सामूहिक सोच और स्वप्न का समय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र की सत्ता में विश्वास, विकास और जन-कल्याण को समर्पित अपने 12 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। ‘संकल्प से सिद्धि’ का यह गौरवशाली कालखंड देश के विकास, आर्थिक सशक्तीकरण, सुरक्षा और वैश्विक ….

नितिन नवीन,राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र की सत्ता में विश्वास, विकास और जन-कल्याण को समर्पित अपने 12 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। ‘संकल्प से सिद्धि’ का यह गौरवशाली कालखंड देश के विकास, आर्थिक सशक्तीकरण, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व वृद्धि का साक्षी रहा है।
कांग्रेस देश को अनिश्चितता, भ्रष्टाचार व कमजोर नेतृत्व की विरासत देकर गई थी, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को आत्मविश्वास, सुशासन और विकास की नई पहचान दी है। आज दुनिया भारत को एक क्षेत्रीय ताकत नहीं, बल्कि 21वीं सदी की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में देख रही है। प्रधानमंत्री के लिए राजनीति ‘परिवार नहीं, राष्ट्र प्रथम’ और ‘सत्ता नहीं, सेवा प्रथम’ का मार्ग रही है। अगर हम दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के इतिहास को देखें, तो उनकी सफलता के पीछे जो एक मूलमंत्र नजर आता है, वह है उस राष्ट्र का ‘सामूहिक स्वप्न’। भारत के संदर्भ में, वर्ष 2014 में पहली बार सवा सौ करोड़ की विशाल जनता को इस सामूहिक चेतना के सूत्र में पिरोने का ऐतिहासिक कार्य प्रधानमंत्री मोदी ने किया।
देश को पहला ऐसा नेतृत्व मिला है, जो एक प्रधान सेवक के भाव से ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के महासंकल्प को लेकर निरंतर आगे बढ़ रहा है। साल 2014 में उन्होंने पहले राष्ट्र को एक सामूहिक सोच दी, फिर जन-विश्वास के बल पर उस सोच को सामूहिक संकल्प में बदला और आज वही संकल्प विकसित भारत के रूप में एक विराट सामूहिक स्वप्न का रूप ले चुका है। इस महापरिवर्तन की शुरुआत बुनियादी ढांचे के विकास में अभूतपूर्व क्रांति से हुई। साल 2014 से पहले भारत बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा था। आज जमीनी स्तर पर बदलाव का परिणाम है कि देश में 12 करोड़ से अधिक शौचालय बने, लगभग शत-प्रतिशत विद्युतीकरण हुआ, एक्सप्रेस-वे नेटवर्क सात गुना बढ़ा और हवाईअड्डे 74 से बढ़कर 160 हो गए।
यह कालखंड मानसिक गुलामी से वास्तविक मुक्ति का साक्षी है। लोक कल्याण मार्ग, कर्तव्य पथ व सेवा तीर्थ का नामकरण और योग की वैश्विक लाेकप्रियता इसके प्रमाण हैं। एक समय था, जब देश के शीर्ष नेतृत्व ने तत्कालीन 54 करोड़ की आबादी को बोझ माना था, पर प्रधानमंत्री मोदी मानते हैं कि 140 करोड़ देशवासी भारत की विकास-गाथा की सबसे मजबूत कड़ी हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संकल्प को पूरा करते हुए अनुच्छेद 370 को हमेशा के लिए निरस्त किया। आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर उन्होंने नक्सलवाद व आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई गई। कोरोना काल में 220 करोड़ से अधिक मुफ्त वैक्सीन डोज व ‘वैक्सीन मैत्री’ ने विश्व स्तर पर उभरते भारत की क्षमता का परिचय दिया।
आज का भारतीय युवा ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब गीवर’ बन रहा है। दो लाख से अधिक स्टार्टअप और 125 से ज्यादा यूनिकॉर्न के साथ भारत ‘मैनपावर’ से ‘मैन्युफैक्चरिंग पावर’ की ओर बढ़ रहा है। इसी प्रकार, देश महिला विकास से आगे बढ़कर महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का साक्षी बन रहा है, जहां तीन करोड़ से अधिक लखपति दीदियां और सुरक्षा बलों में महिला अधिकारियों की चार गुना वृद्धि नारी-शक्ति के स्वावलंबन को दर्शाती है।
