CM Dhami attacks Congress over women reservation bill at women protest rally in Dehradun देहरादून में महिला जन आक्रोश रैली: सीएम धामी का कांग्रेस पर हमला, नारी सम्मान पर सियासत तेज, Brand-stories Hindi News - Hindustan
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देहरादून में महिला जन आक्रोश रैली: सीएम धामी का कांग्रेस पर हमला, नारी सम्मान पर सियासत तेज

सीएम धामी ने रैली और पदयात्रा के जरिए महिला सशक्तिकरण का दिया संदेश, विपक्ष पर अधिकारों में बाधा डालने का आरोप

Sat, 25 April 2026 04:30 PMUjala Chowdhry लाइव हिन्दुस्तान
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देहरादून में महिला जन आक्रोश रैली: सीएम धामी का कांग्रेस पर हमला, नारी सम्मान पर सियासत तेज

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित महिला जन आक्रोश रैली में हिस्सा लिया और नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। रैली के बाद उन्होंने हजारों महिलाओं के साथ परेड ग्राउंड से घंटाघर तक पदयात्रा भी की।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनका अधिकार दिलाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था, लेकिन “लोकसभा में पर्याप्त संख्या न होने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका।” उन्होंने आरोप लगाया कि “विपक्ष ने महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने की साजिश रची।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आधी आबादी के अधिकारों को सुनिश्चित करने के प्रधानमंत्री के प्रयासों को रोककर विपक्ष ने “राष्ट्र के साथ बड़ा अन्याय” किया है। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुकी हैं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं को “नए भारत” के निर्माण की आधारशिला मानते हैं और उनके सशक्तिकरण के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और जन धन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे लाखों महिलाएं बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी हैं। उन्होंने स्टार्टअप इंडिया, लखपति दीदी योजना और तीन तलाक समाप्त करने जैसे कदमों का भी जिक्र किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों से महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के पहले कार्यकाल में छह महिला मंत्री थीं और वर्तमान में सात महिला मंत्री हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का उदाहरण भी दिया।

राज्य सरकार के स्तर पर उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए धामी ने कहा कि उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है और महिलाओं की सुरक्षा व अधिकारों के लिए समान नागरिक संहिता लागू की गई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना और मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में 2.65 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं।

रैली में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह और कई विधायक भी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम बना दिया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है। हिंदुस्तान टाइम्स की पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी आगामी चुनाव मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में लड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महिला मुद्दों को केंद्र में रखकर इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए भाजपा अपने समर्थन आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जिससे आने वाले चुनावों में उसे लाभ मिल सके।

विपक्ष ने इस मामले में क्या कहा?

वहीं, विपक्ष ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा के रुख को लेकर तीखा विरोध जताया है। एएनआई के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भाजपा पर इस मुद्दे को लेकर दिखावटी राजनीति करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि भाजपा खुद को महिलाओं की हितैषी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसकी मंशा स्पष्ट नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक को कांग्रेस सहित सभी दलों का समर्थन मिला था और अब भाजपा इस मुद्दे को चुनावी फायदे के लिए उठा रही है।

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि महिलाओं को सिर्फ आरक्षण ही नहीं, बल्कि सुरक्षा की भी जरूरत है। पीटीआई के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के दौरान महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सबसे अधिक प्रभावित हुई है और उनके खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और सम्मान के मुद्दों पर ठोस काम करने में विफल रही है।

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