यूपी से बिहार तक औद्योगिक स्मार्ट सिटी की सभी बाधाएं दूर, निर्माण कार्य शुरू
करीब डेढ़ वर्ष की लंबी प्रक्रिया के बाद जमीन अधिग्रहण और निर्माण के लिए कंपनियों को चिन्हित करने जैसे कार्य पूरे कर लिए गए हैं। नौ सिटी को विकसित किए जाने का काम भी शुरू हो गया है, जिसमें यूपी में आगरा, प्रयागराज, बिहार में गया जी और उत्तराखंड के खुरपिया का औद्योगिक स्मार्ट सिटी शामिल हैं।

● अरुण चट्ठा
औद्योगिक विकास के लिहाज से विकसित किए जा रहे 12 औद्योगिक स्मार्ट सिटी का निर्माण कार्य गति पकड़ रहा है। औद्योगिक शहरों के विकास से जुड़ी सभी बाधाएं दूर हो गई हैं। करीब डेढ़ वर्ष की लंबी प्रक्रिया के बाद जमीन अधिग्रहण और निर्माण के लिए कंपनियों को चिन्हित करने जैसे कार्य पूरे कर लिए गए हैं। नौ सिटी को विकसित किए जाने का काम भी शुरू हो गया है, जिसमें यूपी में आगरा, प्रयागराज, बिहार में गया जी और उत्तराखंड के खुरपिया (उधम सिंह नगर) का औद्योगिक स्मार्ट सिटी शामिल हैं। शेष औद्योगिक सिटी का विकसित किए जाने का काम जल्द शुरू होने जा रहा है। ये शहर नए हैं लेकिन कुछ औद्यौगिक शहरों के आसपास बनाए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम ने दिसंबर 2027 तक पहले चरण में 12 औद्योगिक सिटी में 26 हजार एकड़ का क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसी को ध्यान में रखकर औद्योगिक सिटी के अंदर सड़क, सीवर, बिजली, वेयरहाउस से लेकर मुख्य मार्गों से जोड़ने जैसी सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है। यह सुनियोजित शहरी क्षेत्र आधुनिक तकनीक प्लग-एंड-प्ले जैसे बुनियादी ढांचे और डेटा-आधारित प्रणालियों से विनिर्माण को बढ़ावा देगा।
आवंटन के बाद ही शुरू कर सकेंगे उत्पादन
एनआईसीडीसी के सीईओ और एमडी रजत कुमार सैनी का कहना है कि औद्योगिक स्मार्ट सिटी देश में विनिर्माण कार्य को गति देंगे। एक निर्धारित शुल्क पर उद्योग लगाने के लिए प्लॉट का आवंटन किया जाएगा। जमीन का मूल्य और निर्माण पर आने वाली कुल लागत को जोड़कर कीमत निर्धारित की जाएगी। इससे उद्यमियों को नए उद्योगों को लगाने पर भारी रकम खर्च नहीं करनी पड़ेगी। प्लॉट आवंटित होने के बाद अपना उद्योग लगाकर उत्पादन शुरू कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें अलग से कोई खास मंजूरी नहीं लेनी होगी।
● प्रयागराज : 352 एकड़ (लागत - 658 करोड़)
लक्ष्य क्षेत्र : ई-मोबिलिटी आधारित ऑटोमोबाइल, खाद्य उत्पाद, चमड़ा उत्पाद, साइकिल उत्पादन, पैकेजिंग।
निर्माण स्थिति : कार्य प्रगति पर
● आगरा :1058 एकड़ (लागत- 1812 करोड़)
लक्ष्य क्षेत्र : चमड़ा और उससे जुड़े उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, दवाएं और चिकित्सा उपकरण, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण
निर्माण स्थिति : कार्य प्रगति पर
● खुरपिया (उत्तराखंड) : 1002 एकड़ (लागत- 1265 करोड़)
लक्ष्य क्षेत्र : ऑटोमोबाइल और ऑटो उपकरण, इंजीनियरिंग एवं निर्माण।
निर्माण स्थिति: जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी, काम जारी
● गया जी (बिहार) : 1670 एकड़ (लागत - 1339 करोड़)
लक्ष्य क्षेत्र : कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, बिल्डिंग मेटेरियल, चमड़ा, रेडीमेट गारमेंट, हैंडलूम और मेडिकल उपकरण।
व्यापार समझौतों का मिलेगा निवेश के रूप में लाभ
एनआईसीडीसी के सीईओ कहते हैं कि भारत ने बीते कुछ वर्षों में मुक्त व्यापार समझौतों पर तेजी से काम किया है। औद्योगिक सिटी विकसित होने के बाद व्यापार समझौतों की मदद से हमें विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। कई विदेशी कंपनियां पहले से उद्योग लगाने के प्रति इच्छा जता चुकी है लेकिन असल मायने में पांच से सात साल में औद्योगिक सिटी में बड़े निवेश दिखाई देंगे। जब औद्योगिक सिटी पूरी तरह से विकसित होंगी। अब जैसे-जैसे औद्योगिक सिटी को विकसित करने का काम आगे बढ़ेगा तो वहां पर उद्योगों के लिए जमीन का आवंटन शुरू कर दिया जाएगा।




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