गुड न्यूज: सरकार के इस उपाय से सस्ता होगा खाद्य तेल, कब दिखेगा कीमतों पर असर
होली से पहले गुड न्यूज है। सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती की है। ऐसे में इस कदम का सीधा असर तेल की बोतलों पर छपे अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर पड़ेगा और कंपनियां जल्द ही नए दामों के साथ उत्पाद बाजार में उतारेंगी।

आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती की है। सरकार के फैसले के बाद 31 मई से बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। इस कदम का सीधा असर तेल की बोतलों पर छपे अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर पड़ेगा और कंपनियां जल्द ही नए दामों के साथ उत्पाद बाजार में उतारेंगी।
खबरों के अनुसार सरकार ने कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी घटा दी है। अब तक कच्चे पाम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर 20% आयात शुल्क वसूला जा रहा था, जिसे अब सरकार ने घटाकर सीधा 10% कर दिया है।
जरूरत का लगभग 70% हिस्सा दूसरे देशों से आता है
चूंकि भारत अपनी खाद्य तेलों की जरूरत का लगभग 70% हिस्सा दूसरे देशों से खरीदकर पूरा करता है, इसलिए टैक्स में हुई यह 10% की कटौती सीधे तौर पर घरेलू बाजार में तेल की बोतलों और पैकेटों के दाम नीचे ले आएगी। शुल्क में कमी के बाद इन तेलों के आयात की लागत कम हो जाएगी, जिससे रिफाइनरी कंपनियों को सस्ता कच्चा माल मिलेगा। माना जा रहा है कि इसका फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा।
पाम ऑयल के लिए इन देशों पर निर्भरता
भारत पाम ऑयल के लिए मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों पर निर्भर है, जबकि सूरजमुखी तेल यूक्रेन और रूस जैसे देशों से आता है। सितंबर 2024 में जब सरकार ने टैक्स बढ़ाया था, तब तेल के दाम अचानक आसमान छूने लगे थे।
सरकार ने तेल उद्योग से स्पष्ट कहा है कि आयात शुल्क में दी गई राहत का लाभ ग्राहकों तक पहुंचना चाहिए। खाद्य तेल कंपनियां अब अपने स्टॉक और नई खेप के हिसाब से अधिकतम खुदरा मूल्य में संशोधन कर रही हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ हफ्तों में खुदरा बाजार में कीमतों में पांच से 10 रुपये प्रति लीटर तक की कमी देखने को मिल सकती है, हालांकि वास्तविक गिरावट ब्रांड और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव कम होगा
उद्योग संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि इससे घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव कम होगा और मांग में सुधार आएगा। भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात शुल्क का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
हालांकि कुछ कृषि विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि आयात शुल्क में कमी से घरेलू तिलहन किसानों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। सस्ता आयातित तेल बाजार में आने से स्थानीय उत्पादकों के दाम प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए यह राहत भरी खबर है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर रहीं तो आने वाले समय में खाद्य तेल के दाम नियंत्रित रहने की उम्मीद की जा रही है।




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