could everyone receive a waiver on loan payments similar to the covid 19 period Small business owners are in distress क्या कोरोना काल की तरह सबको लोन पेमेंट में मिल सकती है छूट? संकट में हैं छोटे कारोबारी, Business Hindi News - Hindustan
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क्या कोरोना काल की तरह सबको लोन पेमेंट में मिल सकती है छूट? संकट में हैं छोटे कारोबारी

इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने MSMEs को अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से आर्थिक झटकों से बचाने के लिए ऑप्ट-इन रीपेमेंट मोरेटोरियम का प्रस्ताव दिया है। अमेरिका-ईरान जंग की वजह से MSME के बने सामान की डिमांड घट सकती है, जिससे उनकी कमाई और लोन चुकाने की क्षमता पर बुरा असर पड़ेगा।

Mon, 13 April 2026 11:04 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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क्या कोरोना काल की तरह सबको लोन पेमेंट में मिल सकती है छूट? संकट में हैं छोटे कारोबारी

मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ने से उद्योग जगत भी चिंतित है। कोरोना काल की तरह इस संकट में लोन मोरेटोरियम की दरकार है। भारतीय बैंक मुश्किल में फंसे छोटे व्यवसायों के लिए RBI से राहत की मांग कर रहे हैं। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने MSMEs को अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से आर्थिक झटकों से बचाने के लिए 'ऑप्ट-इन' रीपेमेंट मोरेटोरियम का प्रस्ताव दिया है। बता दें मोरेटोरियम का अर्थ है 'भुगतान स्थगित करना'। यह मोरेटोरियम अवधि के दौरान किस्तों के पेमेंट में अस्थायी छूट है।

एनडीटीवी प्रॉफिट के मुताबिक एक बैंक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से MSME के बने सामान की डिमांड घट सकती है, जिससे उनकी कमाई और लोन चुकाने की क्षमता पर बुरा असर पड़ेगा। इसलिए भारतीय बैंक संघ ने RBI से कुछ समय के लिए बैंको से किस्त न लेने की गुहार लगाई है।

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गुहार पर आरबीआई ने क्या कहा

RBI ने यह प्रस्ताव मिलने के बाद जल्द ही फैसला लेने की बात कही है। पहले ही RBI ने निर्यातकों की मदद के लिए 30 जून तक एक्सपोर्ट लोन पर राहत दे रखी है, ताकि जंग की वजह से हुई ढुलाई और सप्लाई में देरी का सामना किया जा सके।

बैंक सूत्रों का कहना है कि कोरोना काल में RBI ने जब किस्त पर रोक लगाई थी, तब बैड लोन में उतनी बढ़ोतरी नहीं हुई, जितनी डर थी। अब अमेरिका-ईरान जंग को देखते हुए भी कमजोर वेंचर्स को ऐसी राहत देना बहुत जरूरी है।

MSME पर कुल 67.6 लाख करोड़ रुपये का कर्ज

SIDBI की दिसंबर 2025 वाली रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक MSME पर कुल 67.6 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बकाया था। पिछले साल के मुकाबले यह 16% ज्यादा है। पिछले पांच सालों में यह 17% सालाना की दर से बढ़ा है। इसकी वजह सिक्योर्ड बिजनेस लोन और एसेट्स गिरवी रखकर लिए गए लोन की मजबूत मांग है।

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बाहर के दबाव के बावजूद, कर्ज की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा है। 90 से 720 दिन तक जो किस्तें बकाया रहती हैं, वह घटकर 1.87% रह गई है, जो पिछले पांच सालों का सबसे निचला स्तर है।

कोविड के दौरान आरबीआई ने क्या-क्या दी थी राहत

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित लोगों को राहत देने के उपाय के रूप में पर्सनल और बिजनेस लोन के पेमेंट पर तीन महीने की मोहलत की घोषणा की थी। बाद में इसे बढ़ाकर 31 अगस्त, 2020 तक कर दिया गया। इसके तहत 1 मार्च 2020 से शुरू होने वाले तीन महीनों के लिए अपने टर्म लोन के लिए कोई भुगतान नहीं करना पड़ा।

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आरबीआई ने बैंकों को क्रेडिट कार्ड सहित सभी प्रकार के लोन के रिपेमेंट के लिए 60 दिनों की मोहलत देने की भी सलाह दी थी। इस फैसले से उन लोगों को राहत मिली थी, जिन्हें महामारी के प्रकोप के कारण अपने लोन चुकाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

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