गरीब कल्याण के क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं ने वंचितों के दुश्चक्र को गुणात्मक चक्र में बदल दिया है, जिससे 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। चार करोड़ पक्के घर, 60 करोड़ नागरिकों को आयुष्मान कवच और पीएम मुद्रा योजना के तहत 40 लाख करोड़ रुपये का कोलेटरल-फ्री लोन इसका आधार बना। डिजिटल क्रांति ने ‘एक रुपये में से सिर्फ 15 पैसे पहुंचने’ के पुराने दौर को समाप्त कर डीबीटी के माध्यम से 51 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए।
जनधन-आधार-मोबाइल (जेएएम) ट्रिनिटी और यूपीआई के जरिये आज 314 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक डिजिटल लेन-देन हो रहा है, जो वैश्विक स्तर का 49 प्रतिशत है। इसी तरह, प्रकृति के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए भारत ने स्वच्छ भारत अभियान, एक पेड़ मां के नाम और सौर क्षमता को 110 गीगावाट से अधिक पहुंचाकर हरित धरती के संकल्प को सिद्ध किया है।
आज देश के सीमावर्ती क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिली है। कभी देश के अंतिम गांव कहे जाने वाले ये क्षेत्र आज भारत के प्रथम गांव के रूप में नई पहचान पा चुके हैं। इसके साथ ही आज भारत की सैन्य क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है और हमारी सेनाएं अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित हैं। 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल महालोक का जीर्णोद्धार हमारे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की उस सभ्यतागत चेतना का पुनर्जागरण है, जो प्रधानमंत्री के मूलमंत्र ‘विकास भी, विरासत भी’ को पूरी सार्थकता से साकार कर रहा है।
पिछले 12 वर्षों में देश के सोचने का नजरिया बदला है। आज के भारत का मिजाज ऐसा है, जहां ‘इंटरप्रेन्योर’ बनना एक ट्रेंड है, और ‘वोकल फॉर लोकल’ से लेकर ‘मेक इन इंडिया’ को अपनाना हर नागरिक का फैशन बन चुका है। आज देश में आध्यात्मिक पर्यटन का एक नया उभार दिख रहा है और सबसे महत्वपूर्ण बात, राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ सामूहिक संकल्प को पूरा करना देश का मानस बन चुका है। इन तमाम सकारात्मक बदलावों के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका एक ‘ट्रेंड सेटर’ की रही है।
आज भारत न केवल आंतरिक रूप से निरंतर सशक्त हो रहा है, बल्कि वैश्विक पटल पर भी एक महाशक्ति के रूप में तेजी से उभरा है। जब हमारे प्रधानमंत्री को विश्व के 32 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त होता है, तब यह वास्तव में उस सनातन भारतीय सोच और 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का सम्मान है। यही कारण है कि आज विकसित भारत केवल एक नारा नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की उस दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसे भारत के लोगों ने अटूट विश्वास और संकल्पित भाव से आत्मसात किया है।
सरकार के ये 12 वर्ष जहां सेवा, सुशासन और जन-आकांक्षाओं की पूर्ति के रहे हैं, वहीं अगले 21 वर्ष ‘विकसित भारत @ 2047’ के परम लक्ष्य को हासिल करने की यात्रा होंगे। इस अमृतकाल में हम सभी देशवासी मिलकर एक सशक्त, समृद्ध, सुरक्षित, स्वावलंबी, समर्थ और समरस भारत के सामूहिक स्वप्न को अवश्य साकार करेंगे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
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