69 lakh central employee pensioners under ops less than 50000 under nps why is there so much difference OPS के तहत 69 लाख केंद्रीय कर्मचारी पेंशनभोगी, NPS के तहत 50000 से भी कम, क्यों है इतना अंतर, Business Hindi News - Hindustan
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OPS के तहत 69 लाख केंद्रीय कर्मचारी पेंशनभोगी, NPS के तहत 50000 से भी कम, क्यों है इतना अंतर

NPS Vs OPS: पुरानी पेंशन योजना (OPS)के तहत लगभग 69 लाख पेंशनभोगी हैं। जबकि, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत 31 जनवरी, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार लगभग 49,802 पेंशनभोगी हैं।

Tue, 17 March 2026 10:26 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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OPS के तहत 69 लाख केंद्रीय कर्मचारी पेंशनभोगी, NPS के तहत 50000 से भी कम, क्यों है इतना अंतर

देशभर में कर्मचारी संघ लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा संसद में भी बार-बार उठता रहा है, जहां तर्क दिया जाता है कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) कर्मचारियों को बाजार जोखिम में डालती है। केंद्र सरकार ने एक बार फिर राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

केंद्र सरकार का स्पष्टीकरण

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार में फिलहाल लगभग 50.14 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। हालांकि, पेंशनभोगियों की संख्या को देखें तो एक बड़ा वर्ग आज भी पुरानी पेंशन योजना (OPS) के तहत पेंशन प्राप्त कर रहा है। पुरानी पेंशन योजना (OPS)के तहत लगभग 69 लाख पेंशनभोगी हैं। जबकि, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत 31 जनवरी, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार लगभग 49,802 पेंशनभोगी हैं।

क्यों है इतना बड़ा अंतर

यह अंतर इसलिए है क्योंकि OPS 1 जनवरी, 2004 से पहले सरकारी सेवा में शामिल होने वाले कर्मचारियों पर लागू होती थी, जबकि NPS इस तिथि के बाद जॉइन करने वालों के लिए है।

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NPS के तहत पेंशन भुगतान में देरी नहीं

सरकार ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में NPS के तहत मासिक पेंशन भुगतान में देरी का कोई मामला सामने नहीं आया है। वित्त मंत्रालय और पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) को वार्षिकी सेवा प्रदाताओं द्वारा देरी की कोई शिकायत नहीं मिली है।

OPS बहाली पर सरकार का रुख

केंद्र सरकार ने कहा कि OPS को बहाल करने का फैसला पूरी तरह से राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में है, क्योंकि उनके कर्मचारियों की पेंशन नीति उनका विषय है। हालांकि, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने OPS में वापसी को लेकर चेतावनी जारी की है। CAG का कहना है कि इससे राज्यों के वित्त पर दीर्घकालिक पेंशन देनदारियों का दबाव बढ़ सकता है।

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OPS बहाल करने वाले राज्य

वित्तीय चिंताओं के बावजूद, कर्मचारी संघों के दबाव में कई राज्य पहले ही पुरानी पेंशन योजना में लौट चुके हैं। इनमें राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और झारखंड शामिल हैं।

OPS, NPS और UPS में क्या अंतर है?

पुरानी पेंशन योजना (OPS): यह एक निश्चित लाभ वाली पेंशन प्रणाली थी। इसमें कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद आखिरी वेतन का 50% नियमित महंगाई भत्ते के साथ मिलता था। इसमें कर्मचारी को कोई योगदान नहीं देना होता था।

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS): यह एक निश्चित योगदान वाली प्रणाली है। इसमें कर्मचारी और सरकार दोनों ही पेंशन फंड में योगदान करते हैं, जिसे बाजार से जोड़ा जाता है। अंतिम पेंशन जमा राशि और उस पर मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करती है।

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एकीकृत पेंशन योजना (UPS): NPS के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए सरकार ने हाल ही में UPS पेश की है। इसका उद्देश्य योगदान वाली प्रणाली को बनाए रखते हुए अधिक अनुमानित और सुनिश्चित पेंशन लाभ प्रदान करना है।

डिजिटल पेंशन सेवाओं को बढ़ावा

सरकार ने पेंशन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए डिजिटल कदमों पर भी प्रकाश डाला। 'भविष्य' सॉफ्टवेयर के माध्यम से एक सरल पेंशन आवेदन फॉर्म पेश किया गया है। पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC), एनपीएस निकासी के लिए डिजिटल प्रक्रिया और एसएमएस/ईमेल अलर्ट जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। सरकार के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और पेंशन सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है।

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