Defence Compnay Hindustan Shipyard 40 years wait is over net worth turns positive 40 साल के बाद डिफेंस कंपनी ने चखा प्रॉफिट का स्वाद, 4 साल में बदली किस्मत, दहाड़ से सरकार गदगद, Business Hindi News - Hindustan
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40 साल के बाद डिफेंस कंपनी ने चखा प्रॉफिट का स्वाद, 4 साल में बदली किस्मत, दहाड़ से सरकार गदगद

  • 40 साल के लम्बे इंतजार के बाद सरकारी डिफेंस कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड (Hindustan Shipyard) नेट वर्थ पॉजिटिव हुआ है। कंपनी ने मुनाफा कमाया है। लम्बे समय से यह कंपनी लगातार घाटे में ही थी। लेकिन अब स्थिति बदल गई है।

Sun, 6 April 2025 07:52 PMTarun Pratap Singh लाइव हिन्दुस्तान
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40 साल के बाद डिफेंस कंपनी ने चखा प्रॉफिट का स्वाद, 4 साल में बदली किस्मत, दहाड़ से सरकार गदगद

40 साल के लम्बे इंतजार के बाद सरकारी डिफेंस कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड (Hindustan Shipyard) नेट वर्थ पॉजिटिव हुआ है। कंपनी ने मुनाफा कमाया है। लम्बे समय से यह कंपनी लगातार घाटे में ही थी। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। बीते 4 साल कंपनी के लिए काफी शानदार रहे हैं। जिसकी वजह से स्थिति में बदलाव हुआ है।

295 करोड़ रुपये का हुआ प्रॉफिट

इस कंपनी को डिफेंस मिनिस्ट्री ने 2010 में अपने साथ जोड़ा था। तब कंपनी काफी वित्तीय समस्याओं से उलझी हुई थी। लेकिन बीता वित्त वर्ष हिंदुस्तान शिपयार्ड के लिए शानदार रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कंपनी की कुल कमाई 1586 करोड़ रुपये रहा है। इस दौरान कंपनी का प्रॉफिट (टैक्स भुगतान के बाद) 295 करोड़ रुपये रहा है। सालाना आधार पर कंपनी के प्रॉफिट में 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। बता दें, हिंदुस्तान शिपयार्ड भारतीय नौसेना के लिए सहायक जहाज बनाती है। इसके अलावा कंपनी पनडुब्बियों की मरम्मत का भी काम करती है।

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मिनिरत्न का स्टेट पाने के लिए तैयार कंपनी

इकनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों का मानना है कि कंपनी अब मिनिरत्न का स्टेटस पाने के लिए तैयार है। हिंदुस्तान शिपयार्ड की स्थापना 1941 में हुई थी। यह कंपनी भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। कंपनी की लोकेशन विशाखापट्टनम है। यह शिप बिल्डिंग सेंटर के नजदीक है। यहीं पर भारत की न्यूक्लियर आर्म्ड सबमरीन बनाई जाती है। इसके अलावा नौसेना की पूर्वी कमांड का हेडक्वार्टर भी यहीं है।

डिफेंस मिनिस्ट्री के अधिग्रहण के बाद सरकार की तरफ से वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान 452.68 करोड़ रुपये का ग्रांट दिया गया था। लेकिन इसके बाद भी कंपनी की नेटवर्थ निगेटिव 628 करोड़ रुपये थी। 2014-15 में कंपनी की निगेटिव नेटवर्थ 1023 करोड़ रुपये थी। हिंदुस्तान शिपयार्ड तब ऑर्डर की कमियों के साथ जूझ रहा था। वहीं, इसका संचालन भी ठीक से नहीं हो रहा था।

कोविड के बाद बदली किस्मत

कोरोना ने भी इस कंपनी पर बुरा असर डाला था। लेकिन उसके बाद से इसकी स्थिति में बहुत तेजी के साथ बदलाव आना शुरू हुआ है। 2023-24 में हिंदुस्तान शिपयार्ड का टर्नओवर रिकॉर्ड 1413 करोड़ रुपये रहा। जोकि 2020-21 में 478 करोड़ रुपये रहा था। अधिकारियों ने बताया कि कंपनी ने अपने खर्चों में कटौती की। संचालन बेहतर से किया। जिसकी वजह से 1253 करोड़ रुपये की उधारी चुकाई जा सकी।

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