाकिस्तान में 54 प्रतिशत से ज्यादा, संयुक्त राज्य अमेरिका में 44 प्रतिशत से ज्यादा और यूनाइटेड किंगडम में लगभग 19 प्रतिशत बढ़ीं। इसी अवधि के दौरान भारत में यह बढ़ोतरी लगभग 5 प्रतिशत रही, जो खाड़ी देशों को छोड़कर दुनिया भर में सबसे कम बढ़ोतरी में से एक थी। बता दें कि खाड़ी देश सीधे तौर पर ईंधन पर सब्सिडी देते हैं।
राज्यों में भी बड़ा अंतर
राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट और सेस की वजह से देशभर में पेट्रोल की कीमतों में बड़ा अंतर बना हुआ है। दरअसल, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी पूरे देश में एक जैसी रहती है लेकिन राज्य अपने हिसाब से वैल्यू एडेड टैक्स यानी वैट, सेस और दूसरे अतिरिक्त शुल्क लगाते हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में अधिक वैट और अतिरिक्त सेस के कारण पेट्रोल ₹112 प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गया है। बता दें कि आंध्र प्रदेश में 31 प्रतिशत वैट के साथ-साथ प्रति लीटर के हिसाब से कुछ और शुल्क और 'रोड डेवलपमेंट सेस' भी लगता है जबकि केरल में ईंधन पर 'सोशल सिक्योरिटी सेस' लगाया जाता है। वहीं, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, गोवा और असम जैसे राज्यों में अपेक्षाकृत कम वैट के कारण कीमतें कम बनी हुई हैं।
क्यों आया संकट?
बता दें कि अमेरिका और इजराइल की तरफ से 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद दोनों पक्षों में छिड़े संघर्ष से वैश्विक तेल की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य अवरुद्ध हो गया है। इससे कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं।
खुदरा ईंधन विक्रेताओं ने इस बढ़ती लागत के बावजूद पेट्रोल पंपों पर कीमतें कम रखी थीं। सरकार ने इसे उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया था। सरकार का कहना है कि कीमतों में इस वृद्धि के बावजूद, खुदरा ईंधन विक्रेताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।




